कौन हैं जयपाल मालवीय जिन्होंने शूटिंग में भारत को दिलाया 2028 ओलिंपिक का पहला कोटा

जयपाल मालवीय ने दोहा में हो रही ISSF World Championships में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल कैटेगरी में दूसरा स्थान हासिल किया. इसके जरिए भारत को 2028 ओलिंपिक के लिए शूटिंग का पहला कोटा मिला.

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Shakti Shekhawat

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जयपाल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आते हैं. वे हालिया समय में शूटिंग में उभरे हैं.

जयपाल अपने घरवालों से छुपाकर शूटिंग कर रहे हैं. उन्होंने घर पर बता रखा है कि वे भोपाल में नौकरी करते हैं

2028 लॉस एंजिल्स ओलिंपिक के लिए भारत को शूटिंग में पहला कोटा मिल गया. जयपाल मालवीय ने यह कोटा हासिल किया. उन्होंने 5 नवंबर को ISSF World Championships में पुरुषों के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में सिल्वर मेडल जीता. इसके जरिए भारत का पहला शूटिंग कोटा तय हुआ. जयपाल ने 242.2 के स्कोर के साथ दूसरा स्थान हासिल किया. वे चीन के काई हु से पीछे रहे जिनका स्कोर 243.9 रहा. जयपाल 585 के स्कोर के साथ फाइनल में पहुंचे थे. उन्होंने 31 साल की उम्र में यह मेडल जीता. वे भारतीय टीम में अभी डेब्यू करने वाले सबसे उम्रदराज शूटर हैं.

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जयपाल ने फाइनल में मिली जुली शुरुआत की. पहली सीरीज में उनका स्कोर 50.5 रहा. वे इससे तीसरे नंबर पर थे. 10 शॉट की सीरीज के बाद वे चौथे नंबर पर फिसल गए. मगर उन्होंने वापसी की और दूसरे स्थान पर पहुंचकर सिल्वर मेडल तय किया. जयपाल ने फाइनल के बाद कहा कि माहौल जबरदस्त था. उन्हें काफी मोटिवेशन मिल रहा था. वे ओलिंपिक खेलना चाहते हैं. हालांकि कोटा हासिल करने का मतलब यह नहीं है कि वे ही ओलिंपिक में जाएंगे. कोटा देश के लिए होता है. जब ओलिंपिक होंगे तब फिर से ट्रायल्स होंगे.

कौन हैं जयपाल मालवीय

जयपाल मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा से आते हैं और किसान परिवार से हैं. वे हालिया समय में शूटिंग में उभरे हैं. उन्होंने नेशनल ट्रायल्स में पहले ट्रायल को जीतकर सभी का ध्यान खींचा था. तब वे सातवें नंबर पर रहते हुए फाइनल में पहुंचे मगर 245.6 के स्कोर के साथ फाइनल में सबसे ऊपर रहे. वे हांगझू में 2026 ISSF World Cup में नौवें पायदान पर रहे थे. इससे वे फाइनल में जाने से चूक गए थे.

जयपाल मालवीय ने घरवालों से छुपा रखा है शूटिंग का सच

जयपाल अपने घरवालों से छुपाकर शूटिंग कर रहे हैं. उन्होंने घर पर बता रखा है कि वे भोपाल में नौकरी करते हैं और 20 हजार रुपये महीना मिलता है. साथ ही सरकारी नौकरी की तैयारी करते हैं. उन्होंने हालिया चैंपियनशिप के लिए दोहा जाने के बारे में कहा कि ऑफिस का काम है इस वजह से बाहर जाना होगा. स्पोर्टस्टार से बात करते हुए जयपाल ने बताया कि क्यों उन्होंने घरवालों से शूटिंग की बात छुपाई. उन्होंने कहा, मुझे पता है कि वे इसका विरोध करते. जहां से मैं आता हूं वहां शूटिंग कोई नहीं जानता. वे शायद समझते हैं कि इसका फिल्म शूटिंग से कनेक्शन है. जयपाल के अनुसार केवल घरवाले ही नहीं जिनसे भी वे मिले सबने शूटिंग की बात आने पर उन्हें पागल ही कहा.

जयपाल ने पांच साल पहले पिस्टल शूटर बनने का फैसला किया. तब वे 26 साल के थे. शूटिंग के लिए लिहाज से यह शुरुआत के लिए देरी है. आमतौर पर शूटर 15 या 16 साल की उम्र से ही शुरुआत कर देते हैं. वे एनसीसी में कैडेट थे और वहां पर उन्होंने  .22 कैलिबर राइफल और .303 कैलिबर कार्बाइन चलाई थी. इस बारे में उन्होंने कहा था, मुझे याद है कि मैंने बटालियन प्रतियोगिता जीती थी और इंस्ट्रक्टर ने कहा था कि मेरी 4.5 सेंटीमीटर ग्रुपिंग सबसे अच्छी रही. चूंकि वह छोटे गांव से आते हैं तो उन्हें जानकारी नहीं थी कि शूटिंग में कैसे आगे बढ़ा जाता है. 

जयपाल बाद में मध्य प्रदेश सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी करने लगे. इसके लिए घरवालों से पैसे लेते थे. मगर 2020 में कोविड-19 के चलते परीक्षाएं टल गईं. इसके अगले साल पेपर लीक होने से परीक्षा टल गई. ऐसे में उन्होंने कुछ और करने का फैसला किया. उन्होंने अखबार में पढ़ा कि जबलपुर में एक पिस्टल शूटर शूटिंग रेंज शुरू कर रहा था. वहां शुरू में उन्हें दिक्कतें आईं. उन्हें महसूस हुआ कि खुद की पिस्टल लेने की जरूरत है जिससे वे लगातार अभ्यास कर सकें. 

जयपाल ने पढ़ाई के लिए मंगाए पैसों के खरीदी पुरानी पिस्टल

जयपाल को पता चला कि एक पुरानी पिस्टल 1.05 लाख रुपये में मिल रही है. उनके पास इतने पैसे नहीं थे. तब उन्होंने घरवालों से झूठ बोला और कहा कि उन्हें सिविल सेवा की कक्षाओं के लिए पैसे चाहिए. घरवालों ने गेहूं की फसल बेचने से जो रकम आई थी वह जयपाल को दे दी. फिर वे भोपाल में स्टेट शूटिंग एकेडमी चले गए और वहां ट्रेनिंग करने लगे. पैसों की कमी के चलते वे सबसे हल्की गुणवत्ता वाले पैलेट से शूटिंग करते. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले 25 दिन पहले ही अभ्यास कर पाते. इस दौरान दोस्तों से आर्थिक मदद लेते. इसी के जरिए वह काम चला रहे थे. अभी भी उनका पर्सनल कोच नहीं है और उन्होंने खुद से ही सबका सीखा है.

जयपाल ट्रेनिंग के दूसरे साल सीनियर नेशनल्स में गए. फिर भारतीय टीम के लिए सेलेक्शन ट्रायल्स में जाने लगे. वहां उन्हें जीत भी मिलती. इस दौरान भी वे पैसों को लेकर सावधानी बरतते. वे दिल्ली में सेलेक्शन ट्रायल के लिए भोपाल से जनरल डिब्बे में सफर करते. अब हालांकि उनके पास स्पॉन्सर है. वे एशियन गेम्स की टीम में जगह नहीं बना सके थे. मगर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गए और वहां भारतीय शूटर्स की निराशा को दूर किया. हालांकि जयपाल अभी भी घरवालों को शूटिंग के बारे में नहीं बताना चाहते. वे ओलिंपिक आने पर ही खुलासा करना चाहते हैं. मगर अब वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीतने का मतलब होगा कि उनके राज का पर्दाफाश हो जाएगा.

मनु भाकर-सुरुचि ने किया निराश

भारत की मनु भाकर और सुरुचि इंदर सिंह ने निराश किया. दोनों अपने इवेंट में पोडियम पर जाने में नाकाम रही. मनु और सुरुचि महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में उतरी थी. मनु 179.9 के स्कोर के साथ पांचवें और सुरुचि 158.3 के साथ छठे स्थान पर रही. चीनी शूटर पहले दो पायदान पर रही तो कांस्य पदक हंगरी के खाते में गया. इन तीनों को ओलिंपिक कोटा भी मिल गया. हालांकि मनु, सुरुचि और सैनयाम ने मिलकर टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता. लेकिन इस मेडल से ओलिंपिक कोटा नहीं मिला.

मनु 2024 ओलिंपिक के बाद से जूझ रही है. वह कुछ महीने पहले हुए एशियन गेम्स से भी खाली हाथी लौटी थी. 

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