करीब नौ साल पहले जब ललित 15 साल की उम्र में सोनीपत के एक अखाड़े में गए तो उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि वह बिश्केक में इतिहास रचने की दहलीज पर होंगे. उनकी जिंदगी में एक ऐसा भी वक्त आया था, जब ग्रीको-रोमन पहलवान ललित का अखाड़ा तक का सफर ही नामुमकिन नजर आ रहा था. उन्होंने दो साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया. इसके बाद कुश्ती के सफर में उन्हें अपने पिता की तरफ से भी कोई मदद नहीं मिली.
ADVERTISEMENT
IPL 2026 के रद्द हुए पहले मैच से किसे फायदा और किसे हुआ नुकसान?
बीते दिन पानीपत के 23 साल के पहलवान ललित ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप की 55 किलोग्राम भार वर्ग के सेमीफाइनल में 2025 विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता और शीर्ष वरीयता प्राप्त चीन की शी हुओयिंग को हरा दिया. अब वह फाइनल में पहुंच गए हैं, जहां उनका मुकाबला उज़्बेकिस्तान के तीसरी वरीयता प्राप्त इख्तियार बोतिरोव से होगा उनके पास एशियाई ख़िताब जीतने वाले केवल चौथे भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान बनने का मौका है.
ललित का संघर्ष
हालांकि उनका यहां तक पहुंचने का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था. ललित ने अपनी मां को तब खोया, जब वह पालने में ही थे और वह अपने पिता के किसी भी सहारे के बिना बड़े हुए. 2023 में ललित के सिर से पिता का भी साया उठ गया, लेकिन कुश्ती ही वह जगह थी, जहां उन्हें अपना दूसरा परिवार मिला. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार कुश्ती के शुरुआती दिनों में झज्जर में ललित की मुलाकात विजय गहलावत से हुई, जो उनके साथ के एक सीनियर पहलवान थे और आगे चलकर उनके सबसे करीबी दोस्त बने और जिन्होंने एक बड़े भाई और अभिभावक की भूमिका निभाई.
ललित को लिया गोद
ललित की जीत के बाद विजय ने बताया वो उन्हें तब से जानते हैं और देखते आ रहा हैं, जब वह स्कूल में एक छोटे बच्चे थे. वह उन्हें कुश्ती लड़ते हुए देखता था और फिर खुद भी इसमें शामिल हो गया. विजय ने बताया कि उन्होंने एक बार ललित को एक दंगल में देखा और उससे कहा कि अगर उसे किसी भी चीज की जरूरत हो, तो वह उनके लिए हमेशा मौजूद हूं. विजय ने बताया कि साल 2015 में ललित उनके आए और तभी उन्होंने अपने पिता से कहा कि ललित उनका भाई है और उनके साथ ही रहेगा. इसके बाद विजय के पिता के रिएक्शन ने कुश्ती के क्षेत्र में ललित के सफर की दिशा हमेशा के लिए बदल दी. विजय ने बताया कि तब से उनके पिता ने ललित को अपना तीसरा बेटा मान लिया और उसे गोद ले लिया. तब से वह उनके परिवार का एक अभिन्न अंग बन गया है;
जब ललित ने विजय के साथ ट्रेनिंग शुरू की, तो विजय ने यह पक्का किया कि वह सही रास्ते पर बने रहे. उन्होंने स्कूल के दिनों से ही यह यह पक्का किया है कि वह कोई भी मुकाबला न छोड़े. कैडेट नेशनल चैंपियनशिप और फिर U23 एशियन चैंपियनशिप में मेडल जीतकर ललित धीरे-धीरे आगे बढ़े. अब वह एशियन चैंपियनशिप के फाइनल में है. विजय ने कहा कि उन्हें पहले कभी इतनी संतुष्टि महसूस नहीं हुई.
KKR के प्रदर्शन से नाराज शाहरुख! वेंकी मैसूर के साथ बातचीत के Video ने मचाई हलचल
ADVERTISEMENT










