भारत की महिला रिकर्व टीम ने शंघाई में हुए तीरंदाजी विश्व कप 2026 के दूसरे चरण में मेजबान चीन को एक कड़े मुकाबले वाले फाइनल में हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया है. दीपिका कुमारी, अंकिता भगत और 17 साल की कुमकुम मोहद की तिकड़ी ने मुकाबले के आखिरी पलों में भी अपना संयम बनाए रखा और हाल के सालों में भारत के लिए सबसे अहम टीम खिताबों में से एक हासिल किया.
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यह जीत भारतीय रिकर्व तीरंदाजी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. भारतीय महिला टीम ने इस पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया. सेमीफाइनल में भारत ने 10 बार की ओलिंपिक चैंपियन साउथ कोरिया को हराया था.
दीपिका ने टीम को संभाला
गोल्ड मेडल मैच एक हाई-स्कोरिंग और बराबरी का मुकाबला था. दोनों टीमों ने हर राउंड में एक-दूसरे को कड़ी टक्कर दी और पूरे मैच के दौरान अंकों का अंतर बहुत कम रहा. भारत की ताकत उसकी निरंतरता में थी. उन्होंने शायद ही कभी नौ-रिंग से नीचे स्कोर किया और उन अहम पलों का फ़ायदा उठाया, जहां चीन दबाव में आकर थोड़ा लड़खड़ा गया. इस तिकड़ी की सबसे अनुभवी सदस्य दीपिका कुमारी ने एक बार फिर टीम को संभालने में अहम भूमिका निभाई. अंकिता भगत ने लगातार अच्छा स्कोर करके उनका साथ दिया, जबकि कुमकुम मोहद ने अपनी उम्र के हिसाब से जबरदस्त संयम दिखाया और इतने बड़े फाइनल मैच में भी अपनी लय बनाए रखी. मैच का निर्णायक मोड़ आखिरी राउंड में आया, जहां भारत ने बेहतर ग्रुपिंग और कम अंक गंवाकर बढ़त बना ली.
भारत का टूर्नामेंट में सफर
इस टूर्नामेंट में भारत के सफर की बात करें तो राउंड ऑफ 16 में भारतीय टीम ने उज़्बेकिस्तान को 6-2 से हराकर टूर्नामेंट में अपनी शुरुआत को मजबूत बनाया. इसके बाद वियतनाम के ख़िलाफ क्वार्टरफ़ाइनल का मुकाबला काफी मुश्किल रहा, जहां 5-4 से मैच टाई होने के बाद फ़ैसला शूट-ऑफ से हुआ. भारत ने निर्णायक पल में अपना संयम बनाए रखा और 28-25 से जीत हासिल करके अगले दौर में जगह बनाई.
इस पूरे अभियान का सबसे अहम पल सेमीफ़ाइनल में आया, जहां उन्होंने टॉप सीड वाली टीम साउथ कोरिया को 5-1 से हराया. साउथ कोरिया को दुनिया की रिकर्व तीरंदाज़ी में सबसे ताक़तवर टीम माना जाता है, लेकिन भारतीय टीम ने अपनी सटीक निशाने और बेहतरीन रणनीति के दम पर उन्हें मात दी. पहले और आखिरी सेट में 58-55 और 58-56 के स्कोर ने यह साबित कर दिया कि भारत दुनिया की बेहतरीन टीमों के ख़िलाफ भी लगातार बड़ा स्कोर बनाने की क्षमता रखता है. सेमीफ़ाइनल के इस नतीजे ने फाइनल से पहले का माहौल ही बदल दिया. उसके बाद भारत को खिताब का सबसे मजबूत दावेदार माना जाने लगा और भारतीय टीम ने यह सही भी साबित कर दिया.
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