व‍िनेश फोगाट के मामले में हाईकोर्ट ने लगाई WFI को फटकार, एश‍ियन गेम्स के सेलेक्शन ट्रायल्स में भारतीय पहलवान के हिस्सा लेने पर सुनाया फैसला

विनेश फोगाट ने 18 मई को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें WFI द्वारा ‘अयोग्य’ घोषित किए जाने के बावजूद इस साल के एशियाई खेलों के लिए 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल्स में उनकी भागीदारी के मुद्दे पर उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया था.

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द‍िल्ली हाईकोर्ट ने एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश दिया. (Photo: Getty)

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द‍िल्ली हाईकोर्ट ने एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश दिया.

पीठ ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि फोगाट को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी जाए.

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारत की स्टार महिला पहलवान विनेश फोगाट को घरेलू प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए ‘अयोग्य’ घोषित करने के फैसले के लिए शुक्रवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को फटकार लगाई और केंद्र को उनका मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने का निर्देश दिया. मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने टिप्पणी की है कि WFI का शीर्ष खिलाड़ियों को भाग लेने की अनुमति देने की पुरानी प्रथा पर नहीं चलना ‘बहुत कुछ कहता है’. पीठ ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने को कहा कि फोगाट को एशियन गेम्स के चयन ट्रायल्स में भाग लेने की अनुमति दी जाए. विनेश मेटेरन‍िटी लीव के बाद खेल में वापसी करना चाहती हैं. 

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पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि देश में मेटेरन‍िटी लीव का जश्न मनाया जाता है और फेडरेशन को ‘प्रतिशोध’ की भावना से काम नहीं करना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र से फोगाट का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ पैनल गठित करने को कहा, क्योंकि सरकारी वकील ने कहा कि भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) के नियम कुछ मामलों में पात्रता मानदंडों में छूट देते हैं.

फोगाट ने दी थी चुनौती

अदालत फोगाट की उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने 18 मई को एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें डब्ल्यूएफआई द्वारा ‘अयोग्य’ घोषित किए जाने के बावजूद इस साल के एशियाई खेलों के लिए 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल्स में उनकी भागीदारी के मुद्दे पर उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया था. 

ट्रायल्स में भाग लेने का मौका देने का आग्रह

फोगाट के वकील ने पीठ से उन्हें ट्रायल्स में भाग लेने का मौका देने का आग्रह किया था. वकील ने यह तर्क दिया कि नौ मई को गोंडा में एक घरेलू प्रतियोगिता में उनकी भागीदारी से एक दिन पहले उनको कारण बताओं नोटिस दिया गया, जिसे यह पता चलता है कि ‘कोई उन्हें प्रतियोगिता में भाग लेने से रोकने के लिए कोशिश कर रहा है. अदालत ने कारण बताओ नोटिस पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए दावा किया कि पेरिस ओल‍िंप‍िक में फोगाट की अयोग्यता ‘राष्ट्रीय शर्म’ की बात थी और सवाल उठाया कि यह क्यों नहीं माना जाना चाहिए कि डब्ल्यूएफआई ने उनके लिए चयन मानदंड बदल दिए थे. अदालत ने कहा कि

व‍िनेश जुलाई 2025 में मां बनीं. अभी मई का महीना है. वह इंटरनेशनल पहलवान हैं. यह क्यों नहीं माना जा सकता कि आपने उनके लिए चयन मानदंड में बदलाव किया होगा? विवाद या मतभेद चाहे जो भी हो, खेल जगत को क्यों नुकसान होना चाहिए? देश में मातृत्व का जश्न मनाया जाता है, क्या इसकी कीमत किसी व्यक्ति को भुगतनी चाहिए?

अदालत में आगे कहा कि सर्कुलर में किए गए बदलाव से सब कुछ स्पष्ट हो जाता है. इस तरह का व्यवहार न करें. यह खेलों के हित में नहीं है. पहले के सर्कुलर का पालन नहीं करना बहुत कुछ कहता है. 

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