पंजाब की पहचान उसकी खेती है और खेती की जान है, पानी, लेकिन सालों तक राज्य के कई हिस्सों में किसानों को नहर का पानी नहीं मिल पाता था. खासकर उन खेतों को जो नहर के आखिरी छोर यानी टेल-एंड पर होते थे. ऐसे किसान मजबूरी में ट्यूबवेल और महंगे बिजली-पंपों पर निर्भर थे, जिससे लागत बढ़ती गई और जमीन के नीचे का पानी तेजी से खत्म होने लगा.
ADVERTISEMENT
कीवी टीम में भारतीय खिलाड़ी, हाथ पर रजनी का डायलॉग, अब 2 साल बाद खेलने का मौका
इसी असमानता और संकट को खत्म करने के लिए पंजाब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया, नहरों की पूरी प्रणाली को फिर से जिंदा करना.
टेल-एंड तक पहुंचा पानी
पहली बार सही मायनों में आज पंजाब में कई ऐसे इलाके हैं जहां पहली बार नहर का पानी आखिरी खेतों तक पहुंच रहा है. यह सिर्फ तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि हजारों किसानों के जीवन में बदलाव है. एक किसान ने कहा कि हम हमेशा लाइन के आखिरी छोर पर थे. हमें कभी नहर का पानी नहीं मिलता था.अब हमारी जमीन तक पानी आता है और फसल भी बेहतर होती है.
भू जल पर निर्भरता कम, नहरों पर भरोसा ज्यादा
नहर के पानी के बढ़ते उपयोग से अब पंजाब में सिंचाई का बड़ा हिस्सा नहरों से होने लगा है. इससे ट्यूबवेल कम चल रहे हैं. बिजली की बचत हो रही है. जमीन का पानी सुरक्षित हो रहा है. यह आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा है.
नहरों, डिस्ट्रीब्यूटरी और माइनरों का पुनर्जीवन
सरकार ने सिर्फ बड़ी नहरों ही नहीं, बल्कि डिस्ट्रीब्यूटरी माइनर, छोटी जलधाराएं भी दोबारा चालू की हैं. कई जगहों पर दशकों से जमी गाद हटाई गई, टूटे किनारे ठीक किए गए और लीकेज बंद किए गए. इससे पानी की एक-एक बूंद खेत तक पहुंच रही है.
किसानों की लागत घटी, फसल बढ़ी
नहर का पानी मिलने से किसानों को बिजली और डीजल पर कम खर्च नियमित सिंचाई बेहतर पैदावार मिल रही है. एक किसान ने कहा कि अब हमें बारिश या बिजली कटौती का डर नहीं. नहर का पानी भरोसेमंद है.
पर्यावरण को भी राहत
नहर आधारित सिंचाई से भूजल बच रहा है, जिससे जमीन धंसने से बचती है. जल स्तर सुधरता है. पर्यावरण सुरक्षित होता है. यह खेती को लंबे समय तक टिकाऊ बनाता है.
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी किसी एक इलाके की जागीर नहीं है. हमने यह सुनिश्चित किया है कि नहर का पानी आखिरी किसान तक पहुंचे. खेती का मजबूत भविष्य नहरों की वापसी ने पंजाब की खेती को नई सांस दी है. यह सिर्फ पानी नहीं, बल्कि न्याय, बराबरी और स्थिरता की शुरुआत है. आज पंजाब का किसान पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस कर रहा है.
IND vs NZ: कौन हैं न्यूजीलैंड की तरफ से ODI डेब्यू करने वाले क्रिस्टियन क्लार्क
ADVERTISEMENT










