सात्विक-चिराग की जोड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में हारी, मेडल की उम्मीद खत्म

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय जोड़ी बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 में एकतरफा अंदाज में चीनी जोड़ी से हार गई. इससे भारत के इस एडिशन में दूसरा मेडल जीतने की उम्मीद समाप्त हो गई.

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सात्विक और चिराग शेट्टी. (Photo: BAI Media)

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लियांग-वेंग के सामने सात्विक-चिराग का रिकॉर्ड खराब है.

सात्विक-चिराग ने 2022 व 2025 में कांस्य पदक जीता था.

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की भारतीय पुरुष जोड़ी बैडमिंटन वर्ल्ड चैंपियनशिप 2026 से बाहर हो गई. उन्हें क्वार्टर फाइनल में चीन की वर्ल्ड नंबर 3 जोड़ी लियांग वेई केंग और वेंग चेंग ने सीधे गेम में मात दी. पांचवीं रैंकिंग वाली भारतीय जोड़ी 36 मिनट के अंदर 18-21 9-21 से हार गई. इसके साथ ही उनका तीसरी बार मेडल जीतने का सपना टूट गया. सात्विक-चिराग ने 2022 व 2025 में कांस्य पदक जीता था. वहीं लियांग और वेंग की जोड़ी पेरिस ओलिंपिक के सिल्वर मेडलिस्ट है.

भारत का मेडल पक्का, जॉली और गोपीचंद की जोड़ी ने सेमीफाइनल में रखा कदम

लियांग-वेंग के सामने सात्विक-चिराग का रिकॉर्ड खराब है. उन्हें नौ बार हार मिली है जबकि चार बार जीते हैं. भारतीय जोड़ी ने आगाज अच्छा किया था और पहले गेम में कड़ी टक्कर दी. ब्रेक तक वे 11-10 से आगे रहे. इसके बाद वे 15-12 से आगे हो गए. लेकिन इसके बाद कुछ गलतियां हुईं तो चीनी जोड़ी ने कुछ कमाल के शॉट्स लगाते हुए 18-18 से बराबरी हासिल कर ली. भारतीय शटलर्स से लगातार गलतियां हुई जिससे चीनी जोड़ी 21-18 से पहला गेम अपने नाम करने में सफल रही.

दूसरे गेम में चीनी खिलाड़ियों ने आत्मविश्वास के साथ आगाज किया और 9-4 से आगे हो गए. ब्रेक के समय उनके पास 11-5 की बढ़त थी. इसके बाद भी उन्होंने भारतीय जोड़ी को किसी तरह से वापस आने का मौका नहीं दिया. नतीजतन वे 15-7 से आगे हो गए. इसके बाद भारतीय जोड़ी निराशा में चली गई और लियांग-वेंग ने 21-9 से दूसरा गेम अपने नाम करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली.

ट्रिसा-गायत्री ने पक्का किया भारत के लिए मेडल

भारत को वर्ल्ड चैंपियनशिप के इस एडिशन से एक ही मेडल मिला है. ट्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की महिला जोड़ी सेमीफाइनल में पहुंच गई. इससे कांसा तय हो गया. यह दूसरी बार है जब भारतीय महिला जोड़ी वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीत रही है. इनसे पहले 2011 में ज्वाला गुट्टा और अश्विनी पोनप्पा ने ब्रॉन्ज हासिल किया था. 2022 से भारत को लगातार इस इवेंट में पदक मिल रहा है. ट्रिसा-गायत्री के पास अब पदक का रंग बदलने का मौका रहेगा.

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