मां बनीं, गंभीर बीमारी ने जकड़ा, हल्का सामान तक उठाना हुआ मुश्किल, फिर CWG 2026 में सीमा कालीरमण ने भारत के लिए ऐसे जीता मेडल

कॉमनवेलथ गेम्स की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा कालीरमण साल 2022 में बेटे रुद्र के जन्म के कुछ ही सप्ताह बाद आर्थराइटिस की गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं.

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सीमा कालीरमण ने चक्का फेंक में ब्रॉन्ज मेडल जीता. (PC: Instagram)

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सीमा कालीरमण ने चक्का फेंक में ब्रॉन्ज मेडल जीता.

उन्होंने ग्लास्गो में 58.65 मीटर का थ्रो किया.

किसी महिला ख‍िलाड़ी के लिए मां बनने के बाद मैदान पर वापसी करना आसान नहीं होता.मां बनने के बाद खेल में वापसी सबसे कठिन चुनौतियों में गिनी जाती है, लेकिन भारतीय चक्का फेंक और कॉमनवेलथ गेम्स की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट सीमा कालीरमण ने इस चुनौती को पार करने के लिए जो हिम्मत द‍िखाई, आज पूरी दुनिया उनके जज्बे को सलाम कर रही है. उनका असली संघर्ष मां बनने के बाद शुरू हुआ.

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साल 2022 में बेटे रुद्र के जन्म के कुछ ही सप्ताह बाद सीमा गठिया (आर्थराइटिस) की गंभीर बीमारी की चपेट में आ गईं. इस सूजन संबंधी रोग ने उनके उन जोड़ों को प्रभावित किया, जिन पर चक्का फेंक खिलाड़ी की पूरी निर्भरता रहती है. हालत ऐसी हो गई कि रोजमर्रा की चीजें उठाना भी मुश्किल था, एक किलोग्राम वजनी डिस्क फेंकना तो दूर की बात थी. उन्होंने हालांकि चार साल बाद शानदार वापसी करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में कांस्य पदक हासिल कर अपनी पूरी दुनिया को अपनी हिम्मत द‍िखाई.

गर्भावस्था के बाद ही गठिया

पीटीआई से उन्होंने बताया कि गर्भावस्था के बाद ही उन्हें गठिया हो गया था, जिससे कई तरह की परेशानियां सामने आईं.उनकी वापसी का सफर आसान नहीं था. उनके पति रविंदर इस कठिन दौर में उनके कोच भी बने. रविंदर खुद नेशनल चैंपियन रहे हैं और चोटों के कारण उनका करियर समय से पहले समाप्त हो गया था. रविंदर ने बताया कि उन लोगों को इस बीमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी.उन्होंने काफी र‍िचर्स किया और आयुर्वेद का भी सहारा लिया, क्योंकि इसका स्थायी इलाज नहीं है.केवल इसे कंट्रोल किया जा सकता है. 

बीमारी से उबरने के लिए सीमा और उनके साथ रविंदर ने भी लाइफस्टाइल और खानपान में बड़े बदलाव किए. रविंदर ने बताया कि उन्हें इमली और नींबू जैसी खट्टी चीजों से परहेज करना पड़ा. खाने में ऐसी चीजें शामिल की गईं जो उनके लिए लाभकारी थीं.  उनके सभी जोड़ों में दर्द रहता था. वह कोई सामान तक नहीं उठा पाती थीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने फिर से अभ्यास शुरू किया.मां बनने से पहले सीमा का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 48.08 मीटर था. उन्होंने 2024 में प्रतिस्पर्धी खेलों में वापसी की और इस साल ‘इंडियन चैंपियनशिप’ में 59.73 मीटर का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. ग्लास्गो में 58.65 मीटर का थ्रो कर कांस्य पदक अपने नाम किया. शारीरिक मजबूती पर काम करने के साथ-साथ सीमा ने शारीरिक शिक्षा में पीएचडी भी जारी रखी.

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