भारत की उभरती बैडमिंटन खिलाड़ी 15 साल की तन्वी पात्री बुधवार को यूथ ओलिंपिक के फाइनल में पहुंच गई है. इसी के साथ उन्होंने मेडल भी पक्का कर लिया है. ब्यूनस आयर्स में अपने शानदार प्रदर्शन का सिलसिला जारी रखते हुए तन्वी यूथ ओलिंपिक में बैडमिंटन फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बन गई है. उन्होंने सेमीफाइनल में बुधवार देर रात शानदार वापसी करते हुए जापान की युज़ुनो वातानाबे को 21-14, 11-21, 21-19 से हराया और गर्ल्स सिंगल्स के फाइनल में जगह बनाई. उन्होंने थाईलैंड की कुंगकेव ककानिक को 21-17, 21-13 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी. सेमीफाइनल में ओडिशा की शटलर को तीन गेम के रोमांचक मुकाबले में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी, खासकर तब जब वतानाबे ने वापसी करते हुए मुकाबला बराबरी पर ला दिया. हालांकि निर्णायक गेम के तनावपूर्ण पलों में तन्वी ने अपना संयम बनाए रखा और एक यादगार जीत हासिल की. इस जीत के साथ ही वह ऐतिहासिक गोल्ड जीतने से अब बस एक जीत दूर हैं. इससे पहले तन्वी ने मेक्सिको की सारा गोंजालेज को 21-8, 21-12 से और ऑस्ट्रेलिया की स्मृति अदेपु को 21-4, 21-12 से हराकर मेडल राउंड में प्रवेश किया था.
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पहला गेम: वातानाबे ने रैलियों को लंबा खींचकर और तन्वी को कोर्ट पर ज्यादा दौड़ने के लिए मजबूर करके अपनी लय पाने की कोशिश की. हालांकि, भारतीय खिलाड़ी ने शानदार आक्रामक खेल दिखाया और अपने स्मैश तथा क्रॉस-कोर्ट शॉट्स के जरिए अपनी जापानी खिलाड़ी को बैकफुट पर धकेल दिया. भले ही वातानाबे ने धीरे-धीरे अपनी लय हासिल करनी शुरू कर दी थी, लेकिन तन्वी लगातार उनके डिफेंस को तोड़ने के तरीके खोजती रहीं. कोने में मारे गए एक सटीक स्मैश ने उन्हें फिर से खेल पर नियंत्रण पाने में मदद की और इसके बाद उन्होंने पहला गेम 21-14 से अपने नाम कर लिया.
दूसरा गेम: हालांकि दूसरे गेम में एक अलग चुनौती सामने आई. शुरुआत में तन्वी पिछड़ गईं, लेकिन उन्होंने अपनी रैलियों की तीव्रता बढ़ाकर वापसी करने की कोशिश की. वहीं वतानाबे को कोर्ट के कोनों की तरफ मारे गए अपने शॉट्स से सफलता मिलने लगी. तन्वी इनमें से कुछ शॉट्स को सही से नहीं समझ पाईं. उन्हें लगा कि शटल बेसलाइन के बाहर जाएगी, लेकिन वह कोर्ट के अंदर ही गिरी. ये गलतियां भारी पड़ीं और जापानी खिलाड़ी ने बढ़त बनानी शुरू कर दी. वतानाबे ने तन्वी को लंबी रैलियों में उलझाए रखा, धीरे-धीरे खेल पर अपना नियंत्रण बना लिया और अंकों का अंतर बढ़ा दिया. गेम के आखिर में तन्वी ने कुछ बेहतरीन शॉट्स लगाए, लेकिन वह वतानाबे को 21-11 से गेम जीतने और मुकाबले को निर्णायक गेम तक ले जाने से नहीं रोक सकीं.
तीसरा गेम: तीसरा गेम में तन्वी ने जल्दी ही खाता खोल लिया, लेकिन वतानाबे ने अपनी लय पा ली और मैच पर पकड़ बनाने की कोशिश की. भारतीय खिलाड़ी ने जापानी शटलर को ज्यादा देर तक हावी नहीं होने दिया. उन्होंने जोरदार वापसी की, फिर से बढ़त बनाई और यह सुनिश्चित किया कि मुकाबला बराबरी का बना रहे. वतानाबे ने स्कोर बराबर कर लिया, जबकि तन्वी में साफ तौर पर निराशा दिखी, लेकिन इस युवा खिलाड़ी ने उसी अंदाज में जवाब दिया, जिससे उसे पूरे मैच में सफलता मिली थी. वह वापस अपने आक्रामक खेल पर लौट आईं और लंबी रैलियों में वातानाबे को जमने का मौका देने के बजाय अपने स्मैश के जरिए पॉइंट्स खत्म करने की कोशिश कीं. जापानी शटलर ने संघर्ष जारी रखा, एक बार फिर स्कोर बराबर किया और मुकाबले को रोमांचक बनाए रखा. हालांकि तन्वी ने एक ज़बरदस्त स्मैश लगाया, जिससे वातानाबे कोर्ट पर गिर गईं और तन्वी को फिर से बढ़त मिल गई. इसके बाद वातानाबे से हुई एक गलती ने तन्वी को जीत के बिल्कुल करीब पहुंचा दिया. आखिर में भारतीय खिलाड़ी ने एक और आक्रामक शॉट खेलकर जीत पक्की कर ली और निर्णायक गेम में 21-19 से कड़ा मुकाबला अपने नाम किया.
यूथ ओलिंंपिक के सेमीफाइनल तक पहुंचने वाले भारतीय खिलाड़ी
तन्वी से पहले यूथ ओलिंपिक गेम्स में केवल एचएस प्रणय, लक्ष्य सेन और आदित्य जोशी ही बैडमिंटन के सेमीफाइनल तक पहुंच पाए. 2010 में सिंगापुर में हुए पहले यूथ ओलिंपिक में प्रणय ने सिल्वर मेडल जीता था, जबकि 2018 में ब्यूनस आयर्स में हुए गेम्स में लक्ष्य भी रनर- अप रहे. 2014 में आदित्य लड़कों के सिंगल्स सेमीफाइनल तक तो पहुंचे, लेकिन उन्हें कोई मेडल नहीं मिला.
चीन में बीता बचपन
बेंगलुरु के 'सेंटर ऑफ बैडमिंटन एक्सीलेंस' में ट्रेनिंग ले रही ओडिशा की यह खिलाड़ी मौजूदा U17 एशियन चैंपियन है. तन्वी की शुरुआती बचपन चीन में बीता था. वह वहां रही, क्योंकि उनके पिता की वहां एक IT जॉब में पोस्टिंग थी. उन्होंने वहां अपने खेल की बुनियादी बातें सीखीं और साथ ही रोलर स्केटिंग भी की, जिससे उन्हें बैडमिंटन कोर्ट पर अपना बैलेंस बनाए रखने में मदद मिली. चीन में ही उन्होंने हाल में अपना U17 एशियन खिताब जीता. जब वह छोटी थी, तो उनके पिता के काम की वजह से उनका परिवार चीन चला गया था. उन्होंने अपना शुरुआती बचपन वहीं ट्रेनिंग करते हुए और अपने पहले जूनियर खिताब जीतते हुए बिताया.
दो जूनियर खिताब जीतने वाली पहली भारतीय शटलर
2024 में एशियन U-15 चैंपियनशिप जीतने के बाद तन्वी ने एशियन U-17 का खिताब भी अपने नाम किया. ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय शटलर हैं, जिन्होंने महाद्वीपीय स्तर के ये दोनों जूनियर खिताब जीते हैं. U15 कैटेगरी में उन्होंने पूरी तरह से दबदबा बनाए रखा और पूरे टूर्नामेंट के दौरान एक भी गेम नहीं हारी. वहीं U17 वर्ग में उन्हें चीनी खिलाड़ियों के खिलाफ कई रोमांचक मुकाबले खेलने पड़े, जिनमें तीन गेम तक चले मैच शामिल थे. इनमें सबसे अहम था चीन की झोउ जिंग ली के खिलाफ उनका पहला मैच, जिसमें उन्होंने कड़े मुकाबले के बाद निर्णायक गेम (15-13) जीता. इसके अलावा सेमीफाइनल में भी उन्हें चीन की यू यिंग गुई के खिलाफ तीन गेम तक चले कड़े संघर्ष में जीत मिली. बैडमिंटन में एशियाई टूर्नामेंटों में ओलिंपिक से भी कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है, लेकिन अब यूथ ओलिंपिक में उन्होंने मुश्किल जापानी खिलाड़ी को भी हरा दिया.
तन्वी ने पोंटियानाक इंटरनेशनल चैलेंज में अपना पहला सीनियर इंटरनेशनल खिताब भी जीता. इसके बाद तन्वी ने लगातार दो सप्ताह में सिंगापुर और इंडोनेशिया में सीनियर स्तर के फाइनल खेले. यूथ ओलिंपिक से पहले उन्होंने रिकवरी के लिए अच्छा आराम किया और कुछ दिनों तक ट्रेनिंग ली थी.
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