मनीषा भानवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान और कुल दूसरी ही भारतीय हैं. मनीषा ने कजाखस्तान के अलमाटी शहर में महिलाओं के 59 किलो भारवर्ग में अमेरिका की एबिगेल नेटे को 8-6 से हराकर सोना जीता. 29 साल की भारतीय महिला पहलवान पहले पीरियड तक 6-1 से पीछे चल रही थी. उन्होंने दूसरे हाफ में तीन मिनट में सात पॉइंट लेकर जीत हासिल की. इसके साथ ही इतिहास भी बन गया. यह 15 साल में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भारत का पहला गोल्ड मेडल रहा.
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वर्तमान एडिशन में मनीषा के अलावा तीन भारतीय महिला पहलवानों को पदक मिले. नीलम सिरोही ने 50 किलो भारवर्ग, काजल धोचक ने 76 किलो भारवर्ग में चांदी हासिल की तो और तनु शर्मा ने 72 किलो भारवर्ग में कांस्य जीता. भारत ने महिला कुश्ती वर्ल्ड चैंपियनशन 2026 में कुल चार मेडल जीते. यह अभी तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है. इससे पहले 2011 में दो मेडल आए थे तब एक रजत व एक कांस्य पदक जीता गया था. इस इवेंट के 35 साल के इतिहास में पहली बार भारत की तीन पहलवान फाइनल में पहुंची. इनमें से दो- 50 किलो व 76 किलो - ओलिंपिक भारवर्ग कैटेगरी में खिताबी मुकाबले में गई.
मनीषा ने इस इवेंट में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरिगार्ड को हराकर अभियान शुरू किया था. फिर क्वार्टर फाइनल में मंगोलिया की बोलोरटुया खुरेलखु को 6-0 से हराते हुए सेमीफाइनल में जगह बनाई. हरियाणा से आने वाली इस पहलवान ने अंतिम 4 में कजाखस्तान की एल्टिन शागायेवा को मात देकर खिताबी मुकाबले में जगह बनाई थी. मनीषा से पहले सुशील कुमार ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था. उन्होंने 2010 में मॉस्को में हुए इवेंट में पुरुषों के 66 किलो भारवर्ग में सोना हासिल किया था.
मनीषा ने फाइनल में छह अंकों का अंतर पाटते हुए जीत हासिल की. अमेरिकी पहलवान ने आक्रामक आगाज किया और दाएं पैर पर हमला बोला. मनीषा ने 30 सैकंड तक मुकाबला किया. फिर उन्हें गिरा दिया गया. इससे नेट को चार अंक मिल गए. मनीषा ने फैसले को चुनौती दी लेकिन रिव्यू उनके खिलाफ गया. इससे एक अंक नेट को मिला और उनकी बढ़त 5-0 हो गई. मनीषा ने ऐसे में विरोधी को मैट से बाहर करने की कोशिश की. लेकिन अमेरिका पहलवान ने चतुराई से यह दांव टाल दिया. ऐसे में मनीषा को चेतावनी मिली जबकि नेट का स्कोर 6-0 हो गया. पहले हाफ में मनीषा ने पुश आउट के जरिए एक अंक लिया. इससे 6-1 के साथ पहले तीन मिनट समाप्त हुए.
मनीषा ने आखिरी पीरियड में ऐसे पलटी बाजी
दूसरे पीरियड में मनीषा एक रणनीति के तहत उतरी. उन्होंने अमेरिकी पहलवान को थकाने पर जोर दिया. नेट ने फिर से पैर पर हमला बोला. मगर मनीषा बचकर पीछे चली गई और अमेरिकी पहलवान को गिराया. इस फैसले को चुनौती दी गई. मगर रिव्यू खिलाफ गया. इससे मनीषा को एक अंक मिला. नेट को तब पार टेरे पॉजीशन में जाना पड़ा. इसमें एक पहलवान मैट पर होता है जबकि दूसरी ऊपर की तरफ जाकर अटैक करता है. मनीषा ने पूरा फायदा लिया और चार अंक लेते हुए स्कोर बराबर कर दिया. भारतीय पहलवान ने तब फिर से दो अंक लिए और 8-6 से आगे हो गई. इसके बाद 27 सैकंड बचे थे. इसमें मनीषा ने कोई मौका नहीं दिया और मैच अपने नाम किया.
कोच ने बताया मनीषा ने किस रणनीति से जीता फाइनल
भारतीय टीम के चीफ कोच वीरेंदर दहिया ने मुकाबले के बाद बताया कि अमेरिकी पहलवान का सामना करने से पहले विस्तृत एनालिसिस के जरिए कमजोरी पता लगाई गई थी. इसमें सामने आया कि अमेरिकी पहलवान पांचवें मिनट तक थक जाया करती थी. ऐसे में मैच को वहां तक ले जाना जरूरी था. दहिया ने बताया, हमने उसकी रेसलिंग के तरीके को पढ़ा. हमने योजना बनाई कि मैच को पूरे छह मिनट तक लेकर जाना है. अगर ऐसा हुआ तो मनीषा फायदे में रहेगी. हमारे सबसे कमाल के पहलवानों ने इसी तरह की कुश्ती की है. बजरंग पूनिया, रवि दहिया और अमन सहरावत ऐसा कर चुके हैं. अब मनीषा ने भी यह कर दिखाया. नेट दूरी से हमला करती है. इसलिए हमने मनीषा से कहा कि जितना हो सके उतना पास रहना और संपर्क बनाए रखना.
भारतीय कोच ने कहा कि पहले पीरियड में जब नेट आगे चल रही थी तब भी मनीषा से सब्र रखने को कहा गया. उनसे कहा गया कि कुश्ती एक सैकंड में बदल सकती है और आपके पास 180 सैकंड है. मनीषा ने तब कोच को कहा कि निराश नहीं करूंगी और सोने के बिना वापस नहीं आऊंगी.
मनीषा हरियाणा के रोहतक से आती हैं और यहां पर सर छोटू राम अखाड़ा से निकली हैं. उनके कोच मनदीप सिंह ने गोल्ड जीतने के बाद कहा कि वह हमेशा से आक्रामक कुश्ती लड़ती है. पिछले दो-तीन साल में उसने काफी काम किया है. यह सबसे बड़ा मेडल है और वर्ल्ड चैंपियन बनना सबका सपना रहता है. अब अगला सपना ओलिंपिक मेडल का है.
मनीषा एशियन चैंपियनशिप में गई, पीछे पिता का निधन
मनीषा के लिए यह सफलता काफी मुश्किलों के बीच आई है. 2022 में जब वह एशियन चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया गई थी तब उनके पिता सुरेश का घर पर निधन हो गया था. तब भारतीय कुश्ती महासंघ ने मनीषा से कहा था कि वह चाहे तो घर लौट सकती हैं. मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया. उस इवेंट में मनीषा ने 65 किलो भारवर्ग में कांस्य जीता था. वह कुश्ती में पिता की बदौलत ही आई थी. 2013 में फिटनेस में सुधार के लिए उन्हें ट्रेनिंग के लिए भेजा गया. पहले जींद में ट्रेनिंग हुई फिर रोहतक शिफ्ट हो गई. पिता को खोने के बाद मनीषा डिप्रेशन में चली गई थी. मगर कुश्ती से प्रेम और पिता की सीख के चलते वह खेल से जुड़ी रही और लगातार सफलता हासिल की.
मनीषा ने 2022 के बाद 2023 व 2024 में भी उन्होंने एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज जीता था. वह इनमें से 2024 में 62 किलो भारवर्ग में उतरी थी. फिर 2025 में इसी कैटेगरी में उन्होंने गोल्ड जीता था. मनीषा 2023 से वर्ल्ड चैंपियनशिप में जा रही थी मगर इससे पहले कभी उन्हें पदक नहीं मिला था.
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