कौन हैं पार्थ भुट, बाएं हाथ का नया स्पिनर, जडेजा के लिए खाली की थी जगह, अब उनके सामने 17 रन पर लिए 8 विकेट

रणजी ट्रॉफी 2026-27 के तीसरे राउंड के मैच में सौराष्ट्र के स्पिनर पार्थ भुट ने असम के सामने आठ विकेट एक पारी में लिए. इससे जयदेव उनादकट की कप्तानी वाली टीम पारी और 12 रन के अंतर से जीतने में सफल रही.

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Shakti Shekhawat

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पार्थ भुट ने असम के सामने महज 17 रन देकर आठ विकेट लिए.

पार्थ भुट ने 2019 में सौराष्ट्र की ओर से फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा था.

पार्थ भुट ने 2013 में नौवें नंबर पर आकर रणजी ट्रॉफी में शतक लगा दिया था.

रणजी ट्रॉफी 2026-27 के तीसरे राउंड के मुकाबले में सौराष्ट्र ने असम को पारी और 12 रन के अंतर से मात दी. इस टीम की जीत के हीरो रहे बाएं हाथ के स्पिनर पार्थ भुट. उन्होंने मैच में कुल 10 विकेट लिए जिनमें से आठ तो उन्होंने दूसरी पारी में केवल 17 रन देकर ले लिए. यह सौराष्ट्र की ओर से रणजी ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ बॉलिंग का रिकॉर्ड रहा. पार्थ भुट की बॉलिंग का ही कमाल था कि असम की टीम दूसरी पारी में 94 रन पर ढेर हो गई. इस मुकाबले में उसने पहली पारी में 281 रन बनाए थे. सौराष्ट्र ने इकलौती पारी में 387 रन बनाए थे. उसे इस सीजन की पहली जीत मिली और वह ग्रुप बी में दूसरे स्थान पर है.

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कौन हैं पार्थ भुट

पार्थ भुट 29 साल के क्रिकेटर हैं जो जूनागढ़ से आते हैं. उन्होंने असम के सामने मुकाबले में पहली पारी में 32.3 ओवर डाले और 61 रन देकर दो शिकार किए. दूसरी पारी में इस फिरकी गेंदबाज ने 18 ओवर फेंके जिनमें से 10 मेडन रहे. उन्होंने 17 रन खर्च किए और आठ विकेट लिए. असम के जो पहले सात बल्लेबाज थे वे सभी इसी गेंदबाज के आगे आउट हुए. इसके बाद पार्थ ने नौवें नंबर पर आए मुख्तार हुसैन को भी रवाना किया. दो सफलताएं रवींद्र जडेजा को मिली. सौराष्ट्र की ओर से दूसरी पारी में तीन ही बॉलर आजमाए गए. तीसरे जयदेव उनादकट रहे जिन्होंने बॉलिंग शुरू की थी और चार ओवर फेंके.

पार्थ की बॉलिंग के आगे रवींद्र जडेजा पड़े फीके

पार्थ ने बॉलिंग करते हुए रवींद्र जडेजा की चमक को भी फीका कर दिया. यह सीनियर बॉलर असम के सामने मैच में चार ही विकेट ले सका. उन्होंने पहली पारी में 37 ओवर डाले और 92 रन खर्च कर दो विकेट लिए तो दूसरी पारी में 22 ओवर में 58 रन देकर दो बल्लेबाजों को चलता किया. पार्थ ने 2019 में सौराष्ट्र के लिए डेब्यू किया था. जडेजा के भारतीय टीम के साथ होने के चलते उन्हें मौका मिला था. हालांकि जब यह सीनियर खिलाड़ी लौटा तो पार्थ को जगह खाली करनी पड़ी थी. अब सात साल बाद उन्होंने इसी सूरमा को अपनी बॉलिंग से पीछे कर दिया.

पार्थ ने 8 विकेट लेकर तोड़ा उनादकट का रिकॉर्ड

पार्थ सौराष्ट्र के दूसरे गेंदबाज हैं जिन्होंने फर्स्ट क्लास में एक पारी में आठ विकेट लिए हैं. इससे पहले 2023 में जयदेव उनादकट ने दिल्ली के खिलाफ 12 ओवर में 39 पर आठ शिकार किए थे. पार्थ इन सबसे आगे निकल गए क्योंकि उन्होंने महज 17 रन पर ही यह कमाल कर दिया. उनका यह कमाल उनादकट की कप्तानी में ही आया है.

कैसा है पार्थ भुट का फर्स्ट क्लास करियर

पार्थ ने अभी तक 25 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं. इनमें 21.50 की औसत के साथ 94 विकेट लिए हैं. वे नौ बार एक पारी में पांच या इससे ज्यादा विकेट ले चुके हैं. वहीं तीन बार एक मैच में 10 बल्लेबाजों को आउट करने का करिश्मा किया है. उन्होंने कर्नाटक के सामने इसी रणजी सीजन के दूसरे राउंड में आठ विकेट लिए थे. तब पहली पारी में पांच शिकार थे. सौराष्ट्र की ओर से जिन भी गेंदबाजों ने कम से कम 20 मैच खेले हैं उनमें पार्थ की 21.50 की बॉलिंग औसत सबसे ऊपर है. वे जडेजा और उनादकट से भी ऊपर हैं. 

पार्थ कैसे बने क्रिकेटर

पार्थ के मन में भारतीय टीम के 2011 वर्ल्ड कप जीतने के बाद क्रिकेटर बनने का सपना जगा. इससे पहले वे इस खेल से दूर थे. मगर महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी वाली टीम के खिताब जीतने के बाद सब बदल गया. तब पार्थ 13 साल के थे और केवल गलियों में खेला करते थे. बाद में उन्होंने इस खेल को गंभीरता से लेना शुरू किया. वे गौतम बाबरिया के पास ट्रेनिंग लेने लगे. उनके दोस्त उन्हें समर कैंप में गौतम के पास लेकर गए थे. वहां पार्थ के खेल ने ध्यान खींचा. गौतम ने उनसे कहा कि आपके पास प्रतिभा है और क्रिकेट में आगे बढ़ो. जब उन्हें बताया गया कि वे कोचिंग के पैसे नहीं दे सकते. तब गौतम बाबरिया उन्हें फ्री में क्रिकेट की बारीकियां सिखाने लगे. 

सामान्य परिवार से आते हैं पार्थ भुट

पार्थ के पिता रमेशभाई भूट सामान्य काम किया करते थे. वे गांव में मजदूरी करते थे और मकान निर्माण से जुड़े थे. बाद में वे प्रोपर्टी डीलर के तौर पर भी काम करने लगे मगर इतने पैसे नहीं जुटा पाते थे कि पार्थ के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा कर सके. ऐसे में गौतम बाबरिया मददगार बनकर उभरे. उनकी देखरेख में पार्थ आगे बढ़े. मगर उन्हें सौराष्ट्र की अंडर 15 व अंडर 19 टीमों में जगह नहीं मिली. इसने उन्हें निराश किया. मगर कोच ने हौंसला दिया. इसके दम पर ही पार्थ आगे बढ़ते रहे. 

सीके नायडू ट्रॉफी से पार्थ ने कमाया नाम

पार्थ को आगे सौराष्ट्र की अंडर 23 टीम में खेलने को मिला. वे कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बॉलर रहे. इसी के बूते उन्हें रणजी ट्रॉफी में खेलने का मौका मिला. मगर सौराष्ट्र के पास पहले से ही कमाल के स्पिनर मौजूद थे. इनमें जडेजा के अलावा धर्मेंद्र सिंह जडेजा शामिल थे. ये दोनों भी बाएं हाथ के स्पिनर ही थे. लेकिन भुट सेलेक्शन के करीब रहे. इस सीजन से पहले धर्मेंद्रसिंह सौराष्ट्र छोड़ गए तो रवींद्र जडेजा सभी मैच के लिए उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में पार्थ के पास सुनहरा मौका है. वे 100 विकेट से महज छह विकेट दूर हैं. अगर ऐसा करते हैं तो सौराष्ट्र के 11वें बॉलर होंगे और सबसे तेजी से इस मुकाम तक पहुंचने वाले भी बन जाएंगे.

पार्थ फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक शतक भी लगा चुके हैं. उन्होंने यह कमाल 2023 के सीजन में पंजाब के सामने क्वार्टर फाइनल में नौवें नंबर पर आकर किया था. जब वे खेलने उतरे थे तब टीम 147 रन पर सात विकेट गंवा चुकी थी. वहां से उन्होंने टीम को 303 के स्कोर तक पहुंचा दिया था. 

पार्थ के टीम इंडिया में आने में क्या है चुनौती

पार्थ भारत के लिए टेस्ट खेलना चाहते हैं. मगर जिस तरह के वे बॉलर हैं उस भूमिका में कंपीटिशन काफी ज्यादा है. भारतीय टेस्ट टीम में मानव सुथार और हर्ष दुबे को रवींद्र जडेजा के उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है. ये दोनों उम्र में भी काफी जवान हैं. पार्थ जहां 29 साल के हो चुके हैं. मानव और हर्ष दोनों ही 24-24 साल के हैं. मानव ने इसी साल डेब्यू किया और टेस्ट में असर भी डाल चुके हैं.

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