वर्ल्ड एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप में भारत का अभियान अब समाप्त हो चुका है. भारत ने इस टूर्नामेंट के लिए कुल 36 एथलीट भेजे थे और सिर्फ तीन मेडल ही भारत की झोली में आए. भारत को महिलाओं में नेशनल रिकॉर्ड धारक पूजा सिंह से हाई जंप में मेडल की उम्मीद थी. मगर वह अपना बेस्ट नहीं दे सकीं और फाइनल में सातवें स्थान पर जैसे ही उन्होंने फिनिश किया, इसके साथ ही भारत का वर्ल्ड एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप में अभियान समाप्त हो गया. भारत इस टूर्नामेंट में एक भी गोल्ड नहीं जीत सका, जबकि दो सिल्वर और एक कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा.
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भारत ने कितने एथलीटों का दल भेजा था ?
भारतीय एथलेटिक्स संघ ने अपने 36 एथलीटों को वर्ल्ड एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए अमेरिका के यूजीन भेजा था. जिसमें 23 पुरुष एथलीट तो 13 महिला एथलीट शामिल थीं. इस तरह कुल 36 एथलीटों ने 18 अलग-अलग ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भाग लिया और देश के खाते में तीन मेडल आए. भारत के लिए सबसे बेस्ट प्रदर्शन अगले नीरज चोपड़ा बनने की राह पर चलने वाले आशीष यादव ने किया, जिन्होंने मेंस जैवलिन थ्रो (भाला फेंक) इवेंट में 74.09 मीटर के थ्रो से सिल्वर मेडल अपने नाम किया. नीरज चोपड़ा के बाद जैवलिन में अब आशीष भारत के उभरते सितारे बन चुके हैं.
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भारत के लिए किसने-किसने रचा इतिहास ?
वहीं, आशीष के बाद भारत को वर्ल्ड एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप में हाई जंप का पहला सिल्वर मेडल बसंत कुमार मेघवाल ने 2.21 मीटर ऊंची छलांग देकर दिलाया. जबकि बसंत के अलावा लॉन्ग जंप में भारत को वर्ल्ड एथलेटिक्स U20 चैंपियनशिप का पहला कांस्य मेडल 7.84 मीटर की लंबी छलांग लगाकर शाहनवाज खान ने दिलाया. इस तरह आशीष के बाद बसंत और शाहनवाज ही देश के लिए मेडल लेकर लौट सके, जबकि 33 भारतीय एथलीटों को अमेरिका से अब खाली हाथ लौटना पड़ेगा, जिसमें एक भी महिला एथलीट के हाथ मेडल नहीं आ सका. भारत ने इससे पहले 2021 और 2022 में भी इस प्रतियोगिता में तीन पदक जीते थे, जबकि 2024 में केवल एक मेडल ही आया था.
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