Exclusive: न आईपीएल में मौका मिला, न टीम इंडिया में खेल सका, इमोशनल होकर पढ़ाई के लिए भारत छोड़ा, अब पाकिस्तान की बैंड बजा दी

Shakti Shekhawat

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सौरभ नेत्रवलकर और मोनांक पटेल दोनों भारतीय मूल के अमेरिकी क्रिकेटर हैं.
सौरभ नेत्रवलकर और मोनांक पटेल दोनों भारतीय मूल के अमेरिकी क्रिकेटर हैं.

Story Highlights:

सौरभ नेत्रवलकर अमेरिका के कप्तान रह चुके हैं.

सौरभ नेत्रवलकर ने पाकिस्तान के खिलाफ सुपर ओवर में कमाल की बॉलिंग की थी.

टी20 वर्ल्ड कप 2024 में अमेरिका ने ग्रुप ए के मुकाबले में पाकिस्तान को हराकर सनसनी फैला दी थी. न्यूयॉर्क में खेले गए मैच में सौरभ नेत्रवलकर की धमाकेदार बॉलिंग के बूते अमेरिका ने यह उलटफेर किया. बाएं हाथ के इस बॉलर ने पहले चार ओवर में केवल 18 रन देकर दो विकेट लिए. इसके बाद सुपर ओवर में जादू बिखेरा और अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई. स्पोर्ट्स तक से बातचीत में नेत्रवलकर ने भारत छोड़कर अमेरिका जाने, वहां से क्रिकेट खेलने और पाकिस्तान को हराने को लेकर विस्तार से बात की.

सौरभ नेत्रवलकर भारत की ओर से अंडर 19 क्रिकेट खेल चुके हैं. वे 2010 में अंडर 19 भारतीय टीम का हिस्सा थे. लेकिन इसके बाद वे अमेरिका चले गए और अब वहीं से क्रिकेट खेलते हैं. इस बारे में नेत्रवलकर ने स्पोर्ट्स तक से कहा कि उनका पढ़ाई में भी इंट्रेस्ट था. साथ ही क्रिकेट भी खेल रहे थे. लेकिन भारतीय क्रिकेट में अपनी छाप नहीं छोड़ पाए. नेत्रवलकर ने कहा,

मेरी पढ़ाई में रुचि थी. 2009 से 2013 तक बैचलर की पढ़ाई की. 2013 से 2015 मैंने पूरी तरह से पढ़ाई को दिए और मुंबई की ओर से भी खेला लेकिन खुद को स्थापित नहीं कर पाया. वहां अगले लेवल पर नहीं जा पा रहा था. आईपीएल में नहीं खेल पा रहा था और भारतीय टीम की तरफ बढ़ नहीं रहा था. इसके बाद एग्जाम देकर अमेरिका में जाने का मौका मिला. यहां इंजीनियरिंग के कुछ दोस्त भी थे और एक बढ़िया कॉलेज में एडमिशन मिल रहा था. इसलिए इमोशनल फैसला था कि सब कुछ छोड़कर जाना था लेकिन वह प्रैक्टिकल भी था. लेकिन तब सोचा नहीं था कि मैं क्रिकेट खेलूंगा.

 

 

हमने वाइ़ड पर एक्स्ट्रा रन दौड़कर लिए जिससे 19 रन बने. यह आखिर में निर्णायक साबित हुए. कोच और कप्तान ने सुपर ओवर के लिए मुझ पर भरोसा जताया. 19 रन थे तो यह था कि तीन गेंद अच्छी फेंकनी है. मेरे से दो वाइड हुई और एक चौका गया लेकिन प्लान अच्छे से एग्जीक्यूट हो गया. आखिरी गेंद से पहले मैंने तीन बार अंपायर से पूछा कि कितने रन चाहिए छह या सात. जब सात बताए तो यह सोचा कि बस वाइड नहीं फेंकनी है. 

 

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