अजिंक्य रहाणे ने पिछले दिनों रिटायरमेंट लिया था. अब उन्होंने एक इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम को लेकर खुलकर बात की है. अजिंक्य रहाणे ने महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली की कप्तानी में खेलने और वर्तमान में गौतम गंभीर की कोचिंग में खेल रही टीम इंडिया के बारे में राय व्यक्त की. वे अभी ब्रिटेन में हैं और वहां पर हंड्रेड लीग में कमेंट्री कर रहे हैं. उन्होंने माइकल वॉन, एलिस्टर कुक, फिल टफनेल और डेविड लॉयड जैसे दिग्गजों के साथ 'Stick to Cricket' पॉडकास्ट में बात की.
रहाणे ने कोहली की टेस्ट कप्तानी पर क्या कहा
रहाणे ने बताया कि विराट कोहली के साथ उनकी सकारात्मक और खुलकर बात होती थी. इससे दोनों के बीच टेस्ट क्रिकेट में अहम साझेदारियां हुईं. कोहली के साथ जब भी उन्होंने बैटिंग की तो वह अपना बेस्ट प्रदर्शन करते थे. रहाणे ने कहा कि विराट का रवैया आक्रामक रहता था और वह शांत थे. इससे दोनों को मदद होती थी. विराट ने उन्हें हमेशा अटैकिंग रहने को कहा. वे कहते थे कि अगर पहली गेंद शॉट मारने लायक है तो ऐसा करना चाहिए. वह उनका साथ देंगे.
रहाणे ने टेस्ट क्रिकेट में 85 मैच में 12 शतकों की मदद से 5077 रन बनाए. उनकी कप्तानी में भारत को कभी टेस्ट में हार नहीं मिली. 2020-21 में जब टीम इंडिया कोविड के दौर में ऑस्ट्रेलिया गई थी तब रहाणे की कप्तानी में ही जीत मिली थी. तब एडिलेड में भारत 36 रन पर ढेर हो गया था. कोहली भी पिता बनने की वजह से पहले टेस्ट के बाद भारत आ गए थे. तब रहाणे ने कमान संभाली थी और 2-1 से भारत को विजेता बनाया था.
रहाणे का कहना है कि 2014 में जब महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट से संन्यास ले लिया था तब विराट और रवि शास्त्री की जोड़ी ने कमान संभाली. इन दोनों ने भारतीय क्रिकेट को मजबूत बनाया. विदेश में खेलने के दौरान इनका जोर आक्रामक, साहसी क्रिकेट पर होता था.
गंभीर के कार्यकाल में टेस्ट में बुरा हाल
गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद भारत ने 2024 से अभी तक दो टेस्ट सीरीज घर पर गंवा दी. उसे पहले न्यूजीलैंड ने मात दी फिर 2025 में साउथ अफ्रीका ने भी हरा दिया. इससे घर पर उसके अजेय रहने का सिलसिला खत्म हो गया. इससे पहले 2012 से 2024 के बीच भारत ने घर पर एक भी टेस्ट सीरीज नहीं गंवाई थी. अब शुभमन गिल टेस्ट में कमान संभाल रहे हैं. उन्हें 2025 में ही जिम्मा मिला. भारतीय बैटिंग पूरी तरह से नई है. केएल राहुल व ऋषभ पंत को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर बल्लेबाज ने पिछले दो साल की अवधि में ही कदम रखा है या फिर खुद को इस फॉर्मेट में स्थापित किया है.
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