अलविदा ग्लास्गो! अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 का काउंटडाउन शुरू, नीरज चोपड़ा और पीटी उषा ने लिया CWG का झंडा

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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया. (PC: Getty)
ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया. (PC: Getty)

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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन हो गया.

अगले कॉमनवेल्थ गेम्स की 2030 में भारत मेजबानी करेगा.

ग्लास्गो में रविवार को 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का शानदार समापन हो गया.इसके साथ ही 11 दिनों तक चले बेहतरीन खेल आयोजनों का दौर खत्म हुआ और भारत के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत हुई.क्लोजिंग सेरेमनी में स्कॉटलैंड ने आधिकारिक तौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा और औपचारिक बैटन भारत को सौंपी.ओल‍िंप‍िक चैंपियन नीरज चोपड़ा और भारतीय ओल‍िंप‍िक संघ (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा ने देश की ओर से इसे लिया.इसी के साथ अहमदाबाद में होने वाले 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक तौर पर काउंटडाउन शुरू हो गया है. 

ग्लास्गो ने अहमदाबाद को सौंपी बैटन 

क्लोजिंग सेरेमनी में सबसे खास पल आधिकारिक हैंडओवर सेरेमनी के दौरान आया, जब ग्लास्गो ने भारत को खेलों की मेजबानी की ज़िम्मेदारी औपचारिक रूप से सौंपी.कॉमनवेल्थ गेम्स का झंडा एरीना में अपनी प्रतीकात्मक यात्रा पूरी करने के बाद कई व्यक्तियों के हाथों से गुजरा. ग्लास्गो की लॉर्ड प्रोवोस्ट जैकलीन मैकलारेन ने इसे कॉमनवेल्थ गेम्स स्कॉटलैंड की वाइस-चेयर सुसान जैक्सन, स्कॉटिश नेटबॉल खिलाड़ी एमिली निकोल, कॉमनवेल्थ स्पोर्ट के प्रेसिडेंट डॉ. डोनाल्ड रुकारे, ओल‍िंपिक गोल्ड मेडलिस्ट नीरज चोपड़ा, IOA की प्रेसिडेंट पीटी उषा और आखिर में गुजरात के डिप्टी सीएम हर्ष संघवी को सौंपा, जिससे यह औपचारिक ट्रांसफर पूरा हुआ. इस मौके ने 'अहमदाबाद 2030' की राह की आधिकारिक शुरुआत की.2010 में दिल्ली के बाद भारत दूसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा.2030 का एडिशन इसलिए भी खास है क्योंकि यह कॉमनवेल्थ गेम्स की 100वीं वर्षगांठ (सेंटेनरी) होगी. 


भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन 


औपचारिक रूप से बैटन सौंपे जाने के बाद भारत ने 'वसुधैव कुटुंबकम' यानी पूरी दुनिया एक परिवार है की सोच पर आधारित एक शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुति दी. यह कार्यक्रम तीन हिस्सों में हुआ, जिसमें भारत की विविधता, कला की परंपराओं और खेल की विरासत का जश्न मनाया गया और साथ ही कॉमनवेल्थ देशों को अहमदाबाद आने का न्योता भी दिया गया.मानुषी छिल्लर ने 'वंदे मातरम' के 150 साल पूरे होने के मौके पर एक शानदार ओपनिंग परफॉर्मेंस की अगुआई की.मशहूर संगीतकार शंकर महादेवन के ऑर्केस्ट्रा संगीत में भारतीय शास्त्रीय परंपराओं और आधुनिक संगीत का बेहतरीन मेल देखने को मिला.इसके बाद एक खास तौर पर तैयार की गई फिल्म के जरिए दुनिया को अहमदाबाद से रूबरू कराया गया. 
इस फिल्म में गुजरात को एक ऐसी जगह के तौर पर दिखाया गया जहां सदियों पुरानी विरासत और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इनोवेशन साथ-साथ मौजूद हैं.