कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 भारत के लिए काफी यादगार रहे. भारत के लिए कुल 126 एथलीटों (पैरा एथलीटों को मिलाकर) ने भाग लिया. इसमें भारत ने जैवलिन थ्रो से लेकर बॉक्सिंग और इसके अलावा जूडो में भी कमाल कर दिया. भारत ने मुक्केबाजी में सोना पर सोना बरसाया और इसके चलते कुल 13 गोल्ड मेडल अपने नाम किए. भारत ने कुल 39 मेडल अपने नाम किए, जिसमें 13 गोल्ड भारत के खाते में आए. भारत के सबसे अधिक गोल्ड बॉक्सिंग में आए. चलिए जानते हैं कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने क्यों ऐसे पांच बड़े कमाल किए, जो पहली बार हुए.
भारत के लिए बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जैस्मीन लैंबोरिया, सचिन सिवाच, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, प्रिया, अंकुश पंघाल और अरुंधति चौधरी ने जीते, जिससे इतिहास बन गया.
जैवलिन में पहली बार हुआ
भारत के स्टार खिलाड़ी नीरज चोपड़ा जहां गोल्ड मेडल नहीं जीत सके. जैवलिन में गोल्ड मेडल इस बार श्रीलंका के पथिरागे के नाम रहा. नीरज को सिल्वर से संतोष करना पड़ा, तो अन्य जैवलिन थ्रोअर यशवीर सिंह ने कांस्य पदक पर कब्जा जमाया. इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब भारत ने एक नहीं बल्कि दो मेडल पोडियम फिनिश किए.
जूडो में गोल्ड ही गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के जूडो खिलाड़ियों ने कमाल कर दिया. भारत के लिए अस्मिता डे (महिला 48 किग्रा) ने देश को इस खेल का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड दिलाया. लेकिन इसके कुछ ही समय बाद हर्ष सिंह (पुरुष 60 किग्रा) ने भी कमाल करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस तरह भारत ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो खेल में एक नहीं बल्कि दो गोल्ड अपने नाम किए.
गुलवीर जैसा कोई भारतीय नहीं
भारत के लॉन्ग डिस्टेंस धावक गुलवीर सिंह ने भी इतिहास रच दिया. गुलवीर ने 10,000 मीटर की दौड़ को 27:49.78 मिनट के साथ समाप्त करने के साथ भारत को इस स्पर्धा में मेडल दिलाने वाले पहले भारतीय बने. गुलवीर ने 10,000 मीटर में सिल्वर मेडल अपने नाम किया, वहीं इसके बाद उन्होंने 5,000 मीटर स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम किया. इससे भारत के लिए इन दोनों स्पर्धाओं में मेडल हासिल करने वाले गुलवीर पहले भारतीय बने.
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