ग्लासगो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हर किसी को हाई जम्प में पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स के ब्रॉन्ज मेडल तेजस्विन शंकर से मेडल की उम्मीद थी, मगर फाइनल के दौरान उनके साथ वो हो गया, जिसके बारे में उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था. उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा. शंकर मैदान से बाहर जाकर बैठ तो गए, मगर उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा. उनका मेडल जीतने का सपना तो चकनाचूर हो गया था, मगर उन्होंने मैदान के किनारे बैठकर अपने साथी सर्वेश कुशारे की सिल्वर जीतने में मदद की. यह कॉमनवेल्थ गेम्स का ऐसा फाइनल था, जिसे भुलाया नहीं जा सकता.
तेजस्विन शंकर ने नहीं छोड़ा मैदान
मैंस हाई जम्प फाइनल के लिए तीन भारतीय खिलाड़ी सर्वेश कुशारे, आदर्श राम ज्योति शंकर और तेजस्विन मैदान पर उतरे थे. एक खिलाड़ी जल्दी ही बाहर हो गया. बाकी दो खिलाड़ी अकेले अपना मुक़ाबला पूरा नहीं कर पाए, क्योंकि प्रतियोगिता से बाहर होने वाला खिलाड़ी ने उस जगह को छोड़ा ही नहीं. तेजस्विन शंकर ने ग्लास्गो की ठंड में मैदान के किनारे ही डटे रहे.वे उस जगह खड़े रहे, जहां बार की ऊंचाई उनके बिना ही बढ़ती जा रही थी. कोशिशों के बीच सर्वेश और आदर्श उनके पास आए. जब सर्वेश 2.25 मीटर की ऊंचाई पार करने की अपनी पहली दो कोशिशों में नाकाम रहे, तो तेजस्विन ने हाई-जंप की एक चाल चली. उन्होंने सुझाव दिया कि उन्हें इसे छोड़कर सीधे 2.28 मीटर पार करने की कोशिश नहीं चाहिए, ताकि वह गोल्ड जीत सके. हालांकि सर्वेश को शॉर्टकट में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उन्होंने 2.25 मीटर पार किया.
तीजों की लिस्ट में तेजस्विन का नाम सिर्फ DNF (यानी 'पूरा नहीं किया') के तौर पर दर्ज हो सकता है, मगर उन्होंने दबाव के समय अपने दो साथियों की मदद की और भारत को मेडल जिताने का लक्ष्य पूरा किया. जब बार की ऊंचाई 2.25 मीटर पहुंची, तो सिर्फ़ सर्वेश और जमैका के रोमेन बेकफ़ोर्ड ही बचे थे. दोनों ने इसे पार कर लिया, फिर दोनों 2.28 मीटर पार करने में नाकाम रहे और फिर 'काउंटबैक' का नियम लागू हुआ. कम ऊंचाई पर बेकफ़ोर्ड का रिकॉर्ड बेहतर था (उन्होंने 2.25 मीटर पहली ही कोशिश में पार कर लिया था) और इसलिए उन्हें गोल्ड मिला और सर्वेश ने सिल्वर अपने नाम किया. वह कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर जीतने वाले भारत के पहले हाई जंपर बने. आदर्श 2.15 मीटर के साथ पांचवें स्थान पर रहे.




