INDvsAUS: गौतम गंभीर ने स्पिन खेलने पर टीम इंडिया को सुनाया, बोले- छक्के लगाना सीखे पर डिफेंस भूले

भारतीय बल्लेबाज हालिया समय में स्पिन के खिलाफ जूझते नज़र आते हैं.

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भारतीय बल्लेबाज हालिया समय में स्पिन के खिलाफ जूझते नज़र आते हैं. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रही टेस्ट सीरीज (India vs Australia Test) में भी उन्हें काफी दिक्कत हो रही है. इसका सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण इंदौर टेस्ट रहा. इसमें भारतीय टीम दोनों पारियों में एक बार भी 200 रन तक नहीं बना सकी और सवा दो दिन के अंदर हार गई. टीम इंडिया के पूर्व ओपनर गौतम गंभीर (Gautam Gambhir) का मानना है कि भारतीय बल्लेबाज छक्के मारने के चक्कर में डिफेंस करना भूल गए हैं. एक समय जो भारतीय टीम स्पिन खेलने में माहिर मानी जाती थी अब वह यह कला भूल चुकी है. पिछले कुछ सालों में बार-बार यह समस्या दिखी है.

 

गंभीर ने स्पोर्ट्स तक से बातचीत में भारतीय टीम के स्पिन खेलने के बारे में बात की. उन्होंने लखनऊ सुपर जाएंट्स की जर्सी लॉन्च के बाद कहा, 'स्पिन खेलने की कला चली गई है. डिफेंस पर जब तक भरोसा नहीं होगा तब तक अटैक नहीं कर सकते. अगर आप सोचेंगे कि नाथन लायन जैसा बॉलर हर गेंद को मारने देगा तो ऐसा नहीं होगा. डिफेंस जरूरी है चाहे टर्निंग ट्रेक हो या फ्लैट पिच. जब हम खेलते थे तो कोच कहते थे कि डिफेंस करें तो बैट से करें पैड से नहीं. बैट पैड के आगे होना चाहिए. अगर ऐसा नहीं होगा तो संघर्ष करेंगे. जब से डीआरएस आया है तब से तो यह और ज्यादा जरूरी हो गया है. खिलाड़ियों की छक्के मारने की काबिलियत बढ़ गई है लेकिन आपकी बुनियाद हिल गई है.'

 

गंभीर ने बताया क्यों खेलनी चाहिए रणजी ट्रॉफी


गंभीर ने खिलाड़ियों के रणजी ट्रॉफी में खेलने की पैरवी भी की. भारत के कई बल्लेबाजों के पास ऑस्ट्रेलिया सीरीज से पहले घरेलू क्रिकेट में खेलने का मौका था लेकिन कोई इसमें नहीं खेला. गंभीर ने कहा कि हर बड़ी सीरीज से पहले रणजी ट्रॉफी खेलनी चाहिए. इस साल टी20 सीरीज छोड़ी जा सकती हैं क्योंकि टी20 वर्ल्ड कप नहीं हो रहा है. इस साल सिर्फ वनडे और लाल गेंद क्रिकेट खेलना चाहिए.

 

उन्होंने कहा, 'रणजी ट्रॉफी खेलना चाहिए था. इससे बेहतर कोई तैयारी नहीं हो सकती थी. 200 प्रतिशत खेलना चाहिए था. चाहे जितने 15 दिन, 20 दिन के कैंप लगा लीजिए... ऑस्ट्रेलिया ने पहले दो टेस्ट में संघर्ष किया क्योंकि उन्होंने प्रैक्टिस मैच नहीं खेला. यह नेगेटिव माइंडसेट है. गेंदबाज रेस्ट ले सकते हैं लेकिन बल्लेबाजों को रणजी ट्रॉफी खेलना चाहिए. वहां जाइए 100, 200 रन बनाइए. अगर रन नहीं भी बनेंगे तो आप लाल गेंद से खेलने के जोन में जाते हैं. बड़ी सीरीज से पहले जब भी रेड बॉल से खेलने का मौका मिले तो खेलना चाहिए.' 

 

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