टीम इंडिया के काफी व्यस्त शेड्यूल को लेकर चर्चाएं काफी समय से चल रही है. बीसीसीआई की हाल में हुई बैठक में भी भारत के 'फ्यूचर टूर्स प्रोग्राम' (FTP) में बदलाव करने का फैसला किया है, ताकि खिलाड़ियों को आराम करने का वक्त मिल सके. अब इस बीच सुनील गावस्कर चाहते हैं कि BCCI और ICC यह समझें कि भारतीय क्रिकेटर गन्ने की तरह लगातार निचोड़े जाने वाली चीज नहीं हैं और वे खेल के व्यस्त शेड्यूल में थोड़ी ढील देने की मांग की है.
ADVERTISEMENT
दिल्ली के खिलाफ बंगाल का रणजी ट्रॉफी मैच दूसरी जगह शिफ्ट
भारत के पूर्व कप्तान का मानना है कि लगातार होने वाले इंटरनेशनल क्रिकेट की वजह से घरेलू क्रिकेट को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे भारत के टैलेंट पाइपलाइन को नुकसान हो रहा है. यह कदम खिलाड़ियों के वर्कलोड और चोटों को लेकर चिंता के बीच उठाया गया है. BCCI के इस महीने के आखिर में होने वाली ICC की बैठक में भी यह मुद्दा उठाने की संभावना है.
भारत की एक टीम भी ट्रॉफ़ी जीतने के लिए अच्छी नहीं
'स्पोर्टस्टार' के अनुसार गावस्कर ने लिखा कि हाल में भारतीय क्रिकेट की स्थिति का जायजा लेने के लिए हुई बैठक में इस मुद्दे को समझने की कोशिश की गई. उम्मीद है कि जब 2027 से शुरू होने वाले चार साल के अगले चक्र के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट कैलेंडर पर चर्चा करने के लिए ICC की बैठक होगी, तो फैसला लेने वालों को यह एहसास होगा कि भारतीय क्रिकेटर न तो मशीनें हैं और न ही गन्ने, जिन्हें रस की हर बूंद के लिए लगातार निचोड़ा जाए.
उन्होंने आगे कहा कि यह तर्क कि भारत की बेंच स्ट्रेंथ इतनी मजबूत है कि वह तीन टीमें उतार सकता है, दुनिया के सामने दावा करने के लिए तो अच्छा है, लेकिन हकीकत यह है कि जैसा कि हाल के नतीजों से पता चला है कि इस समय भारत की एक टीम भी ज़्यादा ट्रॉफ़ी जीतने के लिए काफ़ी अच्छी नहीं है. हां एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल टीम में फिर से नई जान फूंक देगा और आने वाले मुक़ाबलों के लिए आत्मविश्वास देगा, लेकिन जब तक घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक पाइपलाइन से ऐसे खिलाड़ी नहीं निकलेंगे जो दुनिया को हरा सकें.
ADVERTISEMENT











