'द जेंटलमैन गेम' कहे जाने वाले क्रिकेट के खेल में तमाम बदलाव हो चुके हैं. गेंद और बल्ले के बीच संतुलन लाने और मैदान पर गेंद की इंटेंसिटी को हाई बनाए रखने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) समय-समय पर तमाम नियमों में बदलाव करती रहती है. जिससे आधुनिक क्रिकेट और भी रोमांचक होता जा रहा है. टेस्ट क्रिकेट के बाद वनडे और अब टी20 क्रिकेट वाली दुनिया में फिर से टेस्ट क्रिकेट को जगह देना आईसीसी के लिए सबसे बड़ा चैलेंज है. टेस्ट क्रिकेट को बढ़ावा देने के लिए वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप आई, पिंक बॉल से डे-नाइट टेस्ट मैच को लाया गया. अब इसी दिशा में आईसीसी ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया, जिसके तहत सिर्फ डे-नाइट टेस्ट मैच ही नहीं, बल्कि दिन के टेस्ट मैच में भी टीमें पिंक बॉल से खेल सकती हैं. जबकि इसके अलावा भी आईसीसी ने तमाम छोटे-छोटे नियमों में बदलाव किए, चलिए जानते हैं कि वो क्या हैं:-
ADVERTISEMENT
आईसीसी ने क्या रोचक फैसला किया?
आईसीसी ने क्रिकेट के खेल में तमाम बदलाव किए और ये बदलाव अब एक अक्टूबर से क्रिकेट के खेल में लागू भी कर दिए गए हैं. इसमें सबसे बड़ा बदलाव दिन के मैच में भी पिंक बॉल से टेस्ट खेलना है. दरअसल, टेस्ट मैच के दौरान कभी-कभी खराब रोशनी के चलते या फिर जल्दी अंधेरा होने के चलते दिन के 90 ओवर से पहले ही मैच को रोककर स्टंप्स का ऐलान कर दिया जाता है. इस चीज से बचने के लिए आईसीसी ने अब सभी देशों को पिंक बॉल से दिन का टेस्ट मैच खेलने की अनुमति दे दी है. यानी पिंक बॉल से खेले जाने वाले टेस्ट मैच में अगर दिन के अंत के समय जल्दी अंधेरा होता है तो फिर उस स्थिति में पिंक बॉल पर्याप्त रूप से नजर आएगी और खेल को जारी रखा जा सकेगा.
पिंक बॉल क्या होगा बेस्ट विकल्प?
आईसीसी ने हालांकि पिंक बॉल के इस्तेमाल के साथ एक शर्त भी रखी. आईसीसी ने पिंक बॉल से टेस्ट क्रिकेट खेलने का फैसला सीधे तौर पर देश के क्रिकेट बोर्ड के हाथ में दे दिया है. यानी किसी बाईलेटरल सीरीज में अगर दोनों बोर्ड राजी हैं तो वह टेस्ट मैच की शुरुआत से पहले ही रेड बॉल को पिंक बॉल से बदल सकते हैं. लेकिन एक बार मैच अगर पिंक बॉल से शुरू हो गया तो उसके बाद फिर दोनों टीमें गेंद नहीं बदल सकेंगी. इसका मतलब दोनों देशों के बोर्ड्स को सोच-समझकर पिंक बॉल लेने का फैसला करना होगा. हालांकि, इस गेंद से खेलने का विकल्प अब टीमों के पास उपलब्ध रहेगा.
भारत कब खेल सकता है पहला डे पिंक बॉल टेस्ट मैच?
शुभमन गिल की कप्तानी वाली टीम इंडिया को अब वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप 2025-27 के फाइनल में जगह बनानी है तो उसकी सिर्फ दो ही टेस्ट सीरीज बाकी हैं. गिल की कप्तानी वाली टेस्ट टीम इंडिया को नवंबर माह में न्यूजीलैंड दौरे पर दो टेस्ट मैच खेलने हैं और उसके बाद घर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज खेलनी है. इसका एक टेस्ट मैच अगले साल 2027 में गुवाहाटी के मैदान पर खेला जाना है. फरवरी के महीने में गुवाहाटी में ठंड होगी और वहां पर जल्दी अंधेरा होगा, इसके चलते बीसीसीआई चाहें तो आईसीसी के इस नियम का फायदा उठाते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरा टेस्ट मैच अगले साल पिंक बॉल से खेल सकती है. लेकिन इसमें ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड को भी हामी भरनी होगी?
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बॉर्डर-गावस्कर टेस्ट सीरीज का पूरा शेड्यूल:-
| टेस्ट मैच | तारीख | वेन्यू (स्टेडियम और शहर) | समय (IST) |
|---|---|---|---|
| पहला टेस्ट | 21 जनवरी – 25 जनवरी 2027 | विदर्भ क्रिकेट एसोसिएशन (VCA) स्टेडियम, नागपुर | सुबह 9:30 बजे |
| दूसरा टेस्ट | 29 जनवरी – 2 फरवरी 2027 | एम.ए. चिदंबरम (चेपॉक) स्टेडियम, चेन्नई | सुबह 9:30 बजे |
| तीसरा टेस्ट | 11 फरवरी – 15 फरवरी 2027 | बरसापारा क्रिकेट स्टेडियम, गुवाहाटी | सुबह 9:00 बजे |
| चौथा टेस्ट | 19 फरवरी – 23 फरवरी 2027 | जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स, रांची | सुबह 9:30 बजे |
| पांचवां टेस्ट | 27 फरवरी – 3 मार्च 2027 | नरेंद्र मोदी स्टेडियम, अहमदाबाद | सुबह 9:30 बजे |
पहला पिंक बॉल टेस्ट भारत ने कब खेला था?
पिंक बॉल से डे-नाइट टेस्ट मैच का आगाज पहली बार साल 2015 में हुआ. पहली बार फैंस को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच पिंक बॉल से डे-नाइट टेस्ट मैच देखने को मिला था. इस टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया ने तीन विकेट से जीत दर्ज की थी और ये मैच तीन दिन के भीतर ही समाप्त हो गया. वहीं, भारत ने पहला पिंक बॉल टेस्ट मैच 22 नवंबर 2019 को बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डन्स मैदान पर खेला था. ये टेस्ट मैच भी ज्यादा दिन नहीं चला और भारत ने पारी व 46 रनों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. ये मैच भी तीन दिन के भीतर समाप्त हो गया था.
भारत में क्यों बनते हैं सबसे ज्यादा ODI दोहरे शतक, 13 में से 8 बार हुआ ऐसा
पिंक बॉल डे-नाइट टेस्ट क्यों बना काल?
पिंक बॉल से जब डे-नाइट टेस्ट मैच खेले जाने लगे तो टेस्ट मैच पांच दिन के बजाय औसतन तीन दिन में सिमटकर रह गया. इसके पीछे की वजह भी पिंक बॉल ही बनी. रेड बॉल की अपेक्षा पिंक बॉल जब नई होती है तो बहुत ही ज्यादा स्विंग होती है. जबकि 20 से 25 ओवर के बाद बहुत ही जल्दी सॉफ्ट हो जाती है. इसके बाद गेंदबाज को मदद नहीं मिलती है. लेकिन तब तक पिंक बॉल बैटर्स को टिकने नहीं देती. दूसरा कारण ये है कि जब शाम के समय अंधेरा हो रहा होता है तो ट्वाइलाइट पीरियड के दौरान पिंक बॉल को देखना बैटर्स के लिए असहज प्रतीत हुआ. इसके चलते पिंक बॉल की विजिबिलिटी काफी कठिन हो जाती है. जिससे ये गेंद डे-नाइट टेस्ट मैच में कुछ खास साबित नहीं हो सकी. यही कारण है कि दस साल पहले शुरू हुआ ये प्रयोग क्रिकेट के खेल में इतना असरदार नहीं रहा और अब आईसीसी ने पिंक बॉल के लिए एक नया नियम बना दिया.
ADVERTISEMENT











