गौतम गंभीर की कोचिंग वाली टीम इंडिया के मैनेजमेंट और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण व सेलेक्टर्स के बीच कुछ समय पहले काफी हंगामा देखने को मिला. इस हंगामे की जड़ ये तीनों खुद नहीं, बल्कि इंजर्ड खिलाड़ियों की संख्या और उनका समय पर फिट नहीं हो पाना था. श्रीलंका में दो टेस्ट मैचों की सीरीज से ठीक पहले तक जब जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन फिट नहीं हो सके, तो काफी बवाल मच गया था. इन दोनों के अलावा टीम इंडिया के लिए खेलने वाले कम से कम 15 से 16 खिलाड़ी इंजरी से जूझ रहे थे, जिसके चलते BCCI को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल भी होना पड़ा था. लेकिन अब बोर्ड ने इंजर्ड खिलाड़ियों की समस्या से निपटने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है. इसके तहत वीवीएस लक्ष्मण वाले COE का बजट करीब 35 करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया है. इसकी जानकारी मीडिया रिपोर्ट के जरिए सामने आई.
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BCCI ने कितने करोड़ बढ़ाया बजट?
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लक्ष्मण की अध्यक्षता वाले COE का बीते सीजन बजट 92 करोड़ रुपये था, जिसे BCCI ने आगामी सीजन के लिए 35 करोड़ रुपये बढ़ाकर अब 127 करोड़ रुपये कर दिया है. टीम इंडिया के इंजर्ड खिलाड़ियों की समस्या से निपटने के लिए बोर्ड ने यह कदम उठाया है. रिपोर्ट में बताया गया कि बोर्ड ने इंजर्ड खिलाड़ियों की समस्या के समाधान के लिए नए सिरे से काम करना शुरू किया है, क्योंकि हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल ने इसको लेकर चिंता व्यक्त की थी. कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी साल 2026 में एक-एक बार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जा चुके हैं, लेकिन जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पंड्या, वॉशिंगटन सुंदर, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा और प्रसिद्ध कृष्णा पिछले 20 महीनों में कितनी बार COE जाकर वापस लौटे, इसकी जानकारी नहीं दी गई है.
पिछले 20 महीनों में कितने खिलाड़ियों का हुआ इलाज और रिहैब?
रिपोर्ट में आगे बताया गया कि पिछले 20 महीनों में टीम इंडिया की मेंस और वीमेंस टीम को मिलाकर कुल 68 खिलाड़ियों का इलाज किया गया और उन्हें इंजरी से उबारा गया. टॉप क्रिकेटर्स की बात करें, तो कुल 37 खिलाड़ियों को इंजरी से उबारा जा चुका है. BCCI को इतनी अधिक इंजरी का सामना साल 2020-21 में कोरोना काल के दौरान बायो-बबल के समय करना पड़ा था.
कौन-कौन से खिलाड़ी हाल ही में इंजर्ड हुए?
टीम इंडिया के लिए बुमराह और साई सुदर्शन जैसे खिलाड़ी फिट होकर लौट चुके हैं. लेकिन अभी तक हार्दिक पंड्या, वरुण चक्रवर्ती, रियान पराग, सुयश शर्मा, युधवीर सिंह चरक और हर्षित राणा जैसे खिलाड़ी पूरी तरह से मैच फिट नहीं हो सके हैं. जबकि ऋषभ पंत के भी पैर में चोट है और उन्हें न्यूजीलैंड ए के दौरे के लिए फिटनेस पर निर्भर रहने की शर्त के साथ शामिल किया गया है. इस तरह कुल मिलाकर इंजर्ड होने और फिर ठीक होकर वापसी करने वाले खिलाड़ियों की संख्या 15 से 16 के आसपास है. वहीं, पिछले 20 महीनों के आंकड़े देखें, तो 37 टॉप खिलाड़ी इंजर्ड हुए, जिनमें 11 सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट वाले और कई इंडिया ए के लिए खेलने वाले खिलाड़ी शामिल थे.
BCCI ने किस पद के लिए मांगे थे आवेदन?
BCCI ने सिर्फ COE का बजट ही नहीं बढ़ाया, बल्कि इससे पहले भी एक बड़ा कदम उठाया था. COE में हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन के पद पर नितिन पटेल काम कर रहे थे, लेकिन साल 2025 में उनके इस्तीफा देने के बाद से यह पद खाली पड़ा है. बोर्ड ने कुछ महीने पहले ही इस पद को भरने के लिए आवेदन मांगे थे और जल्द ही COE में हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन का पद संभालने वाले व्यक्ति के नाम का ऐलान किया जा सकता है. हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस एंड मेडिसिन ही COE में खिलाड़ियों की इंजरी से रिकवरी की पूरी टाइमलाइन COE के प्रमुख को देता है और उन्हें रिपोर्ट करता है. नितिन पटेल के बाद इस पद पर कौन आता है, यह आने वाले समय में पता चल जाएगा.
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इंजर्ड खिलाड़ियों को लेकर क्या हंगामा हुआ था?
टीम इंडिया जब कुछ महीने पहले श्रीलंका दौरे पर दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने गई थी, तो बुमराह और साई सुदर्शन को टीम में जगह मिली थी. इन दोनों खिलाड़ियों को फिटनेस पर निर्भर रहने की शर्त के साथ शामिल किया गया था. लेकिन सीरीज शुरू होने से ठीक पहले जानकारी आई कि दोनों एक भी मैच नहीं खेल सकेंगे. इस बात से टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल काफी परेशान हो गए थे, जबकि सेलेक्टर अजीत अगरकर और COE प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण के बीच भी कुछ मुद्दों पर असहमति बनती नजर आई थी.
COE पर जब इंजर्ड खिलाड़ियों के फिट नहीं होने को लेकर सवाल उठे, तो लक्ष्मण मीडिया के सामने आए और उन्होंने साफ तौर पर कहा कि COE में सिर्फ खिलाड़ियों को फिट करने का काम नहीं होता, बल्कि कई अन्य पहलुओं पर भी काम किया जाता है. लक्ष्मण का साफ कहना था कि लोग COE को अस्पताल न समझें. यहां खिलाड़ियों को फिट करने के अलावा उनके विकास और तमाम पहलुओं पर काम किया जाता है, जिससे टीम इंडिया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके.
इस हंगामे के बाद ही बोर्ड का ध्यान खिलाड़ियों के बार-बार इंजर्ड होने की समस्या की तरफ गया और इस दिशा में तब से लगातार एक के बाद एक बड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
खिलाड़ी सबसे ज्यादा किस इंजरी से परेशान हैं?
टीम इंडिया के तमाम सीनियर खिलाड़ी सबसे ज्यादा सॉफ्ट-टिश्यू इंजरी से परेशान हैं. इसके लिए बोर्ड ने एक और मजबूत कदम उठाने का प्लान बनाया है. बोर्ड ने अपनी ऑपरेशन्स टीम को एक स्पेशल वर्कशॉप में भेजा है. इसका प्रमुख उद्देश्य ऐसा फ्यूचर टूर प्रोग्राम बनाना है, जिससे दो बड़ी सीरीज या फिर दो बड़े टूर्नामेंट के बीच खिलाड़ियों को रिकवरी के लिए पर्याप्त समय मिले. इसके चलते खिलाड़ियों को सॉफ्ट-टिश्यू इंजरी से बचाया जा सकता है.
इंजरी के बाद वापसी के लिए क्या है शर्त?
टीम इंडिया के इंजर्ड खिलाड़ियों की वापसी के लिए गौतम गंभीर के मैनेजमेंट ने कुछ नियम बना रखे हैं. खिलाड़ी को पहले तो घरेलू क्रिकेट में एक आध मैच खेलकर अपनी फिटनेस दिखानी होगी. उसके बाद सेलेक्शन से ठीक पहले रिटर्न-टू-प्ले फिटनेस टेस्ट पास करना होगा. इस तरह रिहैब पूरा करके और घरेलू क्रिकेट में मैच खेलने के बाद ही किसी खिलाड़ी के टीम इंडिया में वापसी का दरवाजा खुलता है. हालांकि, इंजरी अगर ज्यादा गंभीर नहीं है, तो खिलाड़ी फिटनेस हासिल करके सीधे टीम इंडिया से खेलते हुए भी नजर आ जाता है.
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