पांच दशकों के लंबे इंतजार के बाद फीफा वर्ल्ड कप खेलने वाली कांगो टीम का सफर टूर्नामेंट में राउंड ऑफ 32 में समाप्त हो गया. 52 साल बाद इस टूर्नामेंट में खेलने वाली कांगो टीम का सपना इंग्लैंड ने चकनाचूर किया. नॉकआउट मुकाबले में कांगो को इंग्लैंड के हाथों 1-2 से हार का सामना करना पड़ा. कांगो के कोच सेबेस्टियन डेसाब्रे का टीम के साथ FIFA वर्ल्ड कप नॉकआउट तक का ऐतिहासिक सफ़र दुखद मोड़ पर खत्म हुआ. इस हार के बाद कोच डेसाब्रे पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. मैच के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक उन्हें पिता के निधन की खबर मिली, जिसे सुनकर वे कुछ पल के लिए सदमे में आ गए.
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1974 के बाद पहली बार कांगो को वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफ़ाई कराने वाले डेसाब्रे ने पुर्तगाल और कोलंबिया जैसी टीमों वाले मुश्किल ग्रुप J में टीम को संभाला था. इसके बाद नॉकआउट में इंग्लैंड के खिलाफ भी टीम ने कमाल की शुरुआत की थी. ब्रायन सिपेंगा के सातवें मिनट के गोल ने इंग्लैंड को चौंका दिया. हालांकि हैरी केन के दो गोल की बदौलत इंग्लैंड ने दूसरे हाफ के आखिर में वापसी करते हुए जीत हासिल की.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिली खबर
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए डेसाब्रे तब सदमे में आ गए, जब आखिर में मीडिया ऑफिसर ने बीच में टोकते हुए कोच के परिवार में हुई मौत की खबर दी. मीडिया ऑफिसर ने फ्रेंच भाषा में घोषणा की कि धन्यवाद, लेकिन हम यह घोषणा कर रहे हैं कि कोच के पिता का निधन हो गया है. हालांकि यह साफ नहीं है कि डेसाब्रे को इस बारे में कब पता चला, लेकिन 49 साल के कोच मीडिया ऑफिसर की घोषणा से हैरान दिखे. इस दुखद घटना के बावजूद डेसाब्रे ने कांगो के शानदार सफर पर संयम के साथ बात की. उन्होंने कहा कि उन्हें निराशा से ज़्यादा गर्व है.
इंग्लैंड को दी टक्कर
इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबले की बात करें तो कांगो ने हैरी केन की टीम के नाक में दम रख दिया था. एक गोल से पीछने के बाद इंग्लैंड ने लगातार कांगो के गोल पोस्ट पर हमले शुरू कर दिए. इंग्लैंड ने तीन शॉट गोल पोस्ट पर टारगेट किए, लेकिन कांगो के गोलकीपर एम्पासी ने बेहतरीन बचाव किया और इंग्लैंड की हर कोशिश को नाकाम कर दिया. इस तरह से पहला हाफ कांगो ने 1-0 की बढ़त के साथ खत्म किया. कांगो ने दूसरे हाफ के शुरुआत में भी इंग्लैंड को बराबरी करने का कोई मौका दिया, मगर 75वें मिनट में हैरी केन ने हवा में उछलकर शानदार हेडर से गोल करके स्कोर बराबर कर दिया और फिर 86वें मिनट में हैरी केन ने दाईं तरफ घूमकर होल्ड-अप प्ले तकनीक से गेंद को गोल पोस्ट में पहुंचा दिया, जो इंग्लैंड के लिए विजयी गोल साबित हुआ.
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