मैक्सिको फीफा वर्ल्ड कप 2026 का सह मेजबान है. उसने 1 जुलाई को इक्वाडोर को हराकर 40 साल बाद नॉकआउट का कोई मैच जीता. उसे यह सफलता मिली अपने घरेलू मैदान एस्ताडियो एज्टेका में. यह वह स्टेडियम है जहां पर मैक्सिको विरोधी टीमों की आधी ताकत मैच शुरू होने से पहले ही छीन लेता है. इसे टीम के कोच और खिलाड़ी 12वां खिलाड़ी कहते हैं. यह वह मैदान है जहां पर दो फीफा वर्ल्ड कप हो चुके हैं. यहीं पर गेम ऑफ दी सेंचुरी और गोल ऑफ दी सेंचुरी जैसे करिश्मे हुए हैं.
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मैक्सिको का एस्ताडियो एज्टेका में कैसा है रिकॉर्ड
मैक्सिको ने एस्ताडियो एज्टेका में अभी तक 10 वर्ल्ड कप मैच खेले हैं. इनमें से एक भी नहीं गंवाया. 10 में से उसने आठ जीते हैं और दो ड्रॉ खेले हैं. उसने 2026 में तीन मैच यहां खेले और तीनों ही जीते. इससे पहले 1986 में उसने यहां चार मैच खेले थे और एक भी नहीं गंवाया. 1970 में जब उसने पहली बार वर्ल्ड कप की मेजबानी की तब भी अजेय रही. इस दौरान एक भी गोल नहीं खाया.
मैक्सिको ने एस्ताडियो एज्टेका में कुल 89 प्रतिस्पर्धी मैच खेले हैं और केवल दो ही हार मिली है. ये हार 2001 में कोस्टा रिका और 2013 में होंडुरास से मिली. मैक्सिको ने इस स्टेडियम में 69 मैच जीते हैं और 17 ड्रॉ कराए हैं. 2013 के बाद से लगातार 26 मैच में मैक्सिको एस्ताडियो एज्टेका में अजेय है. इसी स्टेडियम से मैक्सिकन वेव दुनिया की नज़रों में आई और खेलों में सपोर्ट का एक लोकप्रिय जरिया बनी.
एस्ताडियो एज्टेका में क्यों नहीं हारता मैक्सिको
मैक्सिको सिटी हाई एल्टीट्यूड यानी काफी ऊंचाई पर बसा शहर है. इसकी समुद्र तल से ऊंचाई 2000 मीटर है. ऐसे हालात में ढलने में समय लगता है. मैक्सिको टीम यहीं पर अपनी प्रैक्टिस करती है. इस वजह से जब वह यहां खेलती है तो उसके खिलाड़ियों को कोई समस्या नहीं होती. वे आसानी से सांस ले पाते हैं. वहीं विरोधी टीमों के खिलाड़ी जल्दी थक जाते हैं. साथ ही एक लाख से ऊपर क्षमता वाला यह स्टेडियम मैक्सिको के दर्शकों से भरा रहता है. वे जिस अंदाज में अपनी टीम को चीयर करते हैं उससे बाकी टीमों का जोश ठंडा हो जाता है.
एस्ताडियो एज्टेका के बनने की रोचक कहानी
ब्राजील के माराकाना स्टेडियम बनाने के बाद मैक्सिको ने ऐसा ही अपना एक मैदान बनाने का फैसला किया था. इसकी क्षमता एक लाख दर्शकों से ऊपर रखना तय हुआ. 1961 में इसका काम शुरू होना था. लेकिन मैक्सिको सिटी के पास इतनी बड़ी समतल और मजबूत जगह नहीं मिल रही थी. फिर जो जगह चुनी गई उसे समतल करने के लिए डायनामाइट की मदद ली गई. एक साल तक काम चला. इस दौरान 10 आर्किटेक्ट, 17 तकनीशियन, 35 और 800 मजदूरों ने रोजाना काम किया और स्टेडियम के लिए मैदान को तैयार कर दिया. इस तरह 1962 में यहां काम शुरू हुआ.
एस्ताडियो एज्टेका को बनाने के लिए 95 मिलियन पेस का बजट जारी किया गया था. लेकिन बनते-बनते बजट 200 मिलियन पेसो हो गया. पेसो मैक्सिको की मुद्रा का नाम है. इस स्टेडियम की क्षमता रही एक लाख सात हजार की. क्लब अमेरिका ने इसे अपना घर बनाया. उसकेऔर टोरिनो के बीच यहां पहला मैच खेला गया. इस मैदान में दो बार वर्ल्ड कप का पहला मैच और दो बार फाइनल हुआ है. एस्ताडियो एज्टेका इकलौता स्टेडियम है जिसने चार फीफा टूर्नामेंट की मेजबानी की है. यहां वर्ल्ड कप के साथ ही अंडर 20 वर्ल्ड कप, अंडर 17 वर्ल्ड कप और कंफेडरेशंस कप आयोजित हुआ है.
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