कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल में भारत के 10 मुक्केबाज पहुंचे. इसमें छह महिला मुक्केबाजों ने फाइनल में बेहतरीन प्रदर्शन किया, तो पुरुष मुक्केबाज भी कम नहीं रहे. पहला फाइनल खेलने वाले जादूमनी फाइनल में हार गए और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. इसके बाद सचिन ने भी शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल के अंतिम 10 सेकंड में जोरदार पंच बरसाकर मेंस कैटेगरी का पहला गोल्ड मेडल भारत को दिलाया. सचिन (60 किग्रा) के बाद अंकुश (80 किग्रा) ने भी गोल्ड जीता और इसके बाद आखिरी यानी भारत के दसवें मुक्केबाज नरेंदर लेकिन गोल्ड नहीं जीत सके और उनको सिल्वर से संतोष करना पड़ा.
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भारत ने बॉक्सिंग में 10 मेडल जीतकर किया कमाल
भारत के मेंस और वीमेंस मुक्केबाजों को मिलाकर कुल 10 मुक्केबाजों ने फाइनल में जगह बनाई थी, जिसमें भारत ने सात गोल्ड मेडल और दो सिल्वर मेडल जीते. भारत के लिए महिलाओं में लवलीना और पुरुषों में सिर्फ जादूमनी ही फाइनल हारे. भारत ने कुल 10 मेडल अपने नाम किए. इससे पहले 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय मुक्केबाजों ने नौ मेडल जीते थे. अब पहली बार भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग स्पर्धा में 10 मेडल जीतने का कारनामा किया है.
सचिन ने जड़ा गोल्डन पंच
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के 60 किग्रा भार वर्ग में सचिन सिवाच ने सबसे पहले राउंड ऑफ-32 में कनाडा के केओमा अल-अहमदिया को हराया. उसके बाद राउंड ऑफ-16 में इंग्लैंड के विलियम हेविट को 4-1 से मात दी. जबकि क्वार्टर फाइनल में सचिन ने बोत्सवाना के ट्रेजर मोरेमी को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में कदम रखा और इसके साथ ही उनका कांस्य पदक पक्का हो गया था.
सचिन ने अंतिम 10 सेकंड में जीती बाजी
सचिन का जीत का क्रम सेमीफाइनल में भी जारी रहा और उन्होंने वेल्स के ओवेन हैरिस-एलन को 5-0 से हराकर फाइनल में जगह बनाई और सिल्वर मेडल पक्का कर लिया. सचिन ने पूरे टूर्नामेंट में धैर्य के साथ मुक्केबाजी करते हुए अपने फुटवर्क का बेजोड़ नमूना पेश किया. इसके बाद उन्होंने फाइनल में नामीबिया के ट्राईगेन मॉर्निंग नदेवेलो को स्प्लिट फैसले में 3-2 से हराकर अपने करियर के पहले गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया. सचिन ने अंतिम 10 सेकंड में जमकर मुक्के बरसाए और यहीं से उनकी शानदार वापसी संभव हो सकी.
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अंकुश ने भी बॉक्सिंग की रिंग में जीता गोल्ड मेडल
80 किलोग्राम भार वर्ग में अंकुश ने भी कमाल के पंच जड़े. अंकुश ने राउंड ऑफ-16 में एंटीगुआ और बारबुडा के ज़लान जान को हराया. उसके बाद क्वार्टर फाइनल में सेशेल्स के जेड माइकॉक को 5-0 से और सेमीफाइनल में कनाडा के जोशुआ ओफ़ोरी को 5-0 से हराकर फाइनल में कदम रखा. अंकुश की सबसे बड़ी ताकत उनकी काउंटर-अटैक तकनीक और 'राइट स्ट्रेट' पंच रहे.
अंकुश ने इन्हीं पंचों का नज़ारा फाइनल में भी पेश किया और 4-1 से जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया. अंकुश ने फाइनल में इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को हराकर उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करने पर मजबूर कर दिया.
नरेंद्र को मिली फाइनल में हार
नरेंद्र ने भी अपने करियर का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल पक्का किया. उन्होंने हैवीवेट कैटेगरी में अपनी पावर पंचिंग से शानदार दबदबा बनाए रखा. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने समोआ के लाउतुलू टोगामऊ को पहले ही राउंड में ढेर कर दिया. इसके बाद सेमीफाइनल में टोंगा के केडी अमुवा को हराकर फाइनल में जगह बनाई और सिल्वर मेडल पक्का कर लिया.
92+ किलोग्राम के फाइनल मुकाबले में नरेंद्र को पहले राउंड में बढ़त नहीं मिल सकी और उसके बाद वह वापसी नहीं कर सके. अंततः उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. नरेंद्र को इंग्लैंड के थॉमस से 0-5 से हार का सामना करना पड़ा. इस तरह भारत के 10 में से तीन मुक्केबाज फाइनल में हार गए, जबकि सात ने जीत दर्ज कर देश को गोल्ड मेडल दिलाया.
भारतीय बॉक्सर द्वारा जीते गए मेडल की तालिका :-
| मुक्केबाज (Boxer) | भार वर्ग (Weight Category) | वर्ग (Category) | पदक (Medal) |
|---|---|---|---|
| साक्षी चौधरी | 51 किलोग्राम (फ्लाईवेट) | महिला | स्वर्ण पदक (Gold) |
| प्रीति पवार | 54 किलोग्राम (बेंटमवेट) | महिला | स्वर्ण पदक (Gold) |
| जैसमीन लैंबोरिया | 57 किलोग्राम (फेदरवेट) | महिला | स्वर्ण पदक (Gold) |
| प्रिया घांघस | 60 किलोग्राम (लाइटवेट) | महिला | स्वर्ण पदक (Gold) |
| सचिन सिवाच | 60 किलोग्राम (लाइटवेट) | पुरुष | स्वर्ण पदक (Gold) |
| अरुंधति चौधरी | 70 किलोग्राम (लाइट मिडलवेट) | महिला | स्वर्ण पदक (Gold) |
| अंकुश पंघाल | 80 किलोग्राम (लाइट हेवीवेट) | पुरुष | स्वर्ण पदक (Gold) |
| जादूमनी सिंह | 55 किलोग्राम (फ्लाईवेट) | पुरुष | रजत पदक (Silver) |
| लवलिना बोरगोहेन | 75 किलोग्राम (मिडलवेट) | महिला | रजत पदक (Silver) |
| नरेंद्र बेरवाल | +90 किलोग्राम (सुपर हैवीवेट) | पुरुष | रजत पदक (Silver) |
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