एशियन गेम्स 2026 के आयोजन में अब पूरा एक महीना भी नहीं बचा और इस अहम समय में भारतीय टीम के सेलेक्शन को लेकर बवाल मचा हुआ है. जिम्नास्टिक्स-टेनिस से लेकर कराते-कुराश तक सेलेक्शन पर सवाल उठ रहे हैं. बीते दिनों भारतीय टेनिस दिग्गज रोहन बोपन्ना ने टेनिस टीम में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए थे उनका कहना है कि जिन प्लेयर्स ने इंटरनेशनल प्रदर्शन के दम पर जगह बनाई थी, उन्हें जापान में होने वाले एशियन गेम्स की टीम में जगह दी जानी चाहिए थी. खेल मंत्रालय के उस नियम के चलते क्वालिफाई करने वाले पांच खिलाड़ी प्रभावित हुए. जिसमें एशिया के सिर्फ टॉप आठ प्लेयर्स को ही हिस्सा लेने की मंजूरी दी गई.
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टेनिस ही नहीं,जिम्नास्टिक, कुराश और कराते में सेलेक्शन के लिए अपनाए गए मानदंडों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.जिम्नास्टिक में प्रणति नायक अकेली ऐसी एथलीट हैं जिन्हें मंज़ूरी मिली है. एशियाई जिम्नास्टिक संघ (AGU) से नॉमिनेटिव (नाम के आधार पर) कोटा हासिल करने वाले अन्य जिम्नास्टों पर विचार क्यों नहीं किया गया, इसका कोई स्पष्टीकरण नहीं है.
इन जिम्नास्ट को किया गया नजरअंदाज
2026 एशियाई चैंपियनशिप के बाद निश्का अग्रवाल ने नॉमिनेटिव ऑल-अराउंड क्वालिफिकेशन हासिल किया, जबकि प्रणति और प्रतिष्ठा सामंत ने वॉल्ट स्पेशलिस्ट के तौर पर नॉमिनेटिव क्वालिफिकेशन हासिल किया. 2025 एशियाई मीट से भी प्रणति ने ब्रॉन्ज मेडल जीता, जबकि प्रतिष्ठा चौथे स्थान पर रहीं. 20 जून के बाद हुई 2026 चैंपियनशिप मंत्रालय की क्वालिफिकेशन विंडो के दायरे में नहीं आती थी, लेकिन अगर 2025 एशियाई इवेंट को मानदंड माना गया, तो प्रतिष्ठा का भी चयन होना चाहिए था. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतिष्ठा का जिम्नास्टिक में भारत का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा.वह सातवें स्थान पर रहीं और फाइनल में पहुंचने वाली एकमात्र भारतीय जिम्नास्ट बनीं. प्रणति ने वहां चोटिल हालत में हिस्सा लिया था और फाइनल में जगह नहीं बना पाई थीं. अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एशियन गेम के लिए यह ढांचा एक समान रूप से लागू किया गया था. टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार फेडरेशन के सोर्स का कहना है कि अगर ऐसा है तो उस आधार पर प्रतिष्ठा और निष्का के साथ-साथ पुरुष जिमनास्ट तपन मोहंती और योगेश्वर सिंह पर भी विचार किया जाना चाहिए था.
छह सदस्यों वाली टीम को मंजूरी
कुराश भी सवाल खड़ा करता है. भारत हांगझू गेम्स से बिना किसी मेडल के लौटा था, फिर भी अधिकारियों के शुरुआती फैसले के बावजूद कि टीम नहीं भेजी जाएगी, छह सदस्यों वाली टीम को मंजूरी दे दी गई. चयन का कोई पैमाना न बताए जाने के कारण यह प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है. कराते का मामला भी उतना ही उलझा हुआ है.सोर्स के अनुसार SAI ने एक कमेटी बनाई थी और शुरू में टीम न भेजने का फ़ैसला किया था. फिर भी अलीशा चौधरी और चेतन भट्ट के नामों की घोषणा की गई. IOA ने बिना इजाज़त खिलाड़ियों को चुनने और दूसरे नियमों के उल्लंघन के कारण कराते इंडिया ऑर्गनाइज़ेशन (KIO) को NSF के तौर पर काम करने से रोक दिया था.
घोड़े के मालिक के तौर पर मान्यता न मिलने की शिकायत
ड्रेसेज राइडर श्रुति वोरा ने IOA की अध्यक्ष पीटी उषा को पत्र लिखकर घोड़े के मालिक के तौर पर ज़रूरी मान्यता दिलाने में तुरंत दखल देने की मांग की है और इस चूक के लिए इक्वेस्ट्रियन फेडरेशन ऑफ इंडिया (EFI) को ज़िम्मेदार ठहराया है.
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