FIFA WC: 16 साल बाद स्पेन बना चैंपियन, स्पेनिश फुटबॉल ने मेसी और अर्जेंटीना का दम घोंट दिया

फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया. पूरे मुकाबले में स्पेन ने शानदार डिफेंस, बेहतरीन बॉल पजेशन और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया.

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स्पेन बनीं चैंपियन

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स्पेन ने अर्जेंटीना को 1-0 से हराकर जीता वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल

एक्स्ट्रा टाइम में फेरान टोरेस ने किया मैच का इकलौता गोल

FIFA WC: फीफा वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में लियोनेल मेसी और अर्जेंटीना का दम घोंटकर स्पेन चैंपियन बनी. स्पेन ने पिछली बार साल 2010 के फाइनल को 1-0 से जीता था. इसके बाद अब अर्जेंटीना उनका शिकार बनी. स्पेन के लिए पूरे वर्ल्ड कप में पाउ कुबार्सी, एमेरिक लापोर्टे, पेड्रो पोर्रो, मार्क कुकुरेला जैसे डिफेंडर्स ने ऐसी दीवार बनाई, जिसे बेल्जियम के अलावा बाकी कोई भी टीम भेद नहीं सकी और जो भी स्पेन के रास्ते में आया, उसे घर जाना पड़ा. न्यूयॉर्क के मेटलाइफ स्टेडियम में स्पेन के युवा खिलाड़ियों ने ऐसा खेल दिखाया कि मेसी और उनकी टीम के खिलाड़ी तो बस दर्शक की तरह मैदान में खड़े नजर आ रहे थे, जबकि अर्जेंटीना के गोलकीपर मार्टिनेज ही सेव कर रहे थे. जिसका नतीजा यह रहा कि स्पेन ने 20 शॉट्स दागे और 1-0 से मैच अपने नाम किया, जबकि अर्जेंटीना की टीम एक भी शॉट ऑन टारगेट नहीं दाग सकी. जिसके चलते मेसी और उनकी टीम का लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप खिताब जीतने का सपना धरा रह गया.

स्पेन ने शुरुआत से ही बनाया दबदबा

स्पेन की युवा खिलाड़ियों से सजी टीम जैसे ही मैदान में उतरी, वह उसी तरह संगठित नजर आई, जैसी वह हर मैच में नजर आ रही थी. इसके विपरीत अर्जेंटीना ने लियोनेल मेसी को सेंटर में रखकर किक-ऑफ किया. स्पेन की टीम के खिलाड़ियों ने गेंद पर कब्जा जमाना शुरू किया और अर्जेंटीना के खिलाड़ी गेंद को तरसते नजर आने लगे. यह ठीक उसी तरह था, जैसे सेमीफाइनल मैच में फ्रांस गेंद खेलने को तरस गया था. अर्जेंटीना का भी वही हाल हुआ और पहले हाफ में स्पेन ने दबाव बनाना शुरू कर दिया. पहले हाफ में स्पेन ने 64.6 प्रतिशत गेंद अपने पास रखी और दो शॉट्स ऑन टारगेट मारे, लेकिन उसे गोल नहीं मिला, जबकि मेसी सिर्फ टहलते नजर आए.


अर्जेंटीना का दम घोंट दिया

दूसरे हाफ में सभी को उम्मीद थी कि जादू बिखेरने वाली अर्जेंटीना अब स्पेन के डिफेंस में सेंध लगाएगी. लेकिन इसके उलट, जब उनके खिलाड़ियों को स्पेन से गेंद ही खेलने के लिए नहीं मिल रही थी तो खिलाड़ियों का मानो मैदान में दम घुटने लगा. अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने कुछ अतिरिक्त करने के प्रयास में फाउल करने शुरू किए और इसका आलम यह रहा कि इंजरी टाइम (90+2 मिनट) में मिडफील्डर एनज़ो फर्नांडीज ने स्पेन के डिफेंडर पाउ कुबार्सी के खिलाफ एक बड़ा फाउल किया. इसके चलते उन्हें दूसरा येलो कार्ड मिला, जो रेड कार्ड में बदल गया और फर्नांडीज को बाहर होना पड़ा. उनकी टीम को 10 खिलाड़ियों के साथ आगे का गेम खेलना पड़ा.

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एक्स्ट्रा टाइम में चला फेरान टोरेस का जादू

10 खिलाड़ियों वाली अर्जेंटीना 90 मिनट और इंजरी टाइम तक एक भी बार फॉर्मेशन बनाकर स्पेन के गोल पोस्ट के पास नहीं जा सकी. जबकि लगातार स्पेन अटैक करती रही, मगर उसे गोल नहीं मिला तो मैच एक्स्ट्रा टाइम में चला गया. एक्स्ट्रा टाइम में फिर स्पेन के लिए खेलने वाले फेरान टोरेस का जादू चला और उन्होंने अर्जेंटीना की दीवार कहे जाने वाले गोलकीपर मार्टिनेज को भेदकर गोल कर दिया. इस गोल के साथ ही 105 मिनट तक मैच में खामोश रहने वाले फैंस खुशी से पागल हो उठे और मैदान पर अर्जेंटीना के फैंस को अपनी हार नजर आने लगी थी. स्पेन के पहले गोल के बाद अर्जेंटीना ने एक शॉट लिया, लेकिन उससे कुछ खास असर नहीं पड़ा और जैसे ही फाइनल समाप्त होने की सीटी बजी, उसके साथ ही न्यूयॉर्क से लेकर मैड्रिड तक पूरी दुनिया में जश्न शुरू हो गया और स्पेन ने दूसरी बार वर्ल्ड कप खिताब पर कब्जा जमाया. इस खिताबी जीत के साथ स्पेन के युवा स्टार लामिन यमाल के युग का आगाज हुआ, तो शायद अब मेसी अर्जेंटीना के लिए कभी वर्ल्ड कप खेलते हुए नजर नहीं आए.

स्पेन ने मेसी को कैसे रोका?

बहुत-सी टीमें लियोनेल मेसी को रोकने के लिए उनके पीछे एक या दो खिलाड़ी लगा देती हैं. लेकिन स्पेन ने कुछ अलग ही चाल चली. उनके मैनेजर लुइस डे ला फ़ुएंते ने 'ज़ोनल और पोजीशनल ट्रैप' का इस्तेमाल किया. इसके तहत जैसे ही मेसी को गेंद मिलती, तो स्पेन के सेंटर-बैक पाउ कुबार्सी और मिडफील्डर रॉड्री उनके चारों तरफ एक सुरक्षा घेरा बना लेते. इतना ही नहीं, स्पेन की टीम ने मेसी की सप्लाई चेन (जूलियन अल्वारेज़ या एलेक्सिस मैक एलिस्टर के लिए थ्रू-बॉल्स) को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. इसका नतीजा यह रहा कि मेसी जैसा महान खिलाड़ी पूरे मैच में सिर्फ एक शॉट ही ले सका और उन्हें शायद अपने वर्ल्ड कप करियर के आखिरी मैच में हार का सामना करना पड़ा. स्पेन के आगे अर्जेंटीना के सभी खिलाड़ियों का दम घुट गया.

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