भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से केसरिया कर दिया गया है, जिसे लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. हॉकी इंडिया के प्रेसिडेंट दिलीप टिर्की ने दावा किया है कि नेशनल टीम की जर्सी का रंग बदलने के बारे में फेडरेशन के पदाधिकारियों को इसे लॉन्च करने से करीब दो घंटे पहले ही बताया गया था. उन्होंने नीले रंग से केसरिया रंग में बदलने के फ़ैसले की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सोमवार को हॉकी इंडिया के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर आरके श्रीवास्तव को भेजे एक ईमेल में टिर्की ने लिखा कि 27 जुलाई 2026 को सुबह लगभग 8:47 बजे मुझे कोऑर्डिनेशन ग्रुप पर आपसे एक वॉट्सऐप मैसेज मिला, जिसमें एक वीडियो फ़ाइल थी और बताया गया था कि हॉकी इंडिया की मुख्य जर्सी सुबह 11:00 बजे डिजिटल मीडिया पर जारी की जाएगी.
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टिर्की का यह चार दिनों में दूसरा ईमेल था, जिसमें उन्होंने भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने से जुड़े फ़ैसले लेने की प्रक्रिया को 'अपारदर्शी' (साफ़ न होने वाला) बताते हुए स्पष्टीकरण मांगा था. यह विवाद तब शुरू हुआ जब हॉकी इंडिया ने अगले सप्ताह होने वाले वर्ल्ड कप के लिए पुरुष और महिला टीमों की केसरिया जर्सी का अनावरण किया.इन जर्सियों ने उस पारंपरिक नीली किट की जगह ली है जिसे भारत ने 1928 में ओलिंपिक में अपनी शुरुआत के बाद से ज़्यादातर मौकों पर पहना है.
दिलीप टिर्की के सवाल
इस कदम की पूर्व खिलाड़ियों ने आलोचना की और यह जल्द ही राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया. एग्जीक्यूटिव बोर्ड को भेजे गए एक पुराने ईमेल में टिर्की ने कहा था कि हॉकी इंडिया के अध्यक्ष होने के बावजूद इस बदलाव को अंतिम रूप देने से पहले उनसे कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया था. सोमवार को भेजे ईमेल में टिर्की ने कहा कि हॉकी इंडिया को एक गैर-राजनीतिक खेल संस्था बने रहना चाहिए.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या फेडरेशन ने इस कदम के असर पर ठीक से विचार किया.उन्होंने जानना चाहा कि क्या खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ने वाले संभावित असर का आंकलन किया गया है.क्या फैसले में मीडिया की ज़्यादा जांच-पड़ताल और सार्वजनिक बहस की संभावना को ध्यान में रखा गया है और क्या हॉकी इंडिया के मुख्य स्पॉन्सर ओडिशा सरकार से पहले ही सलाह-मशविरा किया गया था. टिर्की ने इस बारे में भी सफाई मांगी कि क्या खिलाड़ियों से लिखित फीडबैक लिया गया था और क्या घोषणा से पहले कोई चिंता जताई गई थी.
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