महान गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग केसरिया किये जाने को लेकर विवाद को खारिज करते हुए टीम से बाहर की आवाजों पर ध्यान नहीं देते हुए पूरी ऊर्जा 50 साल बाद विश्व कप में पदक जीतने पर फोकस करने के लिये कहा है. टोक्यो ओलिंपिक 2020 में 41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम के ओलिंपिक ब्रॉन्ज जीतने और 2024 में पेरिस में उस प्रदर्शन को दोहराने में अहम भूमिका निभाने वाले इस दिग्गज ने जर्सी विवाद के बारे में पूछे जाने पर कहा कि उन्हें पहले समझ ही नहीं आया कि क्या मसला है क्योंकि 2014 और 2018 वर्ल्ड कप में भी जर्सी का रंग बदला था.भाषा के अनुसार श्रीजेश ने कहा कि उनकी एक ट्रेनिंग किट का भी रंग ऑरेंज है.इस बार वर्ल्ड कप से पहले इतनी चर्चा क्यों हो रही है.केसरिया रंग की वजह से या जर्सी का रंग बदलने की वजह से.
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नेदरलैंड्स और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे वर्ल्ड कप से पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग बदलकर नीले से केसरिया कर दिया गया है.इस पर पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा , धनराज पिल्लै, अजित पाल सिंह, वासुदेवन भास्करन और परगट सिंह समेत कई पूर्व खिलाड़ियों ने सवाल उठाये थे.
समझ से परे हैं वजह
पेरिस ओलिंपिक के बाद हॉकी से संन्यास लेने वाले श्रीजेश ने कहा कि अगर विवाद रंग बदलने की वजह से है तो 2014 और 2018 में भी होना चाहिये था जब उन्होंने पीली और हल्के नीले रंग की जर्सी पहनी थी.उन्होंने कहा कि जर्सी का रंग बदलने से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह कहना कि नीली टर्फ पर खेलने में दिक्कत होती है, समझ से परे है क्योंकि इतने साल से नीली जर्सी में ही तो खेलते आये हैं. भारत के लिये 339 मैच खेल चुके और पिछले साल चेन्नई में जूनियर हॉकी विश्व कप में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के कोच रहे श्रीजेश ने कहा कि उन्हें जर्सी के रंग बदलने से कोई दिक्कत नहीं है लेकिन उसका जो कारण बताया जा रहा है , वह समझ से परे है. अगर खेलने में दिक्कत की वजह से रंग बदला जा रहा है तो फिर दोबारा नीली जर्सी कभी नहीं पहननी चाहिए.
एक सा रंग होने से देखने में मुश्किल
उनका कहना है कि यह सही है कि एक सा रंग होने से देखने में थोड़ा मुश्किल तो होता है लेकिन 2012 लंदन ओलिंपिक में नीली टर्फ आने के बाद से अब तक 14 साल में दो ही बार जर्सी का रंग बदला है.बाकी टूर्नामेंट में नीली जर्सी में ही खेले हैं जिसमें पेरिस ओलिंपिक, टोक्यो ओलिंपिक शामिल है.उन्होंने यह भी कहा कि अगर खिलाड़ियों की मर्जी से यह फैसला किया गया है तो विवाद होना ही नहीं चाहिये था. उन्होंने कहा कि मीडिया में उन्होंने जो कुछ भी देखा है, उसमें यही बोला गया है कि खिलाड़ियों की सहमति से रंग बदला गया है. हॉकी इंडिया ने एफआईएच से केसरिया रंग की जर्सी के लिये अनुमति ली होगी.अब चूंकि आरेंज हालैंड की जर्सी का भी रंग है तो जब उससे मैच होगा तो उन्हें अपनी दूसरी सफेद जर्सी पहनकर खेल सकते हैं.
पहले बदला जाना चाहिए था रंग
मसले के राजनीतिक रंग लेने के बारे में उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि राजनीति को खेलों से दूर रखना चाहिये.खिलाड़ी सबसे अहम है और अगर उन्हें दिक्कत नहीं है तो बाहर बैठे लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिये. श्रीजेश ने हालांकि यह जरूर कहा कि अगर रंग बदला जाना था तो यह पहले हो जाना चाहिये था कि खिलाड़ियों को नयी जर्सी की आदत हो सके. उनका मानना है कि खिलाड़ियों को इस जर्सी को पहनकर थोड़ा खेलने का भी मौका देना चाहिये था. अभी तक उन्हें नीली जर्सी में खेलने की आदत है.अगर वह मैदान में खेल रहे है और सामने हरमनप्रीत है तो वह उन्हें नीली जर्सी में ही तलाशेंगे. अगर जर्सी का रंग बदलना था तो थोड़ा जल्दी करना चाहिये था. श्रीजेश ने यह भी कहा कि उन्हें यकीन है कि विश्व कप से पहले मैदान से बाहर की आवाजों का टीम पर कोई असर नहीं होगा.
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