भारत ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में जैवलिन थ्रो के एक ही इवेंट में दो मेडल जीत लिए हैं.नीरज चोपड़ा और यशवीर सिंह ने देर रात सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीतकर इतिहास रच दिया.नीरज ने 85.83 मीटर का थ्रो किया, जबकि यशवीर ने 85.41 मीटर की दूरी तय की. यश ने आखिरी थ्रो में बाजी मारी. आखिरी थ्रो तक तो ऐसा नहीं लग रहा था कि वह मेडल की रेस में भी हैं. उनका मुकाबला डॉव स्मिट और पीटर्स से था. उनका तो क्वालिफाई करना भी मुश्किल लग रहा था. उन्होंने अपने पहले और चौथे थ्रो में फाउल भी किया और उनका 81.33 मीटर का सकोर भी ऐसा स्कोर भी ऐसा नहीं लग रहा था कि उससे काम बन पाएगा.
ADVERTISEMENT
श्रीलंका के पथिरागे ने जीता गोल्ड तो भारत के हाथ आए जैवलीन थ्रो में दो मेडल
इसके बाद नीरज चोपड़ा के जोश बढ़ाने के बाद यश ने पूरा जोर लगाया और जबरदस्त दौड़ के साथ थ्रो किया और ब्रॉन्ज अपने नाम करने वाला प्रदर्शन किया. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा भी कि एक बार उन्होंने लगभग 81.33 मीटर दूर थ्रो किया था. उन्होंने नतीजे देखे तो ब्रॉन्ज मेडल के लिए जरूरी दूरी लगभग 82 मीटर थी.तब उन्होंने सोचा कि वह पहले भी कॉम्पिटिशन में 82 मीटर से ज़्यादा दूर थ्रो कर चुके हैं, तो वह यह फिर से कर सकते हैं लेकिन पांचवें थ्रो तक ऐसा हो नहीं पा रहा था.आखिरी थ्रो से पहले उन्होंने बस यही सोचा कि जो होगा, देखा जाएगा.
बांस की लकड़ियों से सफर की शुरुआत
यश का नीरज के साथ पोडियम पर खड़े होने का सफर बांस की लकड़ियों से शुरू हुआ था.राजस्थान के जयपुर के रहने वाले यशवीर सिंह का शुरुआत में झुकाव बास्केटबॉल की तरफ था, लेकिन स्कूल के दिनों में उन्होंने जैवलिन थ्रो को अपना लिया.उन्होंने पहले बांस की लकड़ियों से अपनी स्किल्स को बेहतर किया और बाद में प्रोफेशनल इक्विपमेंट के साथ ट्रेनिंग शुरू की.यश ने 2022 में एक इंटरव्यू में कहा था कि शुरुआत में वह सिर्फ फिट रहने के लिए बास्केटबॉल खेलते थे और फिर उन्होंने बांस के जैवलिन से शुरुआत की. जब उन्होंने तकनीक सीख ली, तो वह स्टैंडर्ड जैवलिन पर आ गए. उन्होंने अपने पिता राय सिंह की देखरेख में तेज़ी से तरक्की की. उनके पिता खुद नेशनल लेवल के जैवलिन थ्रोअर रह चुके हैं. उनके पिता ने यह पक्का किया कि यश जमीन से जुड़े रहें और इस आसान मंत्र को मानें कि कड़ी मेहनत का नतीजा हमेशा अच्छा ही होता है. राय का कहना है कि उनकी ट्रेनिंग में कुछ भी खास नहीं है.वह ट्रेनिंग में बहुत समय बिताते हैं और सही खाना खाते हैं.जब वह एथलीट थे तो उन्होंने बहुत गलतियां की थीं और वह बस यह पक्का करते हैं कि उनका बेटा उन्हीं गलतियों को न दोहराए.
यश का करियर
यश ने सबसे पहले इंडियन U20 फेडरेशन कप में नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड तोड़कर सबका ध्यान खींचा और 2022 में वे 80 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले चुनिंदा भारतीय थ्रोअर्स में से एक बन गए.तब से राजस्थान के इस एथलीट ने लगातार अच्छा प्रदर्शन करते हुए सीनियर लेवल पर अपनी जगह बनाई है. उन्होंने साउथ कोरिया के गुमी में हुई 2025 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहां उन्होंने 82.57 मीटर का अपना उस समय का बेस्ट थ्रो करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया. इन प्रदर्शनों की बदौलत उन्हें वर्ल्ड रैंकिंग कोटे के जरिए टोक्यो में होने वाली 2025 वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी जगह मिली, जिससे उन्हें ग्लोबल स्टेज पर मुकाबला करने का एक और मौका मिला.
ADVERTISEMENT











