भारत की स्टार वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने अब हर एक गेम्स में मेडल अपने नाम कर लिया है. कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक गेम्स में अपना लोहा मनवा चुकी मीराबाई ने आखिरकार एशियन गेम्स में जीत का तिरंगा लहराया. साल 2014 से एशियन गेम्स में मेडल जीतने का सपना लेकर डेब्यू करने वाली मीराबाई ने 12 साल बाद इसे पूरा किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया. मीराबाई के नाम कॉमनवेल्थ गेम्स में जहां तीन गोल्ड मेडल हैं. ओलंपिक में एक सिल्वर मेडल है, तो अब एशियन गेम्स में भी उन्होंने खाता खोल दिया और उसके बाद कहा कि मेरा बस एक ही लक्ष्य था कि किसी भी तरह इस मौके को गंवाना नहीं है और एक मेडल देश को जरूर लेकर देना है.
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मीराबाई का सपना हुआ साकार
इस तरह साल 2014 से लेकर साल 2026 तक तीन बार एशियन गेम्स में मेडल से चूकने वाली मीराबाई ने इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के साथ शानदार आगाज किया था. मीराबाई ने खुद के प्रदर्शन को बनाए रखा और जापान में होने वाले एशियन गेम्स में आखिरकार उन्होंने करियर का पहला मेडल जीत लिया. मीराबाई चानू ने एशियन गेम्स में मेडल जीतने के बाद स्पोर्ट्स तक से बातचीत में कहा,
मुझे इस बार पूरा आत्मविश्वास था क्योंकि कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन गेम्स के बीच टाइमिंग काफी कम थी. मुझे बस खुद को फिट रखना था और अपनी ट्रेनिंग नहीं छोड़नी थी. मैंने लगातार काम जारी रखा और हर हाल में देश के लिए सिल्वर, गोल्ड या कांस्य पदक देश के लिए जीतना चाहती थी. कई बार एशियन गेम्स मेडल के करीब आकर नहीं जीत सकी, लेकिन इस बार पूरा भरोसा था.
ओलंपिक में गोल्ड जीतने पर फोकस
एशियन गेम्स 2026 में धमाल मचाने वाली मीराबाई चानू अब साल 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक गेम्स पर फोकस करना चाहेंगी. जिसमें वह अपने मेडल का रंग सिल्वर से बदलकर गोल्ड में तब्दील करने के इरादे से अमेरिका के लिए उड़ान भरेंगी. इसके लिए मीराबाई के पास अभी एक साल से अधिक का समय है, तो वह अपना लंबा ट्रेनिंग प्लान बनाकर ओलंपिक के टाइम पीक फॉर्म में रहना चाहेंगी.




