शर्मिला धनकड़ कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स में गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं.उन्होंने महिलाओं के शॉट-पुट F57 फाइनल में ऐतिहासिक जीत दर्ज की.उन्हें यह ऐतहासिक सफलता काफी दर्द झेलने के बाद मिली.हरियाणा के महेंद्रगढ़ ज़िले में गरीबी में पली-बढ़ीं और अपनी पहली शादी में घरेलू हिंसा का सामना करने से लेकर अपने खेल के सपने को पूरा करने के लिए घर बेचने तक 40 साल की शर्मिला ने मुश्किलों को अपनी कामयाबी की सीढ़ी बनाया है.बीती रात उन्होंने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर के अपने सीजन के बेस्ट थ्रो के साथ शानदार प्रदर्शन किया और गेम्स में पैरा-एथलेटिक्स मेडल के लिए देश के 20 साल के इंतज़ार को खत्म किया.CWG में पैरा-एथलेटिक्स का पिछला मेडल 2006 में पुरुषों के सीटेड डिस्कस थ्रो इवेंट में रंजीत कुमार जयसीलन ने जीता था.
करीब चार घंटे पीटा गया
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार शर्मिला ने बताया कि उनकी मां देख नहीं सकती.पिता किसान थे और उनके पास गुजारा करने के लिए बहुत कम साधन थे. 19 साल की उम्र में शादी के बाद उन्हें सालों तक घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा. जिसके बाद वह अपनी दो बेटियों अंजू (अब 15 साल) और लक्ष्मी (13 साल) के साथ अपने माता-पिता के घर लौट आईं.उन्होंने उस समय को याद करते हुए बताया कि एक रात उनके पहले पति ने रात 11 बजे से सुबह 3 बजे तक उन्हें पीटा था और घर से बाहर निकाल दिया. जिसके बाद वह कभी वापस नहीं गई.
दूसरी शादी के बाद उनकी ज़िंदगी बदल गई. उनके पति अजीत सिंह ने उन्हें पैरा स्पोर्ट्स के बारे में बताया और कोच टेक चंद और देवेंद्र के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग लेने के लिए प्रोत्साहित किया. 2021 में उन्होंने पैरा नेशनल चैंपियनशिप में डेब्यू किया और नेशनल रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता.अगले साल बर्मिंघम CWG में वह चौथे स्थान पर रहीं और बहुत कम अंतर से मेडल जीतने से चूक गईं. 2023 में एशियन पैरा गेम्स में भी वह चौथे स्थान पर रहीं. इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद आर्थिक तंगी बनी रही.अपने करियर के खर्चों को पूरा करने के लिए परिवार ने 2023 में रेवाड़ी में अपना घर बेच दिया और किराए के मकान में रहने लगे. उन्होंने कहा कि खेल ने उन्हें एक नई ज़िंदगी दी है. वह यह मेडल जीतने के बाद फिर से एक घर खरीदना चाहती हैं.




