चेजमास्टर विराट कोहली ने खोला अपने करियर का सबसे बड़ा राज, गौतम गंभीर के सामने सब कह दिया

विराट कोहली और गौतम गंभीर ने एक दूसरे संग बात की और इस दौरान कोहली ने कहा कि अगर चेज के दौरान उन्हें कुछ भी करना पड़ा तो वो करेंगे. इसमें चाहे उन्हें आक्रामक क्रिकेट और ज्यादा दौड़ना क्यों न पड़े.

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Neeraj Singh

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ट्रेनिंग सेशन के दौरान विराट कोहली और गौतम गंभीर

ट्रेनिंग सेशन के दौरान विराट कोहली और गौतम गंभीर

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विराट कोहली ने कहा कि अगर आप जीतना चाहते हो तभी आप चेज कर पाओगेविराट ने कहा कि अगर उन्हें चेज के लिए आक्रामक क्रिकेट खेलना पड़े तो वो खेलेंगे

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान विराट कोहली को वर्ल्ड क्रिकेट का सबसे बड़ा चेज मास्टर माना जाता है. विराट कोहली ने हर बार भारत को वो मैच जिताए हैं जिसमें टीम चेज कर रही होती है. वर्तमान में विराट से हर युवा ये सीखना चाहता है. लेकिन चेज को लेकर विराट का माइंडसेट क्या है और वो इसको लेकर क्या सोचते हैं. इसपर उन्होंने अपनी राय टीम इंडिया के हेड कोच गौतम गंभीर के साथ शेयर की है. विराट कोहली और गौतम गंभीर का इंटरव्यू बीसीसीआई ने ऑफिशियल तौर पर डाला है जिसमें फैंस के सामने दोनों ने कहा कि अब मसाला पूरा खत्म हो चुका है. इस इंटरव्यू में दोनों ने एक दूसरे के करियर को लेकर सवाल किए लेकिन विराट ने इस दौरान चेज को लेकर युवा क्रिकेटरों को अहम टिप्स दिए.

 

मेरे लिए जीत ही मायने रखती है: कोहली


विराट कोहली ने चेज को लेकर कहा कि, 

 

मेरे पास कई युवा खिलाड़ी आते हैं और पूछते हैं कि आप जब चेज करते हो तो आप कैसे कैलकुलेशन करते हो? मैं उन्हें हमेशा यही कहता हूं कि एक चेज में आपको क्लैरिटी चाहिए और ये पता होना चाहिए कि आपको क्या करना है. सबकुछ साफ होना चाहिए आपके सामने. अगर तुम्हारा मोटिवेशन जीत है तो तुम किसी भी तरह उस तक पहुंच जाओगे. तुम्हें उस दौरान खुद को कहना होगा कि मैं इसी तरह खेलता हूं और अगर तुम्हें उससे नतीजा मिलता है तो ये तुम्हारे लिए शानदार है.

 

विराट ने आगे कहा कि, 

 

मेरे लिए सबकुछ नतीजा है. अगर इसके लिए मुझे आक्रामक क्रिकेट खेलना होता है तो मैं खेलता हूं. अगर मुझे इस दौरान दोड़ना पड़ा तो मैं दौड़ूंगा, अपने शॉट खेलूंगा, अगर मुझे तीन घंटे गेंद छोड़नी पड़ी तो मैं छोड़ूंगा. और मुझे लगता है कि अगर आपको जीत से मतलब नहीं है तो आपको जवाब नहीं मिलेगा.

 

गौतम गंभीर से जब विराट कोहली ने ठीक यही सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि जब एक युवा आकर आपके पास रन चेज को लेकर पूछता है तो आपको खुद का स्कोर नहीं बल्कि टीम के स्कोर पर फोकस करना होता है. क्या टारगेट है, आप कहां तक पहुंचना चाहते हैं. मेरे साथ साल 2011 फाइनल में यही हुआ था.  कई लोगों मेरे शॉट पर सवाल उठा रहे थे. लेकिन मैं चेज के बारे में सोच रहा था. अगर आप 97 पर पहुंचते हैं तो आप शतक के बारे में सोचते हैं. लेकिन यहां मुझे शतक छोड़ने की निराशा नहीं थी बल्कि मुझे विरोधी टीम को अपना विकेट देने की निराशा थी. ऐसे में अगली पीढ़ी को वर्तमान में रहकर सोचना होगा. सभी को उसी दौरान फैसला लेना होगा.

 

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