क्या गौतम गंभीर को सिर्फ एक फॉर्मेट का कोच बन जाना चाहिए, कई मैच साथ खेलने वाले साथी क्रिकेटर का बयान वायरल

हरभजन सिंह ने गौतम गंभीर का सपोर्ट किया और कहा कि, उनकी कोचिंग अच्छी चल रही है. लेकिन अगर कभी जरूरत पड़ी तो यहां भारत स्प्लिट कोचिंग के बारे में भी सोच सकता है.

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ट्रेनिंग सेशन के दौरान खिलाड़ियों को देखते गौतम गंभीर (PHOTO: GETTY)

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हरभजन सिंह ने कहा कि अगर जरूरत पड़े तो गंभीर को एक फॉर्मेट कोचिंग करनी चाहिए

भज्जी ने कहा कि अभी गंभीर में कोई कमी नहीं

हाल ही में गौतम गंभीर ने दिल्ली कैपिटल्स के सह-मालिक पार्थ जिंदल पर तंज कसा था. इस दौरान जिंदल ने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के लिए स्प्लिट कोचिंग का सुझाव दिया था. गंभीर ने कहा था कि वे अपने डोमेन में ही रहें. अब मंगलवार को गंभीर के पुराने साथी हरभजन सिंह ने कहा कि इस आइडिया में कुछ भी गलत नहीं है.

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गंभीर को करना चाहिए स्प्लिट कोचिंग?

बता दें कि, स्प्लिट कोचिंग का मतलब है कि अलग अलग फॉर्मेट के लिए अलग अलग कोच हों. ये विचार सबसे पहले कप्तानी में लोकप्रिय हुआ था, जब इंग्लैंड ने 2019 वर्ल्ड कप जीता. उस टीम की कप्तानी ऑयन मॉर्गन कर रहे थे और ज्यादातर खिलाड़ी व्हाइट बॉल स्पेशलिस्ट थे, टेस्ट में वे नियमित नहीं खेलते थे.

गंभीर के मामले में ये सुझाव इसलिए आ रहे हैं क्योंकि टेस्ट फॉर्मेट में उनकी कोचिंग अच्छी नहीं चल रही है, जबकि व्हाइट बॉल में उनका रिकॉर्ड काफी बेहतर है. पिछले साल से कोच बने गंभीर ट्रांजिशन पीरियड देख रहे हैं, लेकिन अब तक उन्होंने जितने टेस्ट जीते हैं, उससे ज्यादा हारे हैं. साथ ही वे भारतीय इतिहास के पहले ऐसे कोच बन गए हैं जिनके कार्यकाल में घर में दो टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप हार हुई है.

हरभजन की क्या है राय?

हरभजन ने ANI से कहा, “भारत का कोच बनना इतना आसान नहीं है. कोच को पूरे साल टीम के साथ ट्रैवल करना पड़ता है और खुद को खेल में पूरी तरह झोंके रखना पड़ता है. ज्यादा इन्वॉल्व रहना पड़ता है क्योंकि कई टीम सेलेक्शन होते हैं और मैच रिजल्ट पर भी फोकस करना पड़ता है.” उन्होंने आगे कहा कि, “गौतम गंभीर तो वहां खेलने नहीं जाते. जब वे खिलाड़ी थे तब बहुत अच्छा खेले. भारत के लिए शानदार खेला. सबको थोड़ा धैर्य रखना चाहिए. अगर आपको लगता है कि कोचिंग स्प्लिट करनी चाहिए, जैसे एक व्हाइट बॉल के लिए और एक रेड बॉल के लिए तो अभी इसके लिए जरूरत नहीं है. लेकिन समय के साथ अगर जरूरत पड़ी तो जरूर करना चाहिए. इसमें कुछ भी गलत नहीं है.”

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