कैसे एमएस धोनी चुपचाप तैयार कर रहे हैं झारखंड क्रिकेटर्स की अगली पीढ़ी?

इस जीत ने झारखंड के उभरते हुए मज़बूत बैटिंग लाइन-अप की ताकत का शायद सबसे स्पष्ट संकेत दिया. कप्तान इशान किशन ने आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व किया और फाइनल में कुल 350 रन बनाए

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MS Dhoni

एमएस धोनी झारखंड क्रिकेट पर अपना चुपचाप प्रभाव छोड़ रहे हैं. (Courtesy: X)

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झारखंड का बैटिंग लाइन अप काफी मजबूत है.

इशान किशन की कप्तानी में ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी का ख‍िताब जीता.

इंटरनेशनल क्रिकेट और घरेलू क्रिकेट से काफी समय पहले ही दूरी बनाने के बाद भी एमएस धोनी झारखंड क्रिकेट पर अपना चुपचाप प्रभाव छोड़ रहे हैं.वे युवा पीढ़ी को तैयार करने में मदद कर रहे हैं, जो अब सभी फॉर्मेट में सबसे ऊंचे घरेलू स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही है. गुरुवार को ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी जीती, जो 2012 के बाद उनकी पहली जीत थी. इस जीत ने झारखंड के उभरते हुए मज़बूत बैटिंग लाइन-अप की ताकत का शायद सबसे स्पष्ट संकेत दिया. कप्तान इशान किशन ने आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व किया और फाइनल में कुल 350 रन बनाए, जबकि शिखर मोहन, कुमार कुशाग्र, मोहम्मद कौनेन कुरैशी और अनुकूल रॉय झारखंड के उन खिलाड़ियों में शामिल थे, जिन्होंने इस टूर्नामेंट में अहम योगदान दिया. 

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यह खिताब ईस्ट जोन की सामूहिक कामयाबी थी. बंगाल ने मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार, अभिमन्यु ईश्वरन, सुदीप घरामी और शाहबाज़ अहमद के जरिए काफ़ी अनुभव दिया, वहीं बिहार के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी ने भी सेमीफाइनल में टूर्नामेंट के इतिहास की सबसे तेज हाफ़-सेंचुरी लगाकर अपनी छाप छोड़ी, लेकिन झारखंड के युवा मिडिल-ऑर्डर बल्लेबाजों के प्रदर्शन ने ईस्ट ज़ोन के अभियान में सबसे अहम भूमिका निभाई और झारखंड की इस प्रोग्रेस के पीछे एक जाना-पहचाना चेहरा है, जो बिना किसी औपचारिक पद के भी लगातार मार्गदर्शन करता रहता है.

जूनियर और सीन‍ियर ख‍िलाड़‍ियों से मिलने स्टेडियम जाते हैं धोनी

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार JSCA के सेक्रेटरी और भारत और झारखंड के पूर्व बल्लेबाज सौरभ तिवारी ने धोनी के बारे में बताया कि जब भी वह खाली होते हैं और रांची में होते हैं, तो (JSCA) स्टेडियम आते हैं. कैंप के दौरान, चाहे जूनियर हों या सीनियर, वह खुद आते हैं, लोगों से बात करते हैं और शामिल होते हैं. झारखंड ने जब पिछले साल मुश्ताक अली ट्रॉफी जीती थी, तो उन्हें सबसे पहला बधाई संदेश धोनी का ही मिला था. तिवारी ने बताया कि धोनी बताते रहते हैं कि कौन से खिलाड़ी अच्छे हैं और जिन पर नजर रखी जानी चाहिए. जब ​​भी खिलाड़ियों को उनसे मिलने का मौका मिलता है, तो वह उनसे बात करते हैं और उन्हें बताते हैं कि कैसा प्रदर्शन करना है. वह उनसे सबसे जरूरी बात यह करते हैं कि खेल को कैसे समझा जाए. जब ​​आप टॉप लेवल पर खेल रहे होते हैं तो यह एक बहुत बड़ी मानसिक बात होती है. 

टीम के कामकाज में दिलचस्पी


तिवारी का कहना है कि धोनी का जुड़ाव काफ़ी बढ़ गया है और राज्य की टीम के कामकाज में उनकी दिलचस्पी बहुत ज़्यादा है. तिवारी के मुताबिक धोनी किसी भी दिन झारखंड की प्लेइंग XI बता सकते हैं और उभरते हुए खिलाड़ियों पर कड़ी नजर रखते हैं. यह असर जरूरी नहीं कि सिर्फ़ टेक्निकल सलाह देने के बारे में हो. यह इस बात को समझने के बारे में है कि टॉप लेवल पर टिके रहने और कामयाब होने के लिए क्या चाहिए और यह बात धोनी ज़्यादातर लोगों से बेहतर जानते हैं. 

झारखंड के पूर्व खिलाड़ी और अब U-23 टीम के कोच इशांक जग्गी का मानना ​​है कि मौजूदा खिलाड़ियों ने अपने खेल को बेहतर ढंग से समझना शुरू कर दिया है. जग्गी ने कहा कि धोनी ने सभी को यह विश्वास दिलाया कि झारखंड के खिलाड़ी भी टॉप लेवल पर पहुंच सकते हैं.जग्गी के अनुसार जब ईस्ट ज़ोन ने जीत हासिल की थी, धोनी अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद राज्य के क्रिकेट इकोसिस्टम से गहराई से जुड़े हुए हैं. 

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