भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और हेड कोच राहुल द्रविड़ ने पिछले दो साल से घर पर टेस्ट सीरीज गंवाने के पीछे क्या कारण हैं. उनका कहना है कि खिलाड़ियों का तीनों फॉर्मेट खेलना, लाल गेंद के क्रिकेट की तैयारी के लिए पर्याप्त समय न मिलना और नतीजे निकालने वाली पिचें इसके पीछे की वजह हो सकती हैं. भारत ने 2012 से 2024 के बीच घर पर कोई भी टेस्ट सीरीज नहीं गंवाई थी. लेकिन गौतम गंभीर के हेड कोच रहते अक्टूबर 2024 से नवंबर 2025 के दौरान 12 महीनों में दो सीरीज में घर पर हार मिली. पहले न्यूजीलैंड ने 3-0 से धूल चटाई. फिर साउथ अफ्रीका ने 2-0 से पीट दिया.
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भारत की घर पर टेस्ट में लगातार नाकामी पर द्रविड़ ने कुछ अहम बातें बताईं. उन्होंने 27 जनवरी को बेंगलुरु में एक इवेंट में कहा, 'एक कोच के रूप में जो बात मुझे समझ आई कि जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट खेलते हैं वे एक फॉर्मेट से दूसरे में लगातार सक्रिय रहते हैं. ऐसा देखा गया है कि हमारे पास टेस्ट मैच से पहले तीन से चार दिन का समय रहता है और तब हम टेस्ट की प्रैक्टिस शुरू करते हैं. फिर पलटकर देखने पर लगता है कि इन खिलाड़ियों ने इससे पहले आखिरी बार चार या पांच महीने पहले लाल गेंद का सामना किया था. यह एक चुनौती है. टेस्ट मैच में स्पिन लेती पिच या सीम वाली पिच पर घंटों तक खेलना आसान नहीं होता है. इसके लिए काबिलियत चाहिए होती है.'
शुभमन गिल ने शेड्यूल में सुधार के लिए की थी गुजारिश
भारतीय टीम के टेस्ट कप्तान शुभमन गिल ने हाल ही में कहा था कि खिलाड़ियों को टेस्ट सीरीज से पहले तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलता है. उन्होंने बीसीसीआई से शेड्यूल पर काम करने की गुजारिश की थी. द्रविड़ भी वर्तमान टेस्ट कप्तान की बात से सहमत दिखे. उन्होंने कहा, 'मेरी पीढ़ी में केवल दो ही फॉर्मेट हुआ करते थे. तब फ्रेंचाइज क्रिकेट नहीं था. तब टेस्ट सीरीज से पहले तैयारी के लिए एक महीना मिल जाता था. मैं लाल गेंद खेल सकता था और अपनी दक्षता बढ़ा सकता था. अब लाल गेंद क्रिकेट में यह मुश्किल हो गई कि सभी तीनों फॉर्मेट खेलने वाले हमारे खिलाड़ियों के पास प्रैक्टिस का वक्त तक नहीं होता है. शुभमन ने इस तरफ ध्यान खींचा है.'
द्रविड़ बोले- पिचों की वजह से भी बढ़ा दबाव
द्रविड़ ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के आने से अब नतीजे निकालने वाली पिच बनने लगी हैं. इससे लगभग हर मैच का नतीजा आता है. पहले टेस्ट सीरीज जीतना काफी होता था. अब हर टेस्ट जीतना होता है. इससे घर पर खेल रही टीम पर दबाव रहता है. अब पिचों पर गेंदबाजों को थोड़ी ज्यादा मदद मिलती है.
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