734 पास और 27 शॉट के बाद भी रोया स्पेन, केप वर्डे ने किया बड़ा उलटफेर, डेथ पासिंग का 'रेड फूरी' पर लगा दाग

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में केप वर्डे ने अपने पहले ही मुकाबले में बड़ा उलटफेर करते हुए दुनिया की नंबर-2 टीम स्पेन को गोलरहित ड्रॉ पर रोक दिया. स्पेन ने पूरे मैच में 734 पास और 27 शॉट लगाए मगर एक भी गोल नहीं हुआ.

Profile

SportsTak

अपडेट:

Lamine Yamal #19 of Spain

केप वर्डे के खिलाफ स्पेन के लामिन यमाल

Story Highlights:

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में स्पेन और केप वर्डे का मैच 0-0 से ड्रॉ रहा

केप वर्डे ने अपने वर्ल्ड कप इतिहास का पहला मैच खेला

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में 16 जून की तड़के सुबह दुनिया की नंबर 2 टीम स्पेन (रेड फ्यूरी) जब छोटे देश केप वर्डे के सामने मैदान में उतरी, तो सभी को नतीजे का अंदाज़ा था. लेकिन सिर्फ 5 लाख 30 हजार की आबादी वाले देश केप वर्डे की टीम जब मैदान पर उतरी, तो खिलाड़ियों ने यह महसूस ही नहीं होने दिया कि वे अपने वर्ल्ड कप इतिहास का पहला मैच खेल रहे हैं. दूसरी ओर, लामिन यामाल, फेरान टोरेस और निको विलियम्स जैसे स्टार खिलाड़ी मैदान में मौजूद थे. इस मैच के दौरान स्पेन की टीम 90 मिनट तक एक गोल के लिए तरसती रही, लेकिन वह केप वर्डे के डिफेंस और गोलकीपर को भेद नहीं सकी. इस तरह केप वर्डे ने स्पेन के खिलाफ ड्रॉ खेलकर अब तक का सबसे बड़ा उलटफेर किया.

पहले हाफ में क्या हुआ?

केप वर्डे दुनिया की 67वें नंबर की टीम है और उसने पहली बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है. इसके बावजूद जब उसके खिलाड़ी स्पेन के सामने उतरे, तो वे आत्मविश्वास से लबरेज नजर आए. केप वर्डे के पास खोने के लिए कुछ नहीं था, लेकिन स्पेन की साख दांव पर लगी थी. पहले हाफ में स्पेन ने लगातार आक्रमण किए और उसके खिलाड़ियों ने एक-दो नहीं, बल्कि 10 शॉट लगाए. लेकिन उन्हें एक भी गोल नहीं मिला. दूसरी तरफ, केप वर्डे की टीम ने आक्रमण से ज्यादा अपने डिफेंस को मजबूत बनाए रखा.

केप वर्डे की दीवार बना गोलकीपर

पहले हाफ में गोल न कर पाने के बावजूद स्पेन को भरोसा था कि दूसरे हाफ में वह गेंद को गोलपोस्ट के अंदर पहुंचा देगी. लेकिन केप वर्डे के लिए उनकी सबसे बड़ी दीवार 40 वर्षीय गोलकीपर वोजिन्हा रहे. वोजिन्हा ने दूसरे हाफ में भी स्पेन का एक भी शॉट गोलपोस्ट के अंदर नहीं जाने दिया. इसके साथ ही वे फीफा वर्ल्ड कप में डेब्यू करने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बन गए. वोजिन्हा ने मैच में कुल सात बार गेंद को गोलपोस्ट के अंदर जाने से बचाया.

सूर्यवंशी का इंडिया ए की हार के बाद झगड़ा, श्रीलंकाई खिलाड़ी से धक्का-मुक्की

स्पेन पर कैसे लगा 'डेथ पासिंग' का दाग?

स्पेन ने पूरे मैच में 734 पास किए और 27 शॉट लगाए, लेकिन एक भी गोल नहीं कर सकी. टीम की गोल के लिए बेबसी देखकर फैंस भी निराश हो गए. वहीं, अपना पहला वर्ल्ड कप मैच खेल रही केप वर्डे की टीम सिर्फ छह शॉट ही लगा सकी और उसे भी कोई गोल नहीं मिला. हालांकि, स्पेन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ एक भी गोल न खाना उनके लिए किसी जीत से कम नहीं था.

केप वर्डे ने अपने पहले ही वर्ल्ड कप मैच में एक अंक अर्जित किया और इस मुकाबले से मिला आत्मविश्वास आने वाले मैचों में अन्य टीमों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है. दूसरी तरफ, स्पेन की टीम पर एक बार फिर 'डेथ पासिंग' यानी सिर्फ पास करते रहना और गोल न कर पाना, का दाग लग गया.

स्पेन और 'डेथ पासिंग' का कनेक्शन

स्पेन की टीम के लिए 'डेथ पासिंग' शब्द का इस्तेमाल पहली बार 2018 वर्ल्ड कप के दौरान किया गया था, जब 1000 से अधिक पास करने के बावजूद टीम गोल नहीं कर सकी थी और रूस ने मैच अपने नाम कर लिया था. उस मुकाबले में स्पेन पेनल्टी शूटआउट में हार गई थी और उसे काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था.
 

तिलक की श्रीलंकाई अंपायर्स से 4 बार कहासुनी, बार-बार हुआ झगड़ा, देखिए Video

    यह न्यूज़ भी देखें

    Share