फ़ुटबॉल के सबसे बड़े इवेंट FIFA वर्ल्ड कप शुरू होने से बस तीन दिन बचे हैं और इससे पहले यह टूर्नामेंट अजीबोगरीब विवादों में घिरा हुआ है. टिकट और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी जो गड़बड़ी शुरू में मामूली लग रही थी, वह अब गंभीर रूप ले चुकी है. एयरपोर्ट पर फुटबॉलर और स्टाफ को कई घंटों तक रोके रखा गया और एक अधिकारी को तो अमेरिका में कदम तक रखने नहीं दिया गया. विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है और ताजा मामला अफ़्रीका के बेहतरीन फ़ुटबॉल रेफरी ओमर अब्दुलकादिर अर्टन से जुड़ा है.
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मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर अधिकारियों ने सोमालिया के इस अधिकारी को वापस लौटा दिया और सीधे इस्तांबुल की फ़्लाइट से वापस भेज दिया, जिससे फ़ुटबॉल जगत में नाराजगी फैल गई है. रेफरी को देश से वापस भेजने के फैसले ने फ़ुटबॉल की दुनिया को हैरान कर दिया. खासकर इसलिए क्योंकि खबरों के मुताबिक आर्टन डिप्लोमैटिक पासपोर्ट पर यात्रा कर रहे थे. नैरोबी में सोमालिया के दूतावास ने शुरुआती देरी के बाद उनका वीजा हासिल करने में मदद की थी, लेकिन आखिरकार अमेरिकी बॉर्डर कंट्रोल ने उन्हें देश में आने की इजाजत देने से इनकार कर दिया.
प्रधानमंत्री ने की अमेरिकी प्रशासन की आलोचना
इस घटना के बाद सोमालिया के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी प्रशासन की आलोचना करते हुए एक सार्वजनिक बयान जारी किया. हसन अली खैरे ने कहा कि उन्हें यह सुनकर बहुत निराशा हुई है कि अफ्रीका के सबसे बेहतरीन रेफरी और दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रेफरी में से एक ओमर अर्टन वीजा से जुड़ी दिक्कतों के कारण शायद फीफा वर्ल्ड कप में रेफरी की भूमिका नहीं निभा पाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि ओमर ने अपनी काबिलियत, कड़ी मेहनत, प्रोफेशनलिज़्म और ईमानदारी के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. अफ्रीकी और इंटरनेशनल फुटबॉल के सबसे ऊंचे स्तरों पर रेफरी की भूमिका निभाने के कारण उनकी उपलब्धियां खुद उनके बारे में बहुत कुछ बताती हैं. वे न सिर्फ सोमालिया का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि उन लाखों युवा अफ्रीकियों की उम्मीदों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं जो मानते हैं कि बेहतरीन काम को दुनिया के मंच पर पहचान मिलनी चाहिए.
इराक के उप-कप्तान को हिरासत में लिया गया
इससे पहले पश्चिम एशिया में अमेरिका के बढ़ते टकराव की वजह से FIFA वर्ल्ड कप से पहले कई तरह की दिक्कतें पैदा हो गई हैं. दो दिन पहले इराक के उप-कप्तान और देश के टॉप स्ट्राइकर आयमेन हुसैन को हिरासत में लिया गया और सात घंटे तक उनसे पूछताछ की गई थी. हुसैन एक अहम खिलाड़ी हैं, जिन्होंने वह गोल किया था, जिससे इराक का फाइनल के लिए क्वालिफ़िकेशन पक्का हुआ था. इस मुश्किल दौर में स्ट्राइकर अकेले नहीं थे. टीम के एक और फ़ुटबॉलर और टीम के फ़ोटोग्राफ़र को भी पूछताछ के लिए एयरपोर्ट पर रोका गया था. हालांकि हुसैन को आख़िरकार देश में आने की इजाजत मिल गई, लेकिन टीम के फ़ोटोग्राफ़र को अमेरिका में घुसने से रोक दिया गया.
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