फीफा वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मुकाबला अर्जेंटीना और स्पेन के बीच खेला जाना है. इस फाइनल मैच का जहां सभी को बेसब्री से इंतजार है, वहीं लियोनेल मेसी के लिए यह मैच काफी इमोशनल होने वाला है. क्योंकि सिर्फ 13 साल की उम्र में मेसी अर्जेंटीना से फुटबॉल सीखने स्पेन की बार्सिलोना अकादमी आ गए थे और उन्होंने फुटबॉल का पूरा ककहरा यहीं से सीखा. इसलिए मेसी की जन्मभूमि अगर अर्जेंटीना है तो कर्मभूमि स्पेन रही है. स्पेन में मेसी ने एक-दो साल नहीं बल्कि 21 साल तक बार्सिलोना के लिए फुटबॉल खेला और इस दौरान उन्होंने वो सब कुछ हासिल किया, जो एक फुटबॉल खिलाड़ी को महान बनाता है. लेकिन अर्जेंटीना के लिए जब उन्होंने साल 2022 का वर्ल्ड कप जीता तो स्पेन से महान बनने वाला यह नायक अपने देश का भगवान बन गया. अब चलिए जानते हैं मेसी की उस कहानी के बारे में, जब स्पेन उनको बार-बार अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल करने के प्रयास करता रहा, लेकिन उनका दिल अर्जेंटीना के लिए धड़कता रहा.
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13 साल की उम्र में ही बार्सिलोना ने उनको मान लिया था स्टार
लियोनेल मेसी को 13 साल की उम्र में ही बार्सिलोना ने भविष्य का सुपरस्टार मान लिया था. इसके चलते बेहद कम उम्र में वह घर छोड़कर स्पेन आ गए और उन्होंने यहीं से अपने प्रोफेशनल फुटबॉल करियर की नींव रखी. मेसी को बार्सिलोना की ला मासिया अकादमी ने तराशा और उन्हें स्पेनिश फुटबॉल के हर एक पैंतरे सिखाए. अर्जेंटीनी फुटबॉल की चालाकी और स्पेनिश फुटबॉल की समझ के साथ मेसी ने बहुत तेजी से कदम आगे बढ़ाए. इसका नतीजा यह रहा कि जब अर्जेंटीना के कोच का ध्यान मेसी की तरफ नहीं था तो स्पेन ने उनको अपनी राष्ट्रीय टीम में शामिल करने का प्लान बनाया. इसके लिए मेसी से भी पूछा गया और जब उन्होंने मना किया तो फिर दोबारा उनके एजेंट होरासियो गागियोली से उनके परिवार से बातचीत करने को भी कहा गया था.
स्पेन को मना करना था मेसी का टर्निंग पॉइंट
मेसी पूरी तरह स्पेन के एहसानों से लदे हुए थे. उनकी अकादमी ने मेसी के पिता को नौकरी दिलवाई और उन्हें हर साल 70 हजार डॉलर दिए जाते थे, जबकि मेसी के इंजेक्शन का खर्च भी 1000 डॉलर प्रति महीने था. यह भी एक कारण था कि अर्जेंटीना के क्लब उन्हें खरीद नहीं पा रहे थे, क्योंकि मेसी को रखना काफी महंगा था. मगर बार्सिलोना ने इस स्टार को दुनिया के सामने लाने के लिए तिजोरी खोलकर पैसा लगाया.
लेकिन बार्सिलोना के कोच ने जब उनसे अर्जेंटीना के बजाय स्पेन के लिए खेलने को कहा तो 13 साल के इस लड़के ने सबसे ऊपर अपने देश अर्जेंटीना को ही रखा और कभी भी फैसला नहीं बदला. अगर मेसी उस समय यह फैसला कर लेते तो वह आज स्पेन की जर्सी में अर्जेंटीना के खिलाफ फुटबॉल खेल रहे होते.
मेसी को अर्जेंटीना ने नहीं बल्कि मेसी ने अर्जेंटीना को खोजा
मेसी स्पेन में अपने फुटबॉल से जलवा बिखेरते रहे और उन्हें नेशनल ड्यूटी का कॉल नहीं आ रहा था. तभी अर्जेंटीना के कोच मार्सेलो बिएल्सा और उनके सहायक क्लाउडियो विवास स्पेन आए, जो सीनियर खिलाड़ियों को देखने वाले थे. इस दौरान मेसी के एजेंट ने फौरन उनके पिता से मेसी के खेल का वीडियो बनवाया. इस वीडियो का टेप बिएल्सा और विवास तक पहुंचा दिया गया.
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इस टेप को जब बिएल्सा ने पहली बार देखा तो उन्हें मेसी के इतने तेज मूव देखकर लगा कि वीडियो अपनी नॉर्मल स्पीड से अधिक है. उन्होंने कहा कि इसे नॉर्मल स्पीड पर चलाओ, मगर बाद में पता चला कि वीडियो तेज नहीं था, बल्कि खिलाड़ी की स्पीड ही इतनी तेज थी. इससे अर्जेंटीना के कोच बिएल्सा काफी प्रभावित हुए और उन्होंने फौरन राष्ट्रीय टीम मैनेजर ओमर साउटो को मेसी को टीम में लाने का आदेश दिया.
एक फोन कॉल और बदल गया सब कुछ
राष्ट्रीय टीम मैनेजर ओमर साउटो ने बताया कि जब पहली बार उन्होंने यह नाम सुना कि मेसी को टीम में लाना है, तब उन्हें पूरा नाम नहीं पता था. इसलिए वह बूथ पर गए और मेसी उपनाम वाले हर व्यक्ति को फोन करना शुरू कर दिया.
सबसे पहले फोन मेसी की दादी को लगा और उसके बाद जब मेसी के पिता से बात हुई तो उन्होंने बताया कि उसका पहला नाम लियोनेल है और वह कब से अर्जेंटीना के बुलावे का इंतजार कर रहा है.
इसके बाद मेसी कैंप में आए और उन्होंने 17 साल की उम्र में पहली बार अर्जेंटीना की जर्सी पहनी और अंडर-20 टूर्नामेंट में पराग्वे के खिलाफ डेब्यू किया. जब 2025 में ओमर साउटो का निधन हुआ, तो मेसी ने उन्हें भावुक श्रद्धांजलि दी.
मेसी सिर्फ अर्जेंटीना के नहीं हैं और सिर्फ स्पेन के भी नहीं
मेसी की बात करें तो उनकी रगों में जहां स्पेनिश फुटबॉल दौड़ता है, वहीं दिल की धड़कन में अर्जेंटीना का स्टाइल बसा हुआ है. मेसी के फुटबॉल गेम में अर्जेंटीना स्टाइल की आजादी और जुनून है तो स्पेन की फुटबॉल शैली की तकनीकी समझ और अनुशासन भी है.
उनके पैरों का मैजिक अर्जेंटीना से मिला तो गेम को समझना और खाली जगह को पहचानना, उसका इस्तेमाल करना और ऐसी जगह ढूंढना जहां दूसरे खिलाड़ी सोच भी नहीं पाते — यह सब स्पेनिश फुटबॉल की देन है.
इसलिए कहा जा सकता है कि मेसी सोचते स्पेनिश अंदाज में हैं, लेकिन खेलते अर्जेंटीनी स्टाइल में हैं. वह दोनों फुटबॉल संस्कृतियों का संगम हैं. उनके अंदर अर्जेंटीना का जुनून और स्पेन की कला है.
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