दीपा करमाकर... कुछ फैंस को ये नाम आज भी याद होगा तो काफी लोग शायद याद न हो. दीपा करमाकर, ये वही नाम है, जिसने अकेले दम पर भारतीय जिम्नास्टिक्स को दुनिया भर में पहचान दिलाई.पूरी दुनिया दीपा करमाकर अब नई पीढ़ी के लिए कोच दीपा दीदी बन गई हैं अगरतला की रहने वाली दीपा ने कुछ महीने पहले ही कोचिंग शुरू की है और वह शुरुआती स्तर के बच्चों को सिखा रही हैं.टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार दीपा ने बताया उन्होंने खुद पांच या छह साल की उम्र में जिम्नास्टिक्स शुरू किया था.इसलिए यह उनके लिए बीते समय में वापस जाने जैसा है.
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भारत की अगली चुनौती, कॉमनवेल्थ की तुलना में एशियन गेम्स क्यों हैं मुश्किल?
दीपा जिन बच्चों को जिम्नास्टिक्स का ककहरा सिखा रही हूं, उनके लिए वह एक कोच से ज़्यादा बड़ी बहन जैसी हैं. दीपा ने बताया कि उन बच्चों को उनकी उपलब्धियों के बारे में ज़्यादा जानकारी है.वे अपनी हर तरह की परेशानियां लेकर उनके पास आते हैं. कभी-कभी तो दीपा को उनके बाल भी बनाने पड़ते हैं.
लेवल 1 कोचिंग कोर्स किया पूरा
देश की इकलौती ओलिंपियन जिम्नास्ट दीपा ने अक्टूबर 2024 में रिटायरमेंट लिया. इससे पहले उसी साल एशियन विमेंस आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स चैंपियनशिप में वॉल्ट इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर वह कॉन्टिनेंटल मीट में टॉप पर पहुंचने वाली पहली भारतीय बनी थीं.नई भूमिका संभालने से पहले उन्होंने सफलतापूर्वक लेवल 1 कोचिंग कोर्स पूरा किया.
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 तक खेलना चाहती थीं दीपा
हालांकि उन्होंने माना कि रिटायरमेंट का फैसला लेना मुश्किल था.उनके लंबे समय से कोच रहे विश्वेश्वर नंदी का कहना है कि वह ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स तक खेलना जारी रखना चाहती थीं.उनकी आंखों में आंसू थे और वह उनसे खेलने की इजाजत देने की गुजारिश कर रही थीं, लेकिन उन्हें पता था कि दीपा का शरीर इसे झेल नहीं पाएगा. उन्हें गंभीर चोटें लग सकती थीं.
दीपा की पहले ही ACL सर्जरी हो चुकी थी और उन्हें बार-बार घुटने और पैर में चोटें आ रही थीं. वह जोखिम नहीं उठा सकते थे. उनकी दो जिम्नास्ट श्रीपर्णा देबनाथ और श्रेयांशी रॉय पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.ग्लास्गो से भारतीय जिम्नास्ट के खाली हाथ लौटने के बाद दीपा अहमदाबाद में होने वाले 2030 गेम्स में वापसी की उम्मीद कर रही हैं.
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