मनु भाकर के कोच और दिग्गज निशानेबाज जसपाल राणा का 49 साल की उम्र में निधन हो गया है. NRAI ने इसकी पुष्टि कर दी है. इस हफ़्ते की शुरुआत में उन्हें मेडिकल इमरजेंसी हुई थी. भारत के पिस्टल शूटर्स के हाई-परफॉर्मेंस कोच राणा को म्यूनिख में ISSF वर्ल्ड कप से भारत लौटते समय फ्लाइट में तकलीफ महसूस होने की खबर है. दिल्ली पहुंचने के बाद उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज किया जा रहा था. उनकी मौत भारतीय शूटिंग के लिए एक बहुत बड़ा झटका है. एक ऐसा खेल जिसे उन्होंने एक चैंपियन खिलाड़ी और कोच, दोनों ही तरह तीन दशकों से ज़्यादा समय तक अपना योगदान दिया.
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भारत के सबसे कामयाब पिस्टल शूटर्स में से एक राणा 1990 के दशक में मशहूर हुए और इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में अपनी धाक जमाई. उन्होंने एशियन गेम्स, कॉमनवेल्थ गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में कई मेडल जीते और देश के सबसे सफल शूटर्स में से एक बन गए. अपने कॉम्पिटिटिव करियर को अलविदा कहने के बाद राणा कोचिंग के क्षेत्र में आ गए और जल्द ही भारतीय शूटिंग में सबसे प्रभावशाली कोचों में से एक बन गए.
मनु भाकर को जिताए दो ओलिंपिक मेडल
वे नेशनल कोचिंग सेटअप से जुड़े और 2012 में जूनियर पिस्टल प्रोग्राम की ज़िम्मेदारी संभाली. अगले दस सालों में उन्होंने कई ऐसे शूटर्स के साथ मिलकर काम किया और टैलेंट की एक मज़बूत पाइपलाइन तैयार की, जिन्होंने आगे चलकर इंटरनेशनल लेवल पर अपनी पहचान बनाई.राणा ने डबल ओलिंपिक मेडलिस्ट मनु भाकर के करियर को दिशा दी. मनु ने उनकी मदद से ही 2024 के पेरिस ओलिंपिक में इतिहास रचा और महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल और मिक्स्ड टीम 10m एयर पिस्टल इवेंट्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीते.
खेल में उनके योगदान को देखते हुए, NRAI ने फरवरी 2025 में राणा को 25m पिस्टल इवेंट के लिए हाई-परफॉर्मेंस कोच नियुक्त किया. वे नेशनल शूटिंग प्रोग्राम से सक्रिय रूप से जुड़े रहे. कोचिंग और एथलीट डवलपमेंट में उनके योगदान के लिए राणा को 2020 में द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जो भारतीय खेलों में सबसे बड़े सम्मानों में से एक है.
जसपाल राणा की बड़ी उपलब्धियां
एशियन गेम्स- 4 गोल्ड
कॉमनवेल्थ गेम्स- 9 गोल्ड
एशियन चैंपियनशिप- एक गोल्ड
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