FIFA WC 2026 : फीफा वर्ल्ड कप 2026 का तीसरा क्वार्टर फाइनल मुकाबला इंग्लैंड और नॉर्वे के बीच खेला गया. अभी तक हर मैच जीतकर नाव के चप्पू वाला सेलिब्रेशन करने वाली नॉर्वे की टीम अंग्रेजों से पार नहीं पा सकी. वाइकिंग्स की नाव क्वार्टर फाइनल से आगे नहीं जा सकी और इंग्लैंड ने 2-1 से मैच को अपने नाम किया. जिसके चलते साल 2018 के बाद इंग्लैंड ने जहां दूसरी बार वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में कदम रखा, वहीं नॉर्वे की टीम का सफर क्वार्टर फाइनल से समाप्त हो गया. उनके धाकड़ स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड मैच में एक भी गोल नहीं कर सके तो जूड बेलिंघम ने दो गोल दागकर डिएगो माराडोना के बड़े मुकाम पर कदम रख दिया.
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पहले हाफ में नॉर्वे की गलती का मिला फायदा
इंग्लैंड की टीम के खिलाड़ी जब मैदान में उतरे तो उसने शुरू से ही नॉर्वे पर दबाव बनाना शुरू किया. इंग्लैंड की टीम ने 4-3-3 के फॉर्मेशन से खेलने वाली नॉर्वे के डिफेंस को भेदने के लिए लॉन्ग पास का भी इस्तेमाल किया और हालैंड को ब्लॉक करने के लिए भी जाल बिछाया. इंग्लैंड ने ज्यादा अटैक करने की बजाय नॉर्वे की गलती होने का इंतजार किया और फिर मौका मिलते ही गोल दागने का काम किया. पहली गलती नॉर्वे के गोलकीपर नाइलैंड से हुई और उनकी खराब गोल किक को इलियट एंडरसन ने इंटरसेप्ट करने के बाद गॉर्डन को पास दिया और फिर पहले हाफ के इंजरी टाइम पर बेलिंघम ने मैच का पहला गोल दागकर इंग्लैंड को 1-1 की बराबरी पर ला दिया. पहले हाफ में पहला गोल नॉर्वे के श्जेल्डेरुप ने 36वें मिनट में किया था, लेकिन इस बढ़त को लेकर वह पहला हाफ समाप्त नहीं कर सके.
हालैंड को इंग्लैंड ने कैसे रोका?
1-1 की बराबरी करने के बाद अब दूसरे हाफ में भी हालैंड को रोकने के लिए इंग्लैंड के मैनेजर थॉमस टुशेल ने डेकलान राइस और नोनी मदुएके को हटाकर एबेरेची एज़े और बुकायो साका को उतारा. इससे इंग्लैंड का डिफेंस खुला लेकिन उनकी अटैकिंग पावर और बढ़ गई. जबकि दूसरी तरफ हालैंड की सप्लाई लाइन (मार्टिन ओडेगार्ड और सैंडर बर्गे से आने वाले पास) को काटे रखा, जिससे पूरे मैच के दौरान हालैंड सिर्फ 21 टच ही कर सके और एक भी गोल करने में वह नाकाम रहे. हालैंड के खतरे को समाप्त करके इंग्लैंड ने अटैक करना जारी रखा.
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नॉर्वे की दूसरी गलती का भी इंग्लैंड को मिला फायदा
नॉर्वे के सामने इंग्लैंड ने गेंद को अपने पास तो रखा, लेकिन उनकी डिफेंस लाइन खुलने और उनकी गलती का फायदा उठाने का मौका नहीं छोड़ा. दूसरे हाफ में नॉर्वे की टीम गोल के लिए अधिक प्रेस करने लगी. इससे उनकी डिफेंस लाइन के पीछे काफी जगह खाली छूट गई थी. इसका फायदा इंग्लैंड के तेज विंगर्स ने उठाया और मैच जब एक्स्ट्रा टाइम पर गया तो गोलकीपर नाइलैंड से फिर एक गलती हो गई. एक्स्ट्रा टाइम पर नाइलैंड रोजर्स के एक शॉट को रोक नहीं सके और गेंद उनके हाथ से लगकर जैसे ही छिटकी तो बेलिंघम ने तुरंत उसे गोल पोस्ट के अंदर भेजकर इंग्लैंड के लिए विजयी गोल कर दिया. इस गोल के साथ इंग्लैंड के फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और नॉर्वे के लिए सब कुछ समाप्त हो गया. उनकी टीम 28 साल बाद पहली बार फीफा वर्ल्ड कप खेलने आई तो क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय करके हर एक फुटबॉल प्रेमी का दिल जीता. वहीं इंग्लैंड ने 2-1 से मैच को अपने नाम करते हुए फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में चौथी बार सेमीफाइनल में कदम रखा.
जूड बेलिंघम ने माराडोना के मुकाम पर रखा कदम
इंग्लैंड के लिए इस मैच में जूड बेलिंघम (2-2 गोल मैक्सिको और नॉर्वे के खिलाफ) ने दो गोल दागे और वह फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास में लगातार दो नॉकआउट मैचों में दो या उससे अधिक गोल करने वाले इंग्लैंड के पहले खिलाड़ी बने. जबकि फीफा वर्ल्ड कप में डिएगो माराडोना () के बाद ऐसा करने वाले वह दूसरे खिलाड़ी बने. माराडोना ने साल 1986 वर्ल्ड कप के दो नॉकआउट मैचों में इंग्लैंड और बेल्जियम के खिलाफ दो-दो गोल अकेले किए थे. जबकि पेले ने इस तरह का कारनामा साल 1958 में किया था.
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