Exclusive: 'आप किसी से मांगने...', चेतेश्वर पुजारा ने 13 साल के करियर में भारतीय टीम की कप्तानी नहीं मिलने पर तोड़ी चुप्पी

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India's star batter Cheteshwar Pujara
India's star batter Cheteshwar Pujara

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चेतेश्वर पुजारा ने भारत के लिए 103 टेस्ट खेले.

चेतेश्वर पुजारा ने राहुल द्रविड़ के संन्यास के बाद नंबर तीन का जिम्मा संभाला.

चेतेश्वर पुजारा ने कप्तानी नहीं मिलने पर कहा कि इसका दुख नहीं है.

चेतेश्वर पुजारा भारतीय टेस्ट टीम से बाहर चल रहे हैं. 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल के बाद से वे टीम का हिस्सा नहीं है. भारत को अगले महीने इंग्लैंड के दौरे पर जाना है. इसके लिए चेतेश्वर पुजारा का चुना जाना मुश्किल लग रहा है लेकिन इस बल्लेबाज ने कहा कि वह सेलेक्शन के लिए उपलब्ध नहीं है. पुजारा ने 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज से भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाई थी. उनका 13 साल का करियर रहा. लेकिन पुजारा को कभी कप्तानी करने का मौका नहीं मिला.  इस बारे में उन्होंने स्पोर्ट्स तक से बातचीत में चुप्पी तोड़ी.

पुजारा ने स्पोर्ट्स तक के पॉडकास्ट VIKRANT UNFILTERED में कहा कि उन्हें कप्तानी नहीं मिलने का दुख नहीं है. उन्हें अपनी काबिलियत पर भरोसा है. पुजारा ने कहा, 'कप्तानी ऐसी चीज है जो आपको दी जाती है तो आप उस रोल को निभाते हैं. अगर आपको वह नहीं दी जाती तो आप उस भूमिका को मांगने नहीं जाते. मैंने जब भी कप्तानी की है, भले ही इंडिया ए या ससेक्स जहां पर टीम को डिवीजन टू से डिवीजन एक में लेकर गया. वहां पर सीनियर खिलाड़ी के रूप में एक रोल था. सौराष्ट्र टीम में भी... जहां भी मैंने कप्तानी की है तो मुझे पता है कि क्या काबिलियत है और क्या चाहिए होता है. तो आप कप्तान हैं या नहीं, वह मायने नहीं रखता. आप टीम को कैसे इनपुट देते हैं, कैसे मदद कर सकते हैं वह मायने रखता है. इसलिए कप्तानी नहीं मिली तो इसका कोई दुख या अफसोस नहीं है.' 

पुजारा ने धोनी, कोहली और रोहित की कप्तानी पर क्या कहा

 

पुजारा ने 2010 में महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में डेब्यू किया था. इसके बाद वह विराट कोहली, अजिंक्य रहाणे और रोहित शर्मा के नेतृत्व में खेले. चार अलग-अलग कप्तानों के साथ खेलने के बारे में उन्होंने बताया, 'माही भाई के रहते मेरा डेब्यू हुआ. वह अलग ही खुशी होती है. वह शांत रहते थे. बॉडी लैंग्वेज से उन्हें पता चल जाता था कि खिलाड़ी किस रूप में है तो वह समझाते थे कि ज्यादा टेंशन नहीं लेना. जैसे खेलते आए हो वैसे ही खेलो. फिर जब विराट आया तो वह आक्रामक कप्तान था. वह हमेशा मैच को जीतना चाहता है. विराट के आने पर बाहर जाकर सीरीज जीतने का जज्बा आया. फिर अजिंक्य (रहाणे) की कप्तानी में खेला तो वह भी शांत रहते थे. तब मैं उपकप्तान था. उस समय हम दोनों में बहुत बात होती थी. फिर रोहित शर्मा कप्तान बने. वह खुलकर बात करते हैं. जो मन में होता है वह कह देते हैं.'

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