भारत ने हाल ही में रैकेटलॉन वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचा है। यह एक अनोखा खेल है जिसमें खिलाड़ी टेबल टेनिस, बैडमिंटन, स्क्वैश और लॉन टेनिस, इन चार रैकेट्स के साथ अलग-अलग डिसिप्लिन में प्रतिस्पर्धा करते हैं। भारतीय टीम ने फ्रांस, यूएसए, जर्मनी और डेनमार्क जैसी मजबूत टीमों को हराकर यह खिताब अपने नाम किया। इस जीत के बावजूद, भारत में इस खेल के प्रति जागरूकता की कमी है। खिलाड़ियों का मानना है कि यह खेल युवाओं के समग्र कौशल विकास के लिए महत्वपूर्ण है और इसमें पेशेवर करियर बनाने की भी अपार संभावनाएं हैं। एक खिलाड़ी ने कहा, "स्पोर्ट्स ही एक ऐसी चीज़ है जो कि आपको रोज़ हारना सीखाता है और फिर जीतना सीखाता है।" देश में रैकेटलॉन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित किए जा रहे हैं और लोनावाला में एक अकादमी भी शुरू की जा रही है। उम्मीद है कि स्कूलों में इस खेल को शामिल करने से इसकी लोकप्रियता बढ़ेगी और भारत का भविष्य इसमें उज्ज्वल होगा। सुविधाओं की उपलब्धता और खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ने से भारत इस खेल में और अधिक मेडल जीत सकता है।
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