फीफा वर्ल्ड कप 2026 में कोलंबिया ने उज्बेकिस्तान को 3-1 से हराकर अभियान शुरू किया. इस टीम की जीत के हीरो लुइस डियाज रहे जिन्होंने एक गोल किया और एक में मदद की. वे पहली बार फीफा वर्ल्ड कप खेल रहे हैं. तीन साल पहले फुटबॉल की मदद से ही उनके माता-पिता हथियारबंद लड़ाकों की गिरफ्त से छूट पाए थे. उनका कोलंबिया-वेनेजुएला बॉर्डर के पास से अपहरण किया गया था. तब लुइस डियाज इंग्लिश प्रीमियर लीग में लिवरपूल की तरफ से खेला करते थे.
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डियाज के लिए 2022 और 2023 का समय अच्छा नहीं रहा था. पिछले वर्ल्ड कप में कोलंबिया क्वालिफाई नहीं कर पाई थी. फिर उनके माता-पिता का अपहरण हो गया. उनके पिता मेन डियाज और मां सिलेनिस मारुलांदा को हथियारबंद लोगों ने पकड़ लिया था. हालांकि मां को तो जल्द ही छुड़ा लिया गया लेकिन पिता के साथ ऐसा नहीं हो पाया. लुइस तब लिवरपूल का हिस्सा थे. वे इस स्थिति में परिवार के पास गए और दो मैचों से बाहर रहे. जब वापस आए तब उन्होंने पिता को रिहा कराने के लिए अभियान छेड़ा.
फुटबॉल की मदद से पिता को मिली आजादी
लुइस डियाज ने लिवरपूल के लिए खेलते हुए गोल किया. फिर अपनी जर्सी के नीचे मौजूद टी शर्ट को दिखाया. इस पर स्पेनिश में लिखा था, 'पापा की आजादी.' इस तस्वीर ने इंटरनेशनल लेवल पर काफी हलचल मचाई. इससे कोलंबिया सरकार पर कदम उठाने का दबाव बना. 12 दिन तक बंधक रहने के बाद मेन को रिलीज कर दिया गया. जब बाप-बेटे की मुलाकात हुई तो दोनों काफी भावुक थे.
बायर्न म्यूनिख के लिए खेल रहे हैं लुइस डियाज
कोलंबिया ने जब 18 जून को पहली बार फीफा वर्ल्ड कप में खेल रहे उज्बेकिस्तान को मात दी तब लुइस के पिता स्टेडियम में मौजूद थे. 65वें मिनट में गोल करने के बाद कोलंबियाई खिलाड़ी ने सबसे पहले पिता की ओर ही देखा. लुइस अब जर्मन फुटबॉल लीग बुंडेसलीगा में खेलते हैं और बायर्न म्यूनिख का हिस्सा हैं. 40वें मिनट में लुइस के दिए पास पर ही डेनियल मुनोज ने गोल किया था और कोलंबिया को 1-0 की बढ़त दिलाई थी.
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