पंजाब में सड़क हादसे लंबे समय से एक बड़ी समस्या रहे हैं. कई बार घायल लोगों की जान सिर्फ इसलिए चली जाती थी क्योंकि समय पर मदद नहीं मिल पाती थी. इसी गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए पंजाब सरकार ने सड़क सुरक्षा फोर्स (Sadak Surakhya Force) की शुरुआत की. इस फोर्स का मकसद साफ है, दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति को 'गोल्डन आवर' में इलाज तक पहुंचाना.
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सड़क सुरक्षा फोर्स की शुरुआत कब हुई?
सड़क सुरक्षा फोर्स को पंजाब सरकार ने 2024 में शुरू किया. यह एक विशेष आपातकालीन बल है, जो सिर्फ सड़क हादसों पर तुरंत कार्रवाई करने के लिए बनाया गया है. मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने इसे आम लोगों की जान बचाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया.
फोर्स में कितने कर्मचारी और वाहन हैं?
इस फोर्स में शामिल हैं-
हजारों प्रशिक्षित कर्मचारी
सैकड़ों आधुनिक वाहन, जिनमें शामिल हैं-
एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस
ट्रॉमा केयर वैन
क्विक रिस्पॉन्स गाड़ियां
इन वाहनों को राज्य की हाईवे, प्रमुख सड़कों और दुर्घटना-संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है ताकि जरूरत पड़ते ही मदद पहुंच सके. हर टीम में ड्राइवर, पैरामेडिक्स और मेडिकल इमरजेंसी स्टाफ होता है.
अब तक कितनी जानें बचाई गईं?
शुरुआत के बाद से अब तक सड़क सुरक्षा फोर्स ने हजारों हादसों में लोगों की जान बचाई है. इसके जरिए खून रोकने, ऑक्सीजन देने, घायल को स्थिर करने, अस्पताल पहुंचाने जैसे काम शामिल रहते हैं. इन वजहों से बहुत-से लोग आज जिंदा हैं.
फोर्स के कर्मचारी क्या कहते हैं?
एक कर्मचारी ने बताया, 'पहले लोग सड़क पर तड़पते रहते थे. अब हमें कॉल मिलते ही हम कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच जाते हैं. सही समय पर इलाज मिलने से कई लोगों की जान बची है.'
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का बयान
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, 'हर जान की कीमत है. सड़क सुरक्षा फोर्स इसलिए बनाई गई ताकि पंजाब में कोई भी सिर्फ देर से एंबुलेंस पहुंचने की वजह से अपनी जान न गंवाए. '
एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच
सड़क सुरक्षा फोर्स आज पंजाब के लोगों के लिए एक जीवन रक्षक प्रणाली बन चुकी है. यह साबित करती है कि सरकार सिर्फ सड़कें नहीं बनाती, बल्कि उन पर चलने वालों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है.
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