भारत और इंग्लैंड के बीच एजबेस्टन टेस्ट के तीसरे दिन अंपायर्स के फैसले पर विवाद हो गया. इंग्लिश बल्लेबाज मैथ्यू पॉट्स के कैच पर कई सवाल उठे. रिप्ले में गेंद श्रेयस अय्यर के हाथों में जाने से पहले जमीन पर गिरती हुई लगी. लेकिन मैदानी अंपायर अलीम डार के सॉफ्ट सिग्नल में आउट दिए जाने की वजह से मैथ्यू पॉट्स को पवेलियन लौटना पड़ा. इस वजह से इंग्लैंड की पारी 284 रन पर सिमट गई. पॉट्स के आउट होने के बाद सॉफ्ट सिग्नल चर्चा में है. तो जानते हैं कि क्या होता है सॉफ्ट सिग्नल और इसका मतलब क्या है.
ADVERTISEMENT
सॉफ्ट सिग्नल के बारे में जानने से पहले बात करते हैं मैथ्यू पॉट्स के आउट होने के बारे में. इंग्लैंड की पारी का 62 ओवर मोहम्मद सिराज ने डाला. ओवर की तीसरी गेंद पॉट्स के बल्ले का किनारा लेकर स्लिप में खड़े श्रेयस अय्यर के पास गई. उन्होंने डाइव लगाकर गेंद को लपक लिया. लेकिन साफ नहीं दिखा कि क्या कैच सही से पकड़ा गया था. ऐसे में मैदानी अंपायर अलीम डार ने सॉफ्ट सिग्नल में आउट बताते हुए फैसले को थर्ड अंपायर के पास भेज दिया. रिप्ले में साफ कुछ नहीं दिखा.
किस वजह से हुआ हंगामा
दिखाई दिया कि गेंद श्रेयस अय्यर के हाथ में जाने से पहले जमीन पर टकरा गई. इस दौरान अय्यर के हाथ की एक अंगुली बॉल के नीचे जाती हुई लगी. मगर रिप्ले साफ नहीं था. ऐसे में माना जा रहा था कि अंपायर मैथ्यू पॉट्स को नॉट आउट देंगे. लेकिन हुआ इसका उलटा. थर्ड अंपायर मरे इरास्मस ने इंग्लिश बल्लेबाज को आउट करार दिया. फैसले से हालांकि पॉट्स नाखुश दिखे. वे सिर हिलाते और अंपायर से बात करते नज़र आए. बाद में भारतीय विकेटकीपर ऋषभ पंत भी पॉट्स के साथ इस बारे में बात कर रहे थे. लेकिन साफ था कि इंग्लिश बल्लेबाज खुश नहीं था.
क्या और क्यों है सॉफ्ट सिग्नल
अब जानते हैं सॉफ्ट सिग्नल के बारे में. साल 2014 में क्रिकेट में इसकी शुरुआत हुई. इससे पहले अंपायर आपस में बात करके थर्ड अंपायर से मदद मांगते थे. लेकिन 2014 से किसी कैच को लेकर अस्पष्टता होने पर मैदानी अंपायर को सॉफ्ट सिग्नल देना होता है. ऐसा इसलिए ताकि थर्ड अंपायर को मैदानी अंपायर के मत का पता चल सके. सॉफ्ट सिग्नल में मैदानी अंपायर को बताना होता है कि खिलाड़ी आउट है या नहीं. इसका काफी महत्व रहता है.
अगर रिप्ले देखने पर भी थर्ड अंपायर यह फैसला नहीं कर पाए कि खिलाड़ी आउट है या नहीं तब वह सॉफ्ट सिग्नल को ही अपना फैसला बताता है. थर्ड अंपायर को रिप्ले में ठोस वजह दिखने पर ही वह सॉफ्ट सिग्नल से इतर फैसला देता है. सॉफ्ट सिग्नल को लाने की एक बड़ी वजह थी टीवी कैमरों पर साफ विजुअल नहीं आने पर थर्ड अंपायर को फैसला लेने में होने वाली समस्या को कम करना. पहले ऐसा होता था कि साफ विजुअल नहीं आने पर थर्ड अंपायर अक्सर नॉट आउट का ही फैसला देता था.
पिछले कुछ समय में सॉफ्ट सिग्नल को लेकर काफी विवाद हुए हैं. ऐसे में इसमें बदलाव की बातें हो रही हैं. ज्यादातर मामलों में बाउंड्री के पास पकड़े जाने वाले कैच में सॉफ्ट सिग्नल का मतलब नहीं रह जाता है. इतनी दूर का कैच वैसे भी मैदानी अंपायर को साफ नहीं दिखता है. हाल ही में आईपीएल से सॉफ्ट सिग्नल को हटाया जा चुका है.
ADVERTISEMENT