पंजाब का नशे के खिलाफ निर्णायक युद्ध

इस अभियान का सबसे सख्त और असरदार कदम रहा नशा तस्करों की संपत्तियों को ध्वस्त करना. जिन लोगों ने नशे के धंधे से करोड़ों रुपये कमाकर मकान और दुकानें बनाई थीं, उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बुलडोजर चलाया गया.

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पंजाब सरकार का युद्ध नशियां विरुद्ध अभियान (PC: Getty)

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पंजाब सरकार का युद्ध नशियां विरुद्ध अभियान

साल 2023 में शुरू हुआ था अभ‍ियान

पंजाब लंबे समय से नशे की एक गंभीर समस्या से जूझता रहा है. यह सिर्फ कुछ लोगों की लत नहीं थी, बल्कि पूरे समाज की सेहत, सुरक्षा और भविष्य पर खतरा बन चुकी थी. हजारों परिवार टूट चुके थे, युवाओं की जिंदगियां अंधेरे में जा रही थीं और गांवों में डर का माहौल था. इसी सच्चाई को स्वीकार करते हुए पंजाब सरकार ने “युद्ध नशियां विरुद्ध” अभियान शुरू किया, एक ऐसा राज्यव्यापी आंदोलन, जिसका उद्देश्य सिर्फ नशा तस्करों को पकड़ना नहीं, बल्कि नशे की पूरी जड़ को खत्म करना है.

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कब शुरू हुआ यह अभियान

युद्ध नशियां विरुद्ध अभियान 2023 में शुरू किया गया. सरकार ने साफ किया कि यह कोई प्रतीकात्मक मुहिम नहीं होगी, बल्कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए पूरी ताकत से लड़ी जाने वाली लड़ाई होगी. पुलिस, प्रशासन, पंचायत और समाज, सभी को इसमें शामिल किया गया.

नशा तस्करों की अवैध संपत्तियों पर सीधा वार

इस अभियान का सबसे सख्त और असरदार कदम रहा नशा तस्करों की संपत्तियों को ध्वस्त करना. जिन लोगों ने नशे के धंधे से करोड़ों रुपये कमाकर मकान और दुकानें बनाई थीं, उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बुलडोजर चलाया गया. इससे यह संदेश साफ गया कि पंजाब में अब नशे से कमाया गया पैसा सुरक्षित नहीं है. लोगों का भरोसा सरकार पर बढ़ा और नशा माफिया में डर पैदा हुआ.

ग्राम पंचायतों की भागीदारी: गांव खुद बने प्रहरी

सरकार ने यह समझा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस नहीं जीत सकती. इसलिए ग्राम पंचायतों को इस अभियान का हिस्सा बनाया गया. सैकड़ों पंचायतों ने अपने गांवों में नशे के खिलाफ प्रस्ताव पारित किए. इन प्रस्तावों में तय किया गया कि गांव में कोई नशा नहीं बिकेगा. नशा बेचने वालों की सूचना दी जाएगी. नशे में फंसे युवाओं की मदद की जाएगी. कई गांवों ने खुद को नशा-मुक्त गांव घोषित कर दिया. एक सरपंच ने कहा कि पहले हमारे गांव में नशा आम बात थी. आज गांव के लोग खुद निगरानी रखते हैं.

नशा पीड़ितों के लिए इलाज और पुनर्वास

सरकार मानती है कि नशे का शिकार व्यक्ति अपराधी नहीं बल्कि मरीज होता है. इसलिए युद्ध नशियां विरुद्ध के तहत नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों को मजबूत किया गया है. यहां लोगों को इलाज, काउंसलिंग, मानसिक सहायता और जीवन दोबारा शुरू करने की दिशा मिलती है. कई युवा जो कभी नशे में डूबे थे, आज सामान्य जिंदगी जी रहे हैं.

ड्रोन से आने वाले नशे पर तकनीकी प्रहार

सीमा पार से ड्रोन के जरिए नशा भेजा जाना एक बड़ी चुनौती था. इसे रोकने के लिए सरकार ने एंटी-ड्रोन सिस्टम लगाए हैं, जो संदिग्ध ड्रोन को पहचानकर रोक देते हैं. इससे नशे की सप्लाई चेन पर सीधा असर पड़ा है.

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि युद्ध है. हम नशा तस्करों, उनके पैसों और उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करेंगे. पंजाब के युवाओं को नशे से आज़ाद कर के रहेंगे.

एक अभियान से आंदोलन तक

युद्ध नशियां विरुद्ध अब सिर्फ सरकारी योजना नहीं रह गया है. यह एक जन आंदोलन बन चुका है. गांव, परिवार, स्कूल, पंचायत और सरकार सभी मिलकर पंजाब को नशे से मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. यह लड़ाई लंबी है, लेकिन पंजाब ने तय कर लिया है कि आने वाली पीढ़ियों को नशे की छाया में नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य दिया जाएगा.

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