भारत की स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने खुलासा किया है कि उन्होंने पेरिस ओलिंपिक के बाद 26 साल की उम्र में संन्यास लेने का मन बना लिया था, मगर पेरिस ओलिंपिक में मेडल से चूकने के बाद उन्होंने इस फैसले को टाल दिया. टोक्यो ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना ने अपनी एकेडमी पर फोकस करने के लिए संन्यास लेने पर विचार किया था. असम की यह मुक्केबाज वर्ल्ड चैंपियनशिप से इंटरनेशनल लेवल पर वापसी करने के लिए तैयार है और उनका टारगेट ओलिंपिक में दूसरा पदक जीतना है.
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टोक्यो ओलिंपिक की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट लवलीना पिछले साल अगस्त में पेरिस ओलिंपिक खेलों के बाद से इंटरनेशनल टूर्नामेंट से दूर हैं. रिंग से दूर रहने के दौरान उन्होंने अपनी अकादमी पर फोकस किया, जिसका उद्घाटन जून में गुवाहाटी में हुआ. लवलीना ने पीटीआई से कहा-
जब मैंने अपनी अकादमी शुरू करने के बारे में सोचा तो मैंने पेरिस तक खेलने की योजना बनाई थी और उसके बाद मैं संन्यास ले सकती थी, लेकिन पेरिस में नतीजा वैसा नहीं रहा जैसा मैंने सोचा था. अगर मैं वहां पदक जीत लेती तो खेल को अलविदा कह सकती थी.
पेरिस ओलिंपिक में लवलीना लगातार दूसरा ओलिंपिक पदक जीतने के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन महिला मिडिलवेट (75 किग्रा) वर्ग के क्वार्टर फाइनल में चीन की चैंपियन ली कियान से हार गईं. लवलीना से जब पूछा गया कि क्या 2028 में होने वाला ओलिंपिक उनका आखिरी टूर्नामेंट हो सकता है, उन्होंने कहा-
हां ऐसा संभव है. मैं पेरिस ओलिंपिक में भी गोल्ड मेडल जीत सकती थी, क्योंकि पोडियम तक पहुंचने वाली सभी खिलाड़ियों को मैं पहले हरा चुकी थी. जिससे मेरे खेल के स्तर का पता चलता है. मैं ओलंपिक पदक जीत सकती हूं
लवलीना चार सितंबर से लिवरपूल में शुरू होने वाली विश्व चैंपियनशिप में भाग लेगी, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि इस प्रतियोगिता के लिए उन्होंने सीमित तैयारी की है. उन्होंने कहा-
मैं लंबे ब्रेक के बाद इंटरनेशनल लेवल पर प्रतिस्पर्धा करने जा रही हूं. मुझे तैयारी के लिए केवल एक महीने का समय मिला है, इसलिए मैं अपनी सहनशक्ति और ताकत पर भी काम कर रही हूं.
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