नीरज चोपड़ा ने लुसाने डायमंड लीग में गोल्ड मेडल जीता. उन्होंने 89.08 मीटर के थ्रो के साथ यह कामयाबी हासिल की. नीरज चोपड़ा चोट के बाद वापसी कर रहे थे लेकिन गोल्ड मेडल जीतने के लिए उनका पहला ही थ्रो काफी रहा. उन्होंने पहले थ्रो में ही 89 मीटर पार करा दिया दूसरा कोई जैवलिन थ्रोअर इसके आसपास भी नहीं आ सका. चैक गणराज्य के याकूब वाडलेच दूसरे और अमेरिका के कर्टिस थॉम्पसन तीसरे नंबर पर रहे. वाडलेच ने 85.88 और थॉम्पसन ने 83.72 मीटर थ्रो किया था.
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नीरज चोपड़ा डायमंड लीग जीतने वाले पहले भारतीय एथलीट हैं. इससे पहले जुलाई में स्टॉकहोम डायमंड लीग में वे दूसरे नंबर पर रहे थे और रजत पदक हासिल किया था. 24 साल के नीरज चोपड़ा ग्रोइन इंजरी के चलते बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स से हट गए थे. उन्हें यह चोट यूजीन में वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान लगी थी. यहां उन्होंने सिल्वर मेडल जीता था. इससे पहले डिस्कस थ्रोअर विकास गौड़ा पहले भारतीय हैं जो डायमंड लीग के टॉप-3 में रहे थे.वे दो बार 2012 न्यूयॉर्क और 2014 दोहा में दूसरे और शंघाई व यूजीन में 2015 में तीसरे नंबर पर रहे थे.
पहला ही थ्रो 89.04 का
नीरज ने पहला ही थ्रो 89.04 का फेंका. इसके जरिए उन्होंने बढ़त बना ली. उनके दूसरे थ्रो ने 85.18 मीटर की दूरी तय की. उन्होंने तीसरा थ्रो नहीं फेंका. उनका चौथा थ्रो फाउल रहा वहीं पांचवीं कोशिश उन्होंने पास कर दी. छठी और आखिरी कोशिश में उन्होंने 80.04 मीटर का थ्रो किया. इसके साथ ही नीरज ने ज्यूरिख में 7 और 8 सितंबर को होने वाली डायमंड लीग के लिए भी क्वालिफाई कर लिया. वे ऐसा करने वाले भी पहले भारतीय हैं. उन्होंने 85.20 मीटर क्वालिफाइंग मार्क के जरिए बुडापेस्ट में होने वाली 2023 वर्ल्ड चैंपियनशिप में भी जगह बना ली.
ज्यूरिख में होगा संघर्ष
नीरज चोपड़ा लुसाने प्रतियोगिता से पहले सात अंक के साथ वह चौथे नंबर पर थे. टोक्यो ओलिंपिक के रजत पदक विजेता चेक गणराज्य के याकुब वादलेच 20 अंक के साथ टॉप पर थे जबकि जर्मनी के जूलियन वेबर के 19 जबकि विश्व चैंपियन ग्रेनाडा के एंडरसन पीटर्स के 16 अंक हैं. तालिका में टॉप-छह में रहने वाले खिलाड़ियों को ज्यूरिख में होने वाले फाइनल में जगह मिलती है.
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