नई दिल्ली. विराट कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ सेंचुरियन टेस्ट जीतकर इतिहास रच दिया. इतना ही नहीं, कोहली कोहली साउथ अफ्रीका में दो टेस्ट जीतने वाले इकलौते भारतीय कप्तान भी बने. इसके अलावा भी उन्होंने टेस्ट कप्तानी के कई मुकाम हासिल किए, लेकिन बतौर बल्लेबाज न तो ये साल और न ही ये टेस्ट मैच कोहली के लिए खुशियां लेकर आया. दो साल या 26 महीनों या 768 दिनों से चला आ रहा उनके अंतरराष्ट्रीय शतक का इंतजार और भी लंबा हो गया. बल्लेबाजी की इस विफलता ने विराट कोहली को ऐसे शर्मनाक सिलसिले के शीर्ष पर बैठा दिया, जिसके रास्ते में राहुल द्रविड़ से लेकर अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा भी शामिल हैं.
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लगातार 14 पारियों में फिसले कोहली
दरअसल, यहां बात विराट कोहली के टेस्ट करियर के औसत की हो रही है. विराट सेंचुरियन टेस्ट की पहली पारी में 35 और दूसरी पारी में 18 रन बनाकर आउट हुए. इसके साथ ही 23 नवंबर 2019 को लगाए गए अपने पिछले शतक के बाद से लगातार 14वीं बार विराट की टेस्ट औसत नीचे की ओर आ गई. 23 नवंबर को विराट की औसत 54.97 थी जो अब 50.34 तक पहुंच गई है. नवंबर 2017 के बाद से ये विराट की सबसे कम टेस्ट औसत भी है.
रहाणे दूसरे तो द्रविड़ चौथे नंबर पर
जहां तक लगातार पारियों में टेस्ट औसत गिरने के सिलसिले की बात है तो विराट 14 पारियों के साथ इस मामले में शीर्ष पर पहुंच गए हैं. उनके बाद अजिंक्य रहाणे का नंबर आता है जिनकी टेस्ट औसत लगातार 13 पारियों तक नीचे की ओर आई थी. इस मामले में चेतेश्वर पुजारा 11 पारियों के साथ तीसरे और राहुल द्रविड़ 10 पारियों के साथ चौथे नंबर पर हैं.
बिना शतक कोहली का प्रदर्शन
कोहली ने 23 नवंबर 2019 को बांग्लादेश के खिलाफ कोलकाता में खेले गए पिंक बॉल टेस्ट में शतक लगाने के बाद से 14 टेस्ट में 26.08 के औसत से 652 रन बनाए हैं. इसमें पांच अर्धशतक शामिल हैं. इस दौरान खेले गए 15 वनडे मैचों में उन्होंने 43.26 की औसत और आठ अर्धशतकों की मदद से 649 रन बनाए. कोहली ने इसी दौरान जो 23 टी20 मैच खेले उसमें उनके बल्ले से सात अर्धशतकों की मदद से 777 रन निकले.
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