बिशन सिंह बेदी का दिल्ली में हुआ अंतिम संस्कार, कपिल देव, सहवाग समेत यह हस्तियां रही मौजूद

अमृतसर में 1946 में जन्मे बिशन सिंह बेदी ने भारत की तरफ से 67 टेस्ट मैच में 266 विकेट लिए. उन्होंने 22 टेस्ट में भारत की कप्तानी और इनमें से छह जीते.

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बिशन सिंह बेदी भारत के कप्तान रहे हैं.

बिशन सिंह बेदी भारत के कप्तान रहे हैं.

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बिशन सिंह बेदी के नाम 15 बार एक पारी में पांच विकेट और एक बार मैच में 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड है.बिशन सिंह बेदी ने 1975 से 1979 के बीच चार साल तक टेस्ट क्रिकेट में भारत की कप्तानी की.

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और मशहूर स्पिनर बिशन सिंह बेदी का अंतिम संस्कार दिल्ली के लोधी रोड श्मशान घाट पर हुआ. कपिल देव और वीरेंद्र सहवाग सहित क्रिकेट जगत की कई हस्तियां इस दौरान मौजूद रहे. बेदी का सोमवार (23 अक्टूबर) को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था. वह 77 साल के थे. भारत की विश्व कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव, मदन लाल, सहवाग और कीर्ति आजाद सहित भारतीय क्रिकेट के कई खिलाड़ियों ने उन्हें अंतिम विदाई दी. इस अवसर पर आशीष नेहरा, जहीर खान, मोहम्मद अजहरुद्दीन, वर्तमान में अफगानिस्तान की टीम के सहयोगी स्टाफ के सदस्य अजय जडेजा और बेदी से स्पिन के गुर सीखने वाले मुरली कार्तिक भी उपस्थित थे. इनके अलावा कई राजनीतिक पार्टियों के नेता भी मौजूद रहे.

 

लोधी शवदाहगृह में इस अवसर पर मौजूद एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा, ‘फर्स्ट क्लास क्रिकेट खेल चुके कई खिलाड़ी भी इस अवसर पर मौजूद थे. वह महान क्रिकेटर ही नहीं बहुत अच्छे इंसान भी थे.’ अमृतसर में 1946 में जन्मे बेदी ने भारत की तरफ से 67 टेस्ट मैच में 266 विकेट लिए. उनके नाम 15 बार एक पारी में पांच विकेट और एक बार मैच में 10 विकेट लेने का रिकॉर्ड है. वह भारतीय स्पिन चौकड़ी के सदस्य थे, जिसमें उनके अलावा इरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चद्रशेखर और श्रीनिवास वेंकटराघवन शामिल थे. इन चारों ने 1966 से 1978 के बीच भारतीय गेंदबाजी को संभाला था.

 

4 साल तक 22 टेस्ट में की भारत की कप्तानी

 

बेदी 1990 के आसपास न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के दौरों पर भारतीय क्रिकेट टीम के मैनेजर रहे. इसके अलावा उन्होंने नेशनल सेलेक्टर का जिम्मा भी संभाला. मनिंदर सिंह, सुनील जोशी और मुरली कार्तिक जैसे स्पिनर्स को उन्हें तकनीकी गुर सिखाए और बेहतर गेंदबाज बनने में मदद की. वह भारत के सबसे कमाल के कप्तानों में शामिल किए जाते हैं. 1975 से 1979 के बीच चार साल तक उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में भारत की कप्तानी की. उन्हें यह जिम्मा मंसूर अली खान पटौदी के संन्यास के बाद मिला. बेदी 22 मैचों में भारत के कप्तान रहे जिनमें से छह में भारतीय टीम ने जीत दर्ज की.

 

 

दिल्ली को बनाया घरेलू क्रिकेट की ताकत

 

वह अपने पूरे जीवन में सत्ता-विरोधी रहे और उनके विचार अक्सर सत्ता में बैठे लोगों पर सवाल उठाते रहे. बेदी ने 15 साल की उम्र में उत्तरी पंजाब की तरफ से 1961-62 में रणजी ट्रॉफी में कदम रखा था. बाद में वह दिल्ली की तरफ खेले. वह 1974 से 1982 तक सबसे लंबे समय तक दिल्ली रणजी टीम के कप्तान रहे और उनके नेतृत्व में यह टीम राष्ट्रीय क्रिकेट बड़ी ताकत बन बन कर उभरी.
 

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